Please assign a menu to the primary menu location under menu

Health

एक्सपर्ट ने बताया अब शुरुआती स्टेज में ही हो सकती है अल्जाइमर की पहचान, कराना होगा ये ब्लड टेस्ट

अल्जाइमर
Image Source : UNSPLASH

अल्जाइमर रोग डिमेंशिया के सबसे आम कारणों में से एक है। इस स्थिति में याददाश्त जाने लगती है, सोचने-समझने की क्षमता धीरे ढेरी धीरे होती जाती है। अल्जाइमर के लक्षण आमतौर पर तब दिखाई देते हैं जब व्यक्ति 65 साल से ज़्यादा उम्र का होता है। एक बार जब किसी व्यक्ति में इस बीमारी का पता चल जाता है, तो इसे ठीक करने का कोई इलाज नहीं है। इसलिए, इसके जोखिम को रोकने के लिए शुरुआती आकलन करना ज़रूरी है। 17 मार्च को इंस्टाग्राम पर, न्यूरोलॉजिस्ट और कंटेंट क्रिएटर डॉ. आयशा शेरज़ई ने एक ब्लड टेस्ट के बारे में बताया, जो अल्जाइमर के जोखिम का संकेत दे सकता है और इस खतरे का शुरुआती चरण में ही पता लगाने में मदद कर सकता है।

ब्लड टेस्ट जो अल्जाइमर की शुरुआती चेतावनी देता है

डॉ. शेरज़ई के अनुसार, 25 साल तक 70 साल की उम्र वाली 2,766 महिलाओं पर एक लंबा अध्ययन किया गया है। इस रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने ब्लड बायोमार्कर pTAU217 को मापा। यह एक ऐसा प्रोटीन है जिस पर अल्ज़ाइमर बीमारी के शुरुआती चरण में ही केमिकल टैग दिखने लगते लगते हैं। यानी लक्षण दिखाई देने से काफी पहले ही इसमें बदलाव शुरू हो जाता है।

डॉ. शेरज़ई कहती हैं कि P27 में डिमेंशिया का खतरा लगभग तीन गुना बढ़ा हुआ पाया गया। सबसे ऊपरी स्तर वाले ग्रुप में यह जोखिम सबसे निचले ग्रुप की तुलना में करीब सात गुना अधिक था। यह 70 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में ज़्यादा दिखाई दिया। इसके अलावा हार्मोन थेरेपी से भी एक महत्वपूर्ण संबंध सामने आया। जिन महिलाओं ने एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन दोनों का सेवन किया, उनमें डिमेंशिया का जोखिम अधिक पाया गया।

अल्जाइमर के खतरे को कैसे कम करें?

डॉ. शेरज़ाई ने बताया कि हालांकि रिसर्च ने बायोमार्कर और डिमेंशिया के बीच के संबंध को साबित कर दिया है, लेकिन इसका कारण अभी तक क्लिनिकली साबित नहीं हुआ है। ये टेस्ट अभी बाज़ार में उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन जब तक इनका इंतज़ार किया जा रहा है, तब तक सेहतमंद जीवनशैली की आदतें बनाए रखना ज़रूरी है, जिनके बारे में माना जाता है कि वे अल्ज़ाइमर के खतरे को कम करती हैं। ऐसे में डिमेंशिया से बचने के लिए अपनी नसों की सेहत का ध्यान रखें। अपनी डाइट में हरी सब्ज़ियां खाना शुरू करें। रोजाना एक्सरसाइज करें। तनाव जितना हो सके उतना कम लें। अपने आप को सोशली एक्टिव रखें। 

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है

hi.quicksamachar@gmail.com

Leave a Reply