Quick Samachar: Evening Arghya To Sun: भगवान सूर्य को धरती का एक मात्र साक्षात देवता माना गया है। उनकी पूजा शास्त्रों में बेहद शुभ और कल्याणकारी मानी गई है। वैसे तो रविवार का दिन सूर्य देव की उपासना के लिए समर्पित है लेकिन अगर हर दिन सूर्य देव की पूजा विधिविधान के साथ की जाए तो सूर्य देव की कृपा जीवन पर बनी रहती है।

क्या शाम को सूर्य देव को अर्घ्य देने से सचमुच उतर सकता है कर्ज? जानिए शास्त्रों में क्या बताया गया है​
क्या शाम को सूर्य देव को अर्घ्य देने से सचमुच उतर सकता है कर्ज? जानिए शास्त्रों में क्या बताया गया है​

धर्म ग्रथों में सूर्य देव की पूजा के लिए सूर्योदय के समय को सबसे शुभ बताया गया है लेकिन क्या आप जानते हैं कि शाम के समय सूर्य पूजा का भी विशेष महत्व होता है।

शाम के समय सूर्य पूजा का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, को जल चढ़ाने से व्यक्ति को यशपुण्य, सुखसौभाग्य के साथ ही सम्मान की प्राप्ति होती है। वहीं, शास्त्रों के अनुसार, शाम के समय यानी संध्यावंदन या प्रदोष काल में सूर्य देव की पूजा करने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। शरीर के रोग दोष दूर होते है। इसके अलावा, सुबह और शाम के समय जो भी व्यक्ति पूजा करता है उसके ऊपर से भारी से भरी कर्ज भी ऊतर सकता है।

शाम में सूर्य देव की पूजा की विधिनियम

  • शाम के समय सूर्य पूजा के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। कुछ नियम और विधि का भी विशेष ध्यान रखना होता है।
  • इसके लिए सूर्यास्त से पहले स्नान करें और फिर सफेद या लाल रंग के साफ कपड़े पहनें।
  • अब अपना मुख पश्चिम दिशा में रखें या उत्तरपूर्व यानी ईशान कोण की ओर रखें ।
  • अब पूजा सामग्री को एकत्र करें. जैसे एक तांबे का लोटा, कुमकुम, अक्षत और लाल फूल।
  • लोटे में जल लें और सभी सामग्री को जल में डाल दें।
  • अब सूर्य मंत्र का उच्चारण करें और फिर जल सूर्यदेव को अर्पित कर दें ।
  • अर्घ्य देते समय मन ही मन में अपनी मनोकामना को दोहराएं।
  • शाम के समय सूर्य देव को जिस जल से अर्घ्य दे रहे हैं उसमें गुड़ या रोली भी मिला सकते हैं।

शाम को सूर्य पूजा और अर्घ्य देते किन बातों का रखें ध्यान?

शास्त्रों में बताया गया है कि, और अर्घ्य देते समय इस बात का ध्यान रखें कि गिरता हुआ जल न तो आपके पैरों पर पड़े और न तो पैरो के नीचे आए ।

सूर्य देव को अर्घ्य देते समय इस बात का ध्यान रखें कि पूजा के बाद धूप या घी का दीपक जरूर जलाएं और सूर्य आरती करें।

घर के बाहर अर्घ्य दे रहे हैं तो इसका ध्यान रखें कि बचा जल पौधे में डालें या साफ जगह पर डालें न की नाली में डालें।