
लखनऊ, अमृत विचार। पूज्य उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर जी महाराज रविवार सुबह चारबाग दिगंबर जैन मंदिर से मंगल पदविहार करते हुए भव्य शोभायात्रा के साथ आशियाना दिगंबर जैन मंदिर पहुंचे। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने जयघोष, पुष्पवर्षा और मंगलगान के बीच उनका भव्य स्वागत किया। शोभायात्रा के दौरान जगहजगह श्रद्धालुओं ने आरती उतारकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
धर्मसभा में दिया संस्कार और आत्मचिंतन का संदेश
आशियाना दिगंबर जैन मंदिर पहुंचने के बाद विधिविधान से पूजाअर्चना संपन्न हुई। इसके बाद आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर जी महाराज ने कहा, “मैं फसलें नहीं, नस्लों को सुधारने आया हूँ; कच्चों को पकाने और पके को बचाने आया हूँ।”
उन्होंने कहा कि समाज का वास्तविक विकास केवल आर्थिक समृद्धि से नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र और आध्यात्मिक जागरण से होता है। यदि नई पीढ़ी में संयम, सदाचार और नैतिक मूल्यों का विकास हो जाए तो समाज स्वत सशक्त और संस्कारित बन जाएगा। उन्होंने सभी लोगों से आत्मचिंतन, धर्म, ध्यान और सदाचार को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
वर्षायोग को बताया आत्मशुद्धि का श्रेष्ठ अवसर
उपाध्याय श्री ने कहा कि वर्षायोग आत्मशुद्धि, साधना और धर्माराधना का श्रेष्ठ समय है। उन्होंने श्रद्धालुओं से वर्षायोग के दौरान नियमित रूप से प्रवचन, स्वाध्याय, ध्यान और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने की अपील की।
उन्होंने बताया कि जैन परंपरा के अनुसार वर्षा ऋतु में साधुसंत एक ही स्थान पर निवास कर धर्म, ध्यान और आत्मकल्याण का संदेश देते हैं। साथ ही सूक्ष्म जीवों की रक्षा और अहिंसा के पालन के उद्देश्य से चार माह तक एक ही स्थान पर विराजमान रहते हैं।
19 जुलाई को होगा वर्षायोग कलश स्थापना महोत्सव
पूज्य उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर जी महाराज लखनऊ में चार माह के वर्षायोग के लिए विराजमान रहेंगे। इस दौरान 19 जुलाई 2026 को आशियाना दिगंबर जैन मंदिर में वर्षायोग कलश स्थापना महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर लखनऊ जैन समाज के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी, समाजसेवी, महिलाएं, युवा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरा मंदिर परिसर जिनेंद्र भक्ति, मंगलगान और जयघोष से गुंजायमान रहा।