
हालांकि, उनके भाषण का एक खास हिस्सा सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें वे सपा चुनाव हार गई तो क्या होगा, इसकी एक भयावह तस्वीर जनता के सामने रखती दिखीं। उन्होंने खुले मंच से कहा कि अगर 2027 में समाजवादी पार्टी चुनाव हार जाती है, तो उसके बाद स्थिति इतनी खराब होगी कि थाने और प्रशासनिक अधिकारी तक उनकी बात नहीं सुनेंगे। सांसद के इस बयान पर अब सूबे की सियासत गरमा गई है।
प्रिया सरोज ने मंच से ऐसा क्या कह दिया?
मछलीशहर लोकसभा क्षेत्र से सांसद प्रिया सरोज इन दिनों अपने इलाके में लगातार जनसंपर्क कर रही हैं और पार्टी संगठन को मजबूत करने में जुटी हैं। इसी दौरान एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने 2027 के चुनावी नतीजों का जिक्र किया।
प्रिया सरोज ने जनता को आगाह करते हुए कहा, “2027 में अगर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार नहीं बनी, तो आपकी यह बेटी थाने में आपके काम के लिए फोन भी नहीं कर पाएगी, यह बात आप लोग ध्यान रखिएगा। अगर 2027 में हमारी सरकार नहीं आती है, तो मैं आपके लिए किसी डीएम या एसडीएम से भी बात करने की स्थिति में नहीं रहूंगी।”
उन्होंने आगे माहौल बनाते हुए कहा कि अगर 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बन जाती है, तो प्रदेश की हर महिला और हर युवा की आवाज शासन के हर स्तर तक पहुंचेगी और उनकी सुनवाई होगी।
क्या सपा के अंदर सता रहा है हार का संशय?
सांसद प्रिया सरोज के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में एक नई बहस छिड़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से इतना पहले ही समाजवादी पार्टी के नेताओं के बयानों में इस तरह के ‘डर’ का झलकना कई सवाल खड़े करता है। क्या पार्टी के अंदर 2027 के नतीजों को लेकर कोई संशय या झिझक है?
उत्तर प्रदेश में पिछले साढ़े 9 सालों से भारतीय जनता पार्टी की योगी आदित्यनाथ सरकार सत्ता में है। समाजवादी पार्टी ने हालिया लोकसभा चुनाव में ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के दम पर शानदार प्रदर्शन किया था और 2027 के लिए भी इसी रणनीति पर दांव लगा रही है।
लेकिन लोकसभा और विधानसभा चुनावों के मुद्दे पूरी तरह अलग होते हैं। 2027 में सपा का सीधा मुकाबला सीएम योगी आदित्यनाथ से होना है, जिनकी छवि प्रशासनिक कसावट और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर काफी सख्त मानी जाती है। विपक्षी दल के रूप में सपा अब तक योगी सरकार के खिलाफ कोई बहुत बड़ा जमीनी मुद्दा खड़ा नहीं कर पाई है। ऐसे में प्रिया सरोज का अपनी ही लाचारी बयां करना पार्टी के लिए नुकसानदेह भी साबित हो सकता है।
ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं।