सोना बेचकर घर, पढ़ाई और बिजनेस! युवाओं का नया ट्रेंड जानकर चौंक जाएंगे

सोना बेचकर घर, पढ़ाई और बिजनेस! युवाओं का नया ट्रेंड जानकर चौंक जाएंगे

कई सालों तक मुंबई के एक बैंक लॉकर में रखी भारी सोने की चूड़ियां, शादी का हार और पीढ़ियों से चली आ रही ज्वेलरी सिर्फ यादों की निशानी बनकर पड़ी रही. लेकिन फिर एक युवा दंपती ने ऐसा फैसला लिया, जो पहले शायद ही कोई सोचता. 20 के दशक के आखिर में पहुंचे रितु और मदन पाटिल ने विरासत में मिली ज्वेलरी बेच दी और उस पैसे से अपना पहला घर खरीद लिया.

सोना बेचकर घर, पढ़ाई और बिजनेस! युवाओं का नया ट्रेंड जानकर चौंक जाएंगे

सोना बेचने से उन्हें करीब 20 लाख रुपये मिले. इस रकम से नवी मुंबई में घर की डाउन पेमेंट बढ़ गई और उनकी मासिक होम लोन EMI करीब 20,000 रुपये कम हो गई. अब बची रकम से वे हर दूसरे महीने लोनावला घूमने भी जा पाते हैं.मुथूट एक्सिम के CEO केयूर शाह कहते हैं, “नई पीढ़ी के लिए जिंदगी के बड़े लक्ष्य ज्यादा मायने रखते हैं. उनके लिए पुरानी ज्वेलरी अब सिर्फ भावनाओं से जुड़ी चीज नहीं रह गई है.”

अब लॉकर में नहीं, निवेश में दिख रहा फायदा

देशभर में Gen Z और मिलेनियल्स अब लॉकर में रखे पुराने सोने को बेचकर या एक्सचेंज करके उसे बेहतर इस्तेमाल में ला रहे हैं. कोई उस पैसे से घर खरीद रहा है, कोई विदेश में पढ़ाई कर रहा है, कोई बिजनेस शुरू कर रहा है तो कोई शेयर बाजार और दूसरे निवेश विकल्पों में पैसा लगा रहा है.वहीं, कई लोग पुरानी डिजाइन वाली ज्वेलरी को नई और हल्की डिजाइन के गहनों से भी बदलवा रहे हैं.

भारत में पड़ा है लाखों टन सोना

पॉपली ग्रुप के निदेशक राजीव पॉपली का कहना है कि उनके स्टोर्स पर आने वाले करीब 7075% ग्राहक पुराना सोना एक्सचेंज करके नई ज्वेलरी खरीद रहे हैं.उनके मुताबिक, भारत में 1 लाख टन से ज्यादा सोना बैंक लॉकरों और घरों में बिना इस्तेमाल के पड़ा है, लेकिन उसका बहुत छोटा हिस्सा ही अब तक रीसायकल हुआ है.

निवेश के रूप में बढ़ रही है सोने की अहमियत

भारत आज भी दुनिया का सबसे बड़ा गोल्ड ज्वेलरी बाजार है, लेकिन लोगों की सोच बदल रही है.ICRA के मुताबिक, वित्त वर्ष 202526 में सोने के गहनों की मांग 21% घट गई, जबकि गोल्ड बार और गोल्ड कॉइन में निवेश करीब 22% बढ़ गया. इससे साफ है कि युवा अब सोने को सिर्फ गहना नहीं, बल्कि निवेश का जरिया मान रहे हैं.

रिकॉर्ड कीमतों ने बदली सोच

बेंगलुरु की 25 वर्षीय एक बैंक कर्मचारी ने सोने की रिकॉर्ड कीमतों का फायदा उठाते हुए विरासत में मिली ज्वेलरी बेच दी और उससे शेयर बाजार में निवेश किया.उनका कहना है, “सोना एक एसेट है, जिसे हमेशा लॉकर में बंद रखने की जरूरत नहीं है. अगर अच्छी कीमत मिल रही है और उससे बेहतर रिटर्न वाले निवेश किए जा सकते हैं, तो ऐसा करने में कोई हर्ज नहीं है.”

इसी तरह 29 वर्षीय सुप्रिया वेंकटेश ने अपनी शादी में मिली मां की पुरानी ज्वेलरी एक्सचेंज कर नई डिजाइन के गहने खरीदे. उनका कहना है कि आज के दौर में दशकों पुरानी डिजाइन की ज्वेलरी पहनना पसंद नहीं किया जाता.

शिक्षा और बिजनेस के लिए भी बिक रहा सोना

बेंगलुरु के एक परिवार ने अपने लॉकर में रखे सोने का कुछ हिस्सा बेचकर करीब 80 लाख रुपये जुटाए. इस पैसे से परिवार के बेटे की अमेरिका में मास्टर्स की पढ़ाई और पिता के फूड प्रोसेसिंग बिजनेस की शुरुआत हुई.

परिवार का मानना है कि सोना मुश्किल समय और बड़े जीवन लक्ष्यों के लिए ही रखा जाता है और शिक्षा तथा कारोबार शुरू करना उसी श्रेणी में आता है.

टाइटन को भी मिला फायदा

पिछले नौ महीनों में टाइटन के तनिष्क स्टोर्स पर 5 लाख से ज्यादा ग्राहकों ने 11,000 किलोग्राम से अधिक सोना एक्सचेंज किया है. कंपनी का कहना है कि इससे देश में गोल्ड रीसाइक्लिंग को बढ़ावा मिला है और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी.

क्या खत्म हो जाएगा सोने से भावनात्मक रिश्ता?

समाजशास्त्रियों का मानना है कि निवेश की सोच बढ़ने के बावजूद शादी, त्योहार और पारिवारिक परंपराओं में सोने की भावनात्मक अहमियत बनी रहेगी. हालांकि नई पीढ़ी अब भारीभरकम गहनों की बजाय हल्के डिजाइन, गोल्ड ETF और दूसरे निवेश विकल्पों को ज्यादा महत्व दे रही है.यानी, अब नई पीढ़ी के लिए लॉकर में रखा सोना सिर्फ चमकने के लिए नहीं, बल्कि जिंदगी के बड़े सपनों को पूरा करने का जरिया बनता जा रहा है.

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