
बरेली, अमृत विचार। जाट रेजिमेंट के 231 वर्षों के गौरवशाली सैन्य इतिहास और वीरता की गाथा को करीब से जानना है तो बरेली स्थित जेआरसी म्यूजियम खास जगह है। यहां रेजिमेंट के विभिन्न युद्धों और सैन्य अभियानों से जुड़ी दुर्लभ वस्तुओं के साथ पाकिस्तान सेना से युद्ध के दौरान कब्जाए गए हथियार और सैन्य सामग्री भी सुरक्षित रखी गई हैं।
म्यूजियम में पाकिस्तानी सेना का एक झंडा भी प्रदर्शित है, जिसे युद्ध में कब्जे में लिया गया था। इसे उल्टा प्रदर्शित किया गया है। इसके अलावा पाकिस्तानी सेना की सिंगल शॉट गन, वायरलेस सिस्टम, टाइपराइटर, हथगोले, दस्तावेज, डाक टिकट, मुद्रा और अन्य सामान भी संग्रहालय का हिस्सा हैं। यहां 83 एमएम का पाकिस्तानी रॉकेट लॉन्चर भी रखा गया है, जिसका इस्तेमाल टैंकों को निशाना बनाने के लिए किया जाता था।
1965 की जंग से कारगिल तक शौर्य की कहानी
जाट रेजिमेंट का उद्घोष ‘जाट बलवान, जय भगवान’ उसकी सैन्य परंपरा और जज्बे की पहचान है। 1965 के भारतपाक युद्ध में रेजिमेंट के जवानों ने अदम्य साहस का परिचय दिया। युद्ध से जुड़ी कई वस्तुएं आज भी जेआरसी म्यूजियम में संरक्षित हैं। रेजिमेंट ने आजादी के बाद 194748 के युद्ध के साथ 1962, 1965 और 1971 के युद्धों तथा 1999 के कारगिल संघर्ष में हिस्सा लिया। इन अभियानों से जुड़ी सैन्य सामग्री संग्रहालय में प्रदर्शित है। कारगिल की ऊंची और दुर्गम चोटियों पर जवानों ने किन परिस्थितियों में अभियान चलाया, इसकी झलक भी यहां रखी गई वस्तुओं से मिलती है।
1795 में हुई थी रेजिमेंट की स्थापना
जाट रेजिमेंट की स्थापना ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1795 में कलकत्ता में की थी। इसके बाद 1922 में बरेली में जेआरसी सेंटर की स्थापना हुई। रेजिमेंट ने विभिन्न युद्धों, अभियानों और विशेष ऑपरेशनों में भाग लेते हुए सैन्य इतिहास में अपनी अलग पहचान बनाई। रेजिमेंट को अब तक 3 अशोक चक्र, 8 महावीर चक्र और 14 कीर्ति चक्र सहित अनेक वीरता पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। गणतंत्र दिवस परेड में भी इसकी टुकड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। 1974, 2007, 2021 और 2025 में रेजिमेंट की बटालियन को ‘बेस्ट मार्चिंग कंटिंजेंट’ का सम्मान मिला।
ब्रिटिश अफसरों की यादें भी संग्रहालय में
बंटवारे के समय रेजिमेंट में तैनात ब्रिटिश अधिकारियों से जुड़ी यादें भी संग्रहालय में सुरक्षित हैं। उनके मेडल, परिवारों की तस्वीरें और अन्य स्मृति चिह्न यहां रखे गए हैं। ब्रिटिश अधिकारियों की पीढ़ियां भी इन यादों को देखने के लिए संग्रहालय आती रही हैं। म्यूजियम में सेना की वर्दी और हथियारों में समय के साथ आए बदलावों को भी प्रदर्शित किया गया है। जापानी समुराई तलवारें भी यहां आकर्षण का केंद्र हैं।
सूबेदार मेजर मौजी राम की प्रतिमा बनी प्रेरणा
जाट रेजिमेंट के इतिहास में सूबेदार मेजर और मानद कैप्टन मौजी राम का विशेष स्थान है। झज्जर, हरियाणा के रहने वाले मौजी राम ने अपना जीवन राष्ट्रसेवा को समर्पित किया। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। 1931 में ईस्टर्न आर्मी कमांडर की पत्नी और प्रसिद्ध कलाकार सिबिला बैरो ने उनके व्यक्तित्व से प्रभावित होकर उनका चित्र बनाया था।म्यूजियम में प्रवेश करते ही उनकी प्रतिमा दिखाई देती है। एनसीसी कैडेट और स्कूलकॉलेजों के विद्यार्थी भी यहां पहुंचकर रेजिमेंट के इतिहास और सैनिकों की वीरगाथाओं से परिचित होते हैं। संग्रहालय में मौजूद हर वस्तु जाट रेजिमेंट की सैन्य परंपरा, साहस, अनुशासन और सर्वोच्च बलिदान की कहानी बयां करती है।