​​​नाबालिग बेटी को बार-बार किया प्रेग्नेंट, जबरन कराया गर्भपात फिर चंद रुपयों में बेचा मासूम; पुलिस ने दबोचा दरिंदा पिता और पूरा गैंग!​​​​

​​​नाबालिग बेटी को बार-बार किया प्रेग्नेंट, जबरन कराया गर्भपात फिर चंद रुपयों में बेचा मासूम; पुलिस ने दबोचा दरिंदा पिता और पूरा गैंग!​​​​

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक बेहद शर्मनाक, खौफनाक और इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी है. पुलिस ने एक 16 साल की नाबालिग लड़की के साथ बार-बार दुष्कर्म करने, जबरन गर्भपात कराने और उसके नवजात बच्चे को गैरकानूनी तरीके से बेचने के मामले में उसके अपने सगे पिता समेत 6 से 8 लोगों को गिरफ्तार किया है. यह घिनौना खेल साल 2023 से चल रहा था, जब नाबालिग की मां अपने पति से अलग हो गई थी और अपनी 3 बेटियों को उसके पास छोड़कर चली गई थी. आरोपी पिता ने अपनी ही बड़ी बेटी को अपनी हवस का शिकार बनाया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी. इस दौरान नाबालिग 2 बार गर्भवती हुई, जिसमें एक बार जबरन पिल्स खिलाकर गर्भपात कराया गया और दूसरी बार बच्चे के जन्म के बाद उसे बेच दिया गया. आइए इस दिल दहला देने वाली घटना के हर पहलू को विस्तार से जानते हैं.

कैसे शुरू हुआ जुल्म और फर्जी दस्तावेजों का खेल?

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी पिता (उम्र 38 साल) ने साल 2023 में न्यू राजेंद्र नगर इलाके में एक रिश्तेदार के घर पर अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ पहली बार दुष्कर्म किया था. इसके बाद से यह सिलसिला लगातार चलता रहा. जब लड़की गर्भवती हुई और उसने अपनी बुआ को इसकी जानकारी दी, तो बुआ ने पिता को बता दिया. पिता ने लड़की की पिटाई की और बुआ के जरिए गर्भपात की गोलियां मंगवाकर उसका जबरन गर्भपात करवा दिया. इसके बाद भी दरिंदगी रुकी नहीं और साल 2025 में लड़की फिर से गर्भवती हो गई.

इस बार इस राज को छुपाने के लिए आरोपियों ने एक शातिर साजिश रची. पिता ने उसे वर्षा मंडल नाम की एक नर्स के घर भेजा, जहां से उसे गीता राय नाम की दूसरी महिला के पास भेज दिया गया. गीता राय ने साजिश के तहत लड़की की उम्र छुपाकर उसे बालिग और शादीशुदा बताया तथा राजधानी रायपुर के दंगाणीया स्थित ‘वासुदेव हॉस्पिटल’ में फर्जी दस्तावेजों (जैसे फर्जी आधार कार्ड) के सहारे उसे भर्ती कराया.

नवजात बच्चे का सौदा और डिलीवरी का खौफनाक सच

ईटीवी भारत की रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल में फर्जी कागजातों के दम पर लड़की की सीजेरियन डिलीवरी कराई गई, जहां उसने एक बेटे को जन्म दिया. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, बच्चे के जन्म के बाद अस्पताल के डॉक्टर, लड़की के पिता और अन्य आरोपियों की मिलीभगत से उस नवजात मासूम बच्चे को किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया गया. डिलीवरी के बाद लगभग 15 दिनों तक उसे गीता राय के घर पर ही रखा गया और फिर उसके पिता उसे वापस अपने घर ले आए.

मासूम डरी-सहमी थी और उसे जबरन कुछ दस्तावेजों पर दस्तखत भी कराए गए थे. लेकिन कहते हैं न कि पाप का घड़ा कभी न कभी भरता ही है. इस मूक जुल्म को सहने के बाद पीड़िता ने किसी तरह सोशल मीडिया के जरिए अपनी मां से संपर्क किया और अपनी पूरी आपबीती सुनाई. मां तुरंत बेटी के पास पहुंची और सोमवार को थाने पहुंचकर इस जुल्म के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई.

पुलिस की बड़ी कार्रवाई और गिरफ्तारियां

शिकायत मिलते ही रायपुर पुलिस हरकत में आ गई और न्यू राजेंद्र नगर थाने में बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की गंभीर धाराओं के तहत दुष्कर्म, धोखाधड़ी, आपराधिक धमकी, गर्भपात और अन्य अपराधों में मामला दर्ज किया गया. इस मामले में पुलिस ने बेहद सख्ती दिखाते हुए पोक्सो (POCSO) अधिनियम और किशोर न्याय (JJ) अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी हैं.

पुलिस ने अब तक कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें खुद नाबालिग का सगा पिता, उसकी बुआ, एक निजी अस्पताल का सुपरवाइजर साहब मंडल, उसकी पत्नी और नर्स वर्षा मंडल, गीता राय, उसका पति रोहित कुमार राय और बच्चे को खरीदने वाला व्यक्ति शामिल है. इस सनसनीखेज खुलासे ने समाज के सुरक्षा तंत्र और रिश्तों की पवित्रता पर बहुत बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है.

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