भारतीय महिला क्रिकेट की स्टार बल्लेबाज स्मृति मंधाना मैदान पर अपनी शांत मुस्कान और शानदार बल्लेबाजी के लिए जानी जाती हैं। लेकिन हाल ही में राज शमानी के पॉडकास्ट में उनकी भावनाओं का एक अलग पहलू सामने आया। बातचीत के दौरान स्मृति ने बताया कि वह अपनी परेशानियों को लंबे समय तक अपने ऊपर हावी नहीं होने देतीं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें दर्द महसूस नहीं होता। उन्होंने बताया कि कई बार वह अकेले में अपनी भावनाएं जाहिर करती हैं।

‘मैं वॉशरूम या शॉवर में रो लेती हूं’
जब स्मृति मंधाना से पूछा गया कि क्या वह रोती हैं, तो उन्होंने बताया कि वह आमतौर पर अपनी निजी जिंदगी की घटनाओं के लिए नहीं रोतीं। हालांकि, कभीकभी वॉशरूम या शॉवर में अकेले रो लेती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ बेहद करीबी लोगों के सामने ही वह अपनी भावनाएं खुलकर जाहिर कर पाती हैं।
स्मृति मंधाना ने यह भी बताया कि वह दुख को लंबे समय तक पकड़े रखने में विश्वास नहीं करतीं। उनके मुताबिक, वह किसी परेशानी के बारे में ज्यादा देर तक सोचने के बजाय उससे बाहर निकलने और आगे बढ़ने की कोशिश करती हैं।
क्रिकेट की हार ने भी कई बार तोड़ा
पॉडकास्ट में स्मृति मंधाना ने क्रिकेट से जुड़े उन पलों का भी जिक्र किया, जिन्होंने उन्हें अंदर तक प्रभावित किया। उन्होंने 2024 के दुबई टी20 विश्व कप की हार को काफी दर्दनाक बताया। इसके अलावा 2026 के टी20 विश्व कप में भारतीय टीम के सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच पाने से भी उन्हें निराशा हुई। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि हर बार दुख का मतलब आंसू नहीं होता। कई बार इंसान बाहर से सामान्य दिखता है, लेकिन अंदर से काफी परेशान होता है।
फिल्में देखकर ज्यादा भावुक हो जाती हैं Smriti Mandhana
दिलचस्प बात यह है कि स्मृति मंधाना ने बताया कि असल जिंदगी के मुकाबले फिल्मों का उन पर ज्यादा असर होता है। उन्होंने कहा कि फिल्म देखते समय उनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं। हाल ही में ‘मुसाफिर कैफे’ देखते हुए भी वह भावुक हो गई थीं। स्मृति मंधाना ने अपनी जिंदगी को लेकर एक और दिलचस्प बात कही कि उन्हें सहानुभूति पसंद नहीं है। वह मुश्किल समय से निकलकर खुद को दोबारा मजबूत करने में विश्वास रखती हैं।