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आयुर्वेद के अनुसार, आपकी त्वचा का स्वास्थ्य आपके शरीर में दोषों के आंतरिक संतुलन पर निर्भर करता है। इसके लिए कई आयुर्वेदिक उपाय हैं जिससे शरीर में त्रिदोष का संतुलन बेहतर होता है। इसके लिए सोरसॉप फल भी कारगर है। सोरसॉप को हिंदी में हनुमान फल और लक्ष्मण फल के रूप में जाना जाता है। इसे लोग नॉर्मल फल की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाता है। लेकिन आयुर्वेद में इस फल को गुणकारी माना जाता है। इस फल में पाए जाने वाले पोषक तत्व त्वचा को ठंडक और पोषण देने वाले हैं। इससे त्वचा में निखार आता है। आइये आयुर्वेद डॉक्टर चंचल शर्मा (आशा क्लीनिक की निदेशक और वरिष्ठतम स्त्री रोग विशेषज्ञ) से जानते हैं इस फल का कैसे उपयोग करें।
सोरसॉप यानि हनुमान या लक्ष्मण फल के फायदे
गहराई से नमी प्रदान करना और पोषण देना- वात दोष के असंतुलन की वजह से त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है। साउरसोप एक प्राकृतिक मॉइस्चराइजर के रूप में काम करता है और आपकी त्वचा को पोषण प्रदान करता है, जिससे त्वचा स्वस्थ और मुलायम बनती है। इसका गहरा हाइड्रेशन फॉर्मूला आपकी त्वचा को चिकना और स्वस्थ बनाता है। आपको इसका नियमित रूप से उपयोग करना चाहिए।
एंटी एजिंग और नेचुरल- आयुर्वेदिक चिकित्सा में रसायन शब्द का प्रयोग उन तत्वों के लिए किया जाता है जो दीर्घायु और युवावस्था को बढ़ाने में सहायक होते हैं। सोरसॉर्प एक माइल्ड मोइस्चुराइजर का काम करता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट गुणों की वजह से शरीर को ऑक्सीडेटिव तनाव से लड़ने में मदद मिलती है। जो एजिंग को कम करता है।
सूजन कम करे- पित्त दोष को संतुलित करने से सूजन कम होती है। त्वचा संबंधी समस्याएं जैसे लालिमा, जलन, एक्जिमा और रोसैसिया को आयुर्वेद में पित्त दोष से जोड़कर देखा जाता है। शरीर में गर्मी बढ़ने से ऐसा होता है। लेकिन लक्ष्मण फल सोरसॉर्प त्वचा की सूजन को शांत करने में मदद करता है। इससे त्वचा को ठंडक मिलती है। खासतौर से इसके बीजों से तैयार किए गए तेल को त्वचा के लिए अच्छा माना गया है।
नेचुरल ग्लो- आयुर्वेदिक चिकित्सा के अनुसार दमकती त्वचा रस और रक्त धातुओं के सुचारू रूप से काम करने को दिखाता है। सोरसॉर्प में त्वचा के लिए जरूरी विटामिन पाए जाते हैं जो त्वचा की रंगत निखारने में मदद करते हैं। इससे नई कोशिकाएं बनती है और दोनों धातु खून और रस को बेहतर बनाया जा सकता है।
सोरसॉप एक प्राकृतिक रूप से उपलब्ध फल है जो आपकी त्वचा के लिए लाभकारी है। यह दोषों को संतुलित करने और ऊतकों को पोषण देने में सहायक है। हालांकि इसका उपयोग करने से पहले किसी विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें। क्योंकि हर किसी की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती हैं।



