Quick Samachar: राम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर SIT ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है. अब चर्चा शुरू हो गई है कि SIT रिपोर्ट में अखिर किन लोगों के नाम हैं. कौन भगवान राम के मंदिर में आने वाले दान की चोरी कर रहा था.आधिकारिक तौर पर तो नहीं, लेकिन सूत्रों से ये पता चला है कि राम मंदिर के दान में बड़ा खेल चल रहा है. जल्द ही इस मामले में बड़ा एक्शन हो सकता है. हालांकि किस की गिरफ्तारी होगी या फिर नया ट्रस्ट बनेगा. इस पर अभी सरकार कुछ भी कहने से बच रही है.

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: SIT की रिपोर्ट में क्या-क्या, किस पर गिरफ्तारी की तलवार; क्या नया ट्रस्ट बनेगा?​

राम मंदिर में दान देने वाले और आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं के मन में कई प्रश्न हैं. इन्हीं प्रश्नों के जवाब पीले रंग के उस लिफाफे में मौजूद कुछ पन्नों में लिखे गए हैं. चढ़ावा चोरी पर बनी SIT ने मंगलवार को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट यूपी के अपर गृह सचिव संजय प्रसाद को सौंप दी.आपको बता दें अपर गृह सचिव संजय प्रसाद और राम मंदिर ट्रस्ट में यूपी सरकार के प्रतिनिधि भी हैं. खैर, रिपोर्ट भले ही गोपनीय है लेकिन हमने अपने सूत्रों से आपके लिए कई जानकारियां जुटाई हैं.

सूत्रों के मुताबिक, SIT ने दान राशि की गिनती प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं. गणना कर्मियों के चयन और ट्रस्ट पदाधिकारियों से उनके संबंधों की जांच की गई. इस मामले में अब तक किसी को क्लीन चिट नहीं मिली है. सूत्र बताते हैं कि कुछ कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश है. मंदिर की आंतरिक व्यवस्था के लिए जिम्मेदार ट्रस्ट के सदस्यों की भूमिका पर सवाल हैं.

रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई

अब इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी. SIT ने मामले की विस्तृत जांच के लिए अतिरिक्त समय और सहयोगी अधिकारियों की मांग की है. सरकार की तरफ से अभी रिपोर्ट की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है लेकिन ये जरूर साफ किया गया कि ये अंतिम रिपोर्ट नहीं है और जांच आगे भी जारी रहेगी. अब सवाल ये है कि इस रिपोर्ट का मतलब क्या है. चलिए इसे विस्तार से बताते हैं. सूत्र बता रहे हैं कि रिपोर्ट में दान की गिनती प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं. इसका मतलब है कि राम मंदिर में नई व्यवस्था बन सकती है. जांच के दायरे में किसी संदिग्ध को क्लीन चिट नहीं दी गई यानी ऐसे लोगों पर गाज गिरने की संभावना दिख रही है.

फाइल अभी क्लोज नहीं हुई, जांच जारी

सूत्र बता रहे हैं कि इस मामले में कुछ कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश है यानी मुमकिन है कि ऐसे कर्मचारी गिरफ्तार हो सकते हैं और जेल भी जा सकते हैं. आंतरिक व्यवस्था से जुड़े ट्रस्ट पदाधिकारियों पर अगर सवाल हैं तो इसका मतलब है मंदिर के ट्रस्ट में बदलाव मुमकिन है. SIT ने विस्तृत जांच के लिए अतिरिक्त समय मांगा है. ये साफ संकेत हैं कि फाइल अभी क्लोज नहीं हुई है और आगे भी जांच जारी रहेगी.

13 जून को 3 सदस्यीय SIT का हुआ थ गठन

यूपी सरकार ने राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन और दान राशि में हेराफेरी के आरोपों की जांच के लिए 13 जून को तीन सदस्यीय SIT बनाई थी. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने विशेष जांच दल का अनुरोध किया था. राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर SIT ने 6 दिन कई स्तरों पर जांच की. पूछताछ के साथ दस्तावेजों की पड़ताल की. जांच के दौरान SIT ने किन कड़ियों को खंगाला उन्हे भी बताते हैं.

SIT टीम ने जांच के दौरान क्याक्या देखा?

SIT ने जांच के दौरान दान के रिकॉर्ड देखे. दान गिनती से लेकर बैंक में जमा करने की प्रक्रिया को समझा. दानपेटी और मंदिर परिसर में लगे CCTV की फुटेज देखी. 100 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की जिनमें ट्रस्ट के सदस्य और बैंक कर्मचारी भी शामिल थे. गणना कर्मियों के चयन और ट्रस्ट पदाधिकारियों से उनके संबंधों की जांच की गई. साथ ही मंदिर के अंदर की निगरानी व्यवस्था को देखा गया. चढ़ावा चोरी का मामला पहली बार 7 जून को सामने आया जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कुछ तथ्यों का हवाला देते हुए दान में गबन का इल्जाम लगाया. अब जब प्रारंभिक रिपोर्ट आ चुकी है और अब इस पर ज्यादा राजनीतिक सरगरमी दिखाई दे रही है.

पीएम की तरफ से बनाया था ट्रस्ट

इस मंदिर को ट्रस्ट चलाता है और उस ट्रस्ट को प्रधानमंत्री कार्यालय के द्वारा बनाया गया था. इस ट्रस्ट में एक व्यक्ति है चंपत राय. सबसे ज्यादा आरोप उसी के ऊपर लग रहे हैं. कौन है चंपत राय? किसका आदमी है? इतनी बड़ी घटना हो गई और अब तक मंदिर उसी के हाथ में है. क्या उसे सबूत मिटाने के लिए समय दिया जा रहा है? उसे कौन बचा रहा है? इस पूरे मामले पर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव, आप नेता अरविंद केजरीवाल, यूपी कांग्रेस अध्यक्ष और खुद योगी के सहयोगी ओमप्रकाश राजभर सवाल उठा चुके हैं.

विवादों के बीच ट्रस्ट के सभी सदस्य दिखे

इन विवादों के बीच मंगलवार को राम मंदिर परिसर में शेषावतार मंदिर का ध्वजारोहण कार्यक्रम हुआ. वैदिक मंत्रोच्चार, पूजाअर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच शेषावतार मंदिर पर धर्म ध्वज स्थापित किया गया. इस कार्यक्रम में करीब 3 हजार विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया था। जिनमें बड़ी संख्या में संत, धर्माचार्य और ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारी शामिल थे.

ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्र और गोपालजी राव कार्यक्रम में मौजूद थे. वो तस्वीरों में भी नजर आए. ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय भी कार्यक्रम में मौजूद थे लेकिन उन्होंने तस्वीरों से दूरी बनाए रखी. इन तीनों से चढ़ावा चोरी मामले में SIT ने पूछताछ भी की थी. ट्रस्ट की निगरानी में ही ये कार्यक्रम आयोजित किया गया.

आखिर 200 किलो चांदी का सच क्या है?

राम मंदिर दान से कैश चोरी, गहनों की हेराफेरी और जमीन खरीद में घोटालों के दावों के बाद आखिर 200 किलो चांदी का सच क्या है. ये समझना भी जरुरी है. विश्व सिंधी सेवा संगम के अध्यक्ष राजू मानवानी ने दावा किया कि 200 किलो चांदी की ईंटों की रसीद नहीं दी गई है. ये चांदी चढ़ावे में दी गई थी. चांदी की एकएक ईंट एक किलोग्राम की थी. ये चढ़ावा मंदिर निर्माण के समय ही दिया गया था.

अखिलेश ने उठाए सवाल

चांदी घोटाले की इस खबर को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट किया. उन्होंने लिखा, एक परत और खुली. अगर बीजेपी वालों और उनके संगीसाथियों के महापाप की परतें यूं ही खुलती रहीं तो जांच की जगह ढांक का काम और भी तेजी से शुरू हो जाएगा. और अब चढ़ावा चोरी के दूसरे हिस्से यानी SIT रिपोर्ट की बात. जिसमे कई राज और घोटाले का पूरा लेखा जोखा दर्ज है.