चित्रकूट में सिस्टम लाचार: घुटने भर पानी में गर्भवती महिला को खाट पर लादकर अस्पताल ले जाने को मजबूर हुए ग्रामीण

चित्रकूट में सिस्टम लाचार: घुटने भर पानी में गर्भवती महिला को खाट पर लादकर अस्पताल ले जाने को मजबूर हुए ग्रामीण
चित्रकूट में सिस्टम लाचार: घुटने भर पानी में गर्भवती महिला को खाट पर लादकर अस्पताल ले जाने को मजबूर हुए ग्रामीण

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले से एक बेहद विचलित और सोचने पर मजबूर करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ ग्रामीण इलाकों की बदहाल सड़कों और लचर स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत बयां करता एक वीडियो तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। मानसून की बारिश के कारण जब गाँव की संपर्क सड़कें जलमग्न हो गईं और कोई भी एम्बुलेंस गाँव तक नहीं पहुँच सकी तो स्थानीय ग्रामीणों को स्वयं ही बड़ा कदम उठाना पड़ा। गाँव के कई युवकों ने मिलकर एक गर्भवती महिला को लकड़ी की चारपाई (खाट) पर लिटाया और उसे संतुलित रखने के लिए रस्सी का सहारा लेते हुए, कमर तक गहरे पानी में डूब चुके रास्ते से सुरक्षित बाहर निकाला। यह घटना क्षेत्र में विकास के दावों के बीच जमीनी हकीकत का आईना दिखाती है, जहाँ आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए लोगों को भारी संघर्ष करना पड़ता है।

यह पूरा मामला चित्रकूट के एक सुदूर ग्रामीण क्षेत्र का है, जहाँ लगातार हो रही बारिश के कारण गाँव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाला मुख्य रास्ता पूरी तरह से पानी में डूब गया और उसने एक बड़े तालाब का रूप ले लिया। स्थानीय निवासियों के अनुसार, गाँव की एक गर्भवती महिला को अचानक तीव्र प्रसव पीड़ा शुरू हुई। घबराए हुए परिजनों ने तुरंत सरकारी एम्बुलेंस सेवा को फोन मिलाया और मदद की गुहार लगाई। लेकिन कीचड़, मलबे और रास्ते पर लबालब भरे पानी को देखकर एम्बुलेंस चालक ने गाँव के भीतर आने में असमर्थता व्यक्त कर दी एम्बुलेंस का मुख्य मार्ग पर ही रुक जाना परिजनों के लिए एक बड़ी मुसीबत बन गया, क्योंकि अस्पताल तक जाने का कोई अन्य साधन गाँव में उपलब्ध नहीं था।

ऐसी नाजुक स्थिति में, जब महिला और होने वाले बच्चे दोनों की जान दांव पर लगी थी, गाँव के लोगों ने सूझबूझ और एकजुटता का परिचय दिया। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। उन्होंने घर में रखी एक खाट को बाहर निकाला, उस पर बिछौना डालकर महिला को लिटाया और फिर चार मजबूत कंधों ने उस खाट को उठा लिया। पानी का बहाव तेज था और नीचे की सड़क अदृश्य हो चुकी थी, जिससे पैर फिसलने का लगातार डर बना हुआ था। इस खतरे से निपटने के लिए ग्रामीणों ने एक लंबी रस्सी का उपयोग किया। कुछ लोग आगे-आगे रस्सी पकड़कर पानी की गहराई और रास्ते का अंदाजा लगा रहे थे, जबकि बाकी लोग खाट को थामे हुए अत्यंत सावधानी से आगे बढ़ रहे थे। लगभग आधा किलोमीटर के इस बेहद खतरनाक सफर को तय करने के बाद आखिरकार वे महिला को मुख्य सड़क तक सुरक्षित पहुँचाने में सफल रहे, जहाँ से उसे आगे अस्पताल ले जाया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *