
Chhatrapati Sambhajinagar 3 Deaths: छत्रपति संभाजीनगर में मोबाइल के लिए पिता से अनबन में बेटे ने पहाड़ी से छलांग लगाई. मौत से पहले मां ने बेटे से जो बातें कहीं वो आपको भी झकझोर देंगी.
5 मुख्य बातें
मां की दर्दनाक अपील- तेरे साथ चलूंगी… रुक जा बेटा.
बेटे को बचाने की कोशिश में मां-बाप भी नीचे गिरे.
पिता से अनबन के बाद बेटे ने उठाया कदम.
डॉक्टर बनने का सपना देखने वाला छात्र था कुणाल.
पहाड़ पर 3 मौतों से पूरे इलाके में शोक.
“तुम्हारा पापा से विवाद है ना… देखो, मैं अभी अपना मंगलसूत्र निकालकर फेंक देती हूं! तुम्हारे पिता को छोड़ देती हूं, तुम्हारे साथ चलूंगी… हम दोनों साथ रहेंगे, लेकिन मुझे छोड़कर मत जाओ बेटा!” छत्रपति संभाजीनगर के खवड्या पहाड़ की चोटी पर हवा में गूंजती एक बेबस मां की ये आखिरी आर्त पुकार भी उसकी औलाद का दिल न पिघला सकी. पिता से अनबन और मोबाइल की किस्तों के तनाव में जान देने जा रहे 11वीं के होनहार बेटे को बचाने के लिए मां अपने सुहाग की सबसे बड़ी निशानी (मंगलसूत्र) तक त्यागने को तैयार हो गई. लेकिन, जिद पर अड़े बेटे ने जैसे ही 200 फीट गहरी खाई में छलांग लगाई, उसे पकड़ने की अंधी दौड़ में मां और पिता भी खाई में जा गिरे. पल भर में पूरा परिवार खत्म हो गया.
मूल रूप से जालना के अंबड तालुका स्थित धनगर पिंपलवाड़ी गांव का रहने वाला चांदगुडे परिवार पिछले 18 सालों से शहर में रह रहा था. परिवार के 16 वर्षीय बेटे कुणाल ने हाल ही में 10वीं की परीक्षा में 92 प्रतिशत अंक हासिल किए थे और उसने 11वीं में दाखिला लिया था. कुणाल का सपना डॉक्टर बनने का था. लेकिन, बीते कुछ दिनों से कुणाल और उसके पिता के बीच पैसों और मोबाइल की ईएमआई (EMI) को लेकर कड़वाहट बढ़ गई थी. खर्च के पैसे न मिलने और महंगे आईफोन की किस्तों को लेकर कुणाल बेहद मानसिक तनाव में आ गया था.
गहने-iPhone फेंका और भागा पहाड़ की तरफ
शुक्रवार दोपहर तनाव इस कदर बढ़ा कि कुणाल ने अपने पास मौजूद आईफोन, हाथ की घड़ी और गले की चांदी की चेन निकालकर फेंक दी और सीधे खवड्या पहाड़ की तरफ दौड़ पड़ा. घबराए माता-पिता भी उसके पीछे भागे. पहाड़ के खतरनाक ढलान पर खड़ा कुणाल जब छलांग लगाने की जिद करने लगा, तो उसकी मां का कलेजा कांप उठा. मां बिलख-बिलख कर बेटे से पीछे हटने की भीख मांगती रही. कुणाल बोला- “मां, मेरी कोई बात नहीं सुनता. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। मेरी जिंदगी में कोई दिलचस्पी नहीं है. अब कुछ नहीं हो सकता…”
मां ने अपनी ममता का वास्ता दिया, पति को छोड़ने और मंगलसूत्र उतार फेंकने तक का फैसला पल भर में सुना दिया ताकि बेटा रुक जाए. लेकिन अवसाद और गुस्से के अंधेरे में डूबे कुणाल ने खाई में छलांग लगा दी.
खाई में समा गया हंसता-खेलता परिवार
जैसे ही कुणाल ने छलांग लगाई, किनारे पर खड़ी मां और पिता ने उसे हवा में पकड़ने की बदहवास कोशिश की. इस कोशिश में संतुलन बिगड़ा और दोनों भी बेटे के पीछे 150 से 200 फीट गहरी खाई में जा गिरे. मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीम ने जब तीनों के शवों को बाहर निकाला, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं. इस दिल दहला देने वाली त्रासदी ने आज की युवा पीढ़ी में कम होती सहनशीलता और पारिवारिक संवाद के अभाव पर एक गहरा और दर्दनाक सवाल छोड़ दिया है.
जयप्रकाश सिंह का नाम देश के चुनिंदा क्राइम रिपोर्टर में आता है. लंबे समय से टीवी जर्नलिस्ट के तौर पर सेवाएं जारीं. करीब तीन दशकों से सक्रिय पत्रकारिता का हिस्सा. प्रोड्यूसर, एंकर और क्राइम रिपोर्टर की भूमिका. फिलहाल टीवी9 भारतवर्ष में एसोसिएट एडिटर के रूप में मुंबई से कार्यरत. इसके पहले 2012 से 2022 तक मुंबई में इंडिया टीवी के ब्यूरो चीफ रहे. 2005 से 2012 तक नेटवर्क18 ग्रुप के आईबीएन7 चैनल में डिप्टी ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी संभाली. 2004 से 2005 तक सहारा समय मुंबई में बतौर सीनियर स्पेशल कॉरस्पॉन्डेंट काम किया. 2002 से 2004 तक मुंबई ब्यूरो में बीएजी फिल्म्स के चीफ रहे. नवभारत टाइम्स मुंबई में 1997 में जॉइन किया और यहां 2 साल काम किया. इससे पहले भी चार संस्थानों में काम किया.