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Health

नींद में जेंडर गैप! जानिए पुरुषों की तुलना में क्यों कम सोती हैं महिलाएं; रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा

Why Women Sleep Less Gender Sleep Gap Reasons And Health Effects

Gender Sleep Gap: दुनियाभर में हुए हालिया रिसर्च ने एक ऐसी सच्चाई को उजागर किया है जिसे अब तक अक्सर नजरअंदाज किया जाता रहा है। इसे विशेषज्ञों ने जेंडर स्लीप गैप का नाम दिया है। यह केवल इस बारे में नहीं है कि कौन कितने घंटे सोता है बल्कि यह महिलाओं के शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक सुकून और सामाजिक भूमिकाओं से जुड़ा एक गहरा संकट है।

क्या है जेंडर स्लीप गैप

सरल शब्दों में कहें तो पुरुषों और महिलाओं की नींद की मात्रा और उसकी गुणवत्ता में जो स्पष्ट अंतर पाया जाता है वही जेंडर स्लीप गैप है। अध्ययनों से पता चलता है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक नींद की कमी का सामना करती हैं। 2025 की वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार नींद पूरी न होने के कारण सुबह उठते समय 57 फीसदी महिलाओं का मूड पुरुषों की तुलना में औसतन तीन अंक कम सकारात्मक रहता है।

मातृत्व और नींद का सीधा संबंध

नींद में इस अंतर का एक बड़ा कारण पारिवारिक जिम्मेदारियां हैं। 2017 के एक शोध के आंकड़े बताते हैं कि 45 साल से कम उम्र की केवल 48% माताएं ही रात में 7 घंटे की अनिवार्य नींद ले पाती हैं। इसके उलट जिन महिलाओं के बच्चे नहीं हैं उनमें यह आंकड़ा 62% है। यह स्पष्ट करता है कि बच्चों की देखभाल और रात में बार-बार उठने की मजबूरी महिलाओं की नींद के चक्र को पूरी तरह बाधित कर देती है।

बायोलॉजिकल और हार्मोनल चुनौतियां

महिलाओं की नींद केवल सामाजिक कारणों से ही प्रभावित नहीं होती बल्कि इसके पीछे गहरे जैविक कारण भी हैं। जीवन के विभिन्न चरणों में होने वाले हार्मोनल बदलाव जैसे।

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मासिक धर्म

पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द और हार्मोनल उतार-चढ़ाव।

गर्भावस्था

शारीरिक असहजता और मानसिक तनाव।

मेनोपॉज

हॉट फ्लैशेस और रात में पसीना आने जैसी समस्याएं।

ये सभी कारक महिलाओं की डीप स्लीप (गहरी नींद) को कम करते हैं जिससे शरीर और मस्तिष्क की रिकवरी ठीक से नहीं हो पाती।

मल्टीटास्किंग और मेंटल लोड

विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं का दिमाग दिनभर अधिक जटिल मल्टीटास्किंग और भावनात्मक प्रोसेसिंग करता है। वैज्ञानिक रूप से अधिक सक्रिय मस्तिष्क को रिकवरी के लिए पुरुषों की तुलना में 20 मिनट अतिरिक्त नींद की जरूरत होती है। लेकिन विडंबना यह है कि घर और ऑफिस के बीच संतुलन बनाने के दबाव में उन्हें यह अतिरिक्त समय तो दूर भी नसीब नहीं होती।

सेहत पर गंभीर खतरे

  • लगातार नींद की कमी केवल थकान तक सीमित नहीं रहती। यह महिलाओं में निम्नलिखित समस्याओं का जोखिम बढ़ा देती है:
  • हार्मोनल असंतुलन और थायराइड की समस्याएं।
  • तनाव, चिंता और अवसाद।
  • मेटाबॉलिक डिसऑर्डर और हृदय रोगों का खतरा।
  • याददाश्त में कमी और एकाग्रता का अभाव।

जेंडर स्लीप गैप को कम करना केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं बल्कि एक सामाजिक जरूरत है। परिवार के सदस्यों को घर के कामों और बच्चों की जिम्मेदारी साझा करनी चाहिए ताकि महिलाओं को भी पर्याप्त आराम मिल सके। अच्छी नींद केवल विलासिता नहीं बल्कि एक स्वस्थ जीवन की बुनियादी जरूरत है।

hi.quicksamachar@gmail.com

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