
नई दिल्ली। बचपन की कुछ आदतें उम्र बढ़ने के साथ अपने आप छूट जाती हैं, लेकिन अगर कोई आदत लगातार बनी रहे तो वह धीरे-धीरे गंभीर समस्या का रूप ले सकती है। राजधानी दिल्ली के द्वारका स्थित मणिपाल हॉस्पिटल से सामने आया एक ऐसा ही मामला लोगों को हैरान कर रहा है। यहां डॉक्टरों ने एक 20 वर्षीय MBBS छात्रा के पेट से करीब 1.2 किलोग्राम वजन का बालों का विशाल गुच्छा निकालने में सफलता हासिल की है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह गुच्छा केवल पेट तक सीमित नहीं था, बल्कि छोटी आंत तक फैला हुआ था।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि छात्रा को करीब 11 साल से अपने बाल निगलने की आदत थी। लंबे समय तक इस आदत को सामान्य मानकर नजरअंदाज किया गया। धीरे-धीरे उसके पेट में निगले गए बाल जमा होते गए और उन्होंने एक बेहद सघन गांठ का रूप ले लिया। जब पेट में दर्द, जी मिचलाने और लगातार उल्टी जैसी गंभीर समस्याएं सामने आईं, तब परिवार उसे अस्पताल लेकर पहुंचा। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। जांच के बाद डॉक्टरों को इस असामान्य स्थिति का पता चला।
यह मामला न सिर्फ मेडिकल दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी बताता है कि बाल खाने या निगलने जैसी आदत को कभी भी महज एक सामान्य आदत समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
पेट दर्द और उल्टी के बाद अस्पताल पहुंची छात्रा
मणिपाल हॉस्पिटल द्वारका के डॉक्टरों के अनुसार, 20 वर्षीय MBBS छात्रा को अस्पताल लाए जाने से पहले काफी समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां थीं। उसे लंबे समय से भूख कम लगने, वजन घटने और कमजोरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।
स्थिति तब ज्यादा गंभीर हुई जब उसे पेट में तेज दर्द होने लगा। इसके साथ ही जी मिचलाने और बार-बार उल्टी की समस्या भी शुरू हो गई। करीब तीन दिन तक इन परेशानियों से जूझने के बाद छात्रा को अस्पताल लाया गया।
डॉक्टरों ने जब उसकी जांच शुरू की तो पेट के ऊपरी हिस्से में एक सख्त गांठ महसूस हुई। यह सामान्य पेट की समस्या नहीं लग रही थी। इसके बाद डॉक्टरों ने आगे की जांच कराने का फैसला किया।
एंडोस्कोपी में दिखा पेट के अंदर का हैरान करने वाला नजारा
डॉक्टरों ने छात्रा की अपर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एंडोस्कोपी की। इस जांच में पेट के भीतर एक बड़ा और सघन बालों का गुच्छा दिखाई दिया। मेडिकल भाषा में इसे ट्राइकोबेजोअर (Trichobezoar) कहा जाता है।
ट्राइकोबेजोअर ऐसी स्थिति है, जिसमें निगले गए बाल पेट में जमा होते रहते हैं और समय के साथ एक ठोस या सघन गुच्छे का रूप ले लेते हैं। इंसानी बाल सामान्य भोजन की तरह आसानी से पचते नहीं हैं। इसलिए यदि कोई व्यक्ति बार-बार बाल निगलता रहे तो वे धीरे-धीरे पेट में इकट्ठा हो सकते हैं।
इस छात्रा के मामले में भी यही हुआ। वर्षों तक बाल निगलने की वजह से उसके पेट में एक बड़ा हेयरबॉल बन गया था।
सिर्फ पेट नहीं, छोटी आंत तक पहुंच गया था बालों का गुच्छा
डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती गुच्छे का आकार था। यह सामान्य आकार का हेयरबॉल नहीं था। करीब 1.2 किलोग्राम वजन का यह बालों का गुच्छा पेट से छोटी आंत तक फैला हुआ था।
इतने बड़े आकार के कारण इसे सामान्य तरीके से निकालना आसान नहीं था। डॉक्टरों ने शुरुआत में एंडोस्कोपी के जरिए ही इसे तोड़कर निकालने की कोशिश की। लेकिन बालों का गुच्छा बेहद बड़ा और कठोर हो चुका था।
एंडोस्कोप के जरिए इसे पूरी तरह निकालना संभव नहीं हो पाया। इसके बाद डॉक्टरों ने वैकल्पिक सर्जिकल प्रक्रिया का फैसला किया।
एंडोस्कोपी से नहीं निकला तो लैप्रोस्कोपी का लिया सहारा
मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ मिनिमल एक्सेस, बैरिएट्रिक, GI और रोबोटिक सर्जरी के चेयरमैन डॉ. (प्रो.) संदीप अग्रवाल के अनुसार, शुरुआती कोशिश एंडोस्कोप के माध्यम से हेयरबॉल को तोड़ने की थी। लेकिन उसके आकार और कठोरता को देखते हुए यह तरीका पर्याप्त नहीं था।
इसके बाद डॉक्टरों ने लैप्रोस्कोपिक सर्जरी का सहारा लिया। इस तकनीक में बड़े चीरे के बजाय छोटे चीरे के माध्यम से सर्जरी की जाती है। इसी प्रक्रिया के जरिए डॉक्टरों ने छात्रा के पेट से लगभग 1.2 किलोग्राम वजन के बालों के गुच्छे को सुरक्षित बाहर निकाला।
इतने लंबे समय से पेट में जमा इस विशाल गुच्छे को बाहर निकालना डॉक्टरों के लिए भी चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया थी। लेकिन सर्जरी सफल रही।
सर्जरी के बाद वापस लौटी भूख और पाचन क्षमता
सर्जरी के बाद छात्रा की हालत में सुधार हुआ। डॉक्टरों के मुताबिक, उसकी भूख और पाचन क्षमता वापस आने लगी और उसने अपनी पढ़ाई भी दोबारा शुरू कर दी।
यह छात्रा MBBS की पढ़ाई कर रही थी और ऐसे समय में उसकी बीमारी का पता चलना और उसका सफल इलाज होना महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक पेट में बाल जमा रहने के कारण उसकी सेहत पर असर पड़ रहा था। भूख कम लगना, वजन घटना और लगातार कमजोरी जैसी समस्याएं भी इसी स्थिति से जुड़ी हो सकती थीं।
हालांकि सर्जरी के बाद शारीरिक समस्या को दूर कर दिया गया, लेकिन डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि सिर्फ बालों का गुच्छा निकाल देना इस समस्या का पूरा इलाज नहीं माना जा सकता।
आखिर क्यों निगलने लगते हैं लोग अपने बाल?
बाल खाने या निगलने की आदत को मेडिकल भाषा में ट्राइकोफेजिया (Trichophagia) कहा जाता है। इसमें व्यक्ति अपने बाल तोड़कर या चबाकर उन्हें निगलता है। कई बार यह आदत बचपन में शुरू होती है और व्यक्ति को लंबे समय तक इसका एहसास भी नहीं होता कि इससे भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो सकती है।
कुछ लोगों में बाल खींचने की आदत भी देखी जाती है, जिसे ट्राइकोटिलोमेनिया कहा जाता है। जब बाल खींचने के बाद उन्हें निगलने की आदत भी जुड़ जाती है, तब पेट में हेयरबॉल बनने का खतरा बढ़ सकता है।
समस्या यह है कि कई परिवार शुरुआत में इसे बच्चे की छोटी-मोटी आदत समझ लेते हैं। बच्चा बाल खा रहा है या निगल रहा है, यह पता चलने के बावजूद कई बार इस पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जाता।
लेकिन अगर यह व्यवहार लगातार जारी रहे तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
पेट में बाल जमा होते रहे तो क्या हो सकता है?
पेट में लंबे समय तक बाल जमा रहने पर कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं। शुरुआत में व्यक्ति को भूख कम लगना, पेट में भारीपन या दर्द, मतली और उल्टी जैसी शिकायत हो सकती है। धीरे-धीरे वजन कम होने और कमजोरी की समस्या भी सामने आ सकती है।
बड़े आकार का हेयरबॉल पाचन तंत्र में रुकावट पैदा कर सकता है। कुछ मामलों में यह पेट से आगे छोटी आंत तक भी पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति गंभीर हो सकती है और समय पर इलाज की आवश्यकता पड़ती है।
इसीलिए यदि किसी व्यक्ति में लगातार पेट दर्द, उल्टी, भूख कम लगना या बिना स्पष्ट कारण वजन कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें और साथ ही बाल खाने की आदत भी हो, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी देना बेहद जरूरी है।
सिर्फ सर्जरी नहीं, मानसिक स्वास्थ्य सहायता भी जरूरी
डॉक्टरों ने इस मामले से एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया है। ट्राइकोफेजिया को केवल शारीरिक समस्या मानकर उसका इलाज करना पर्याप्त नहीं हो सकता। यदि बाल निगलने की आदत के पीछे व्यवहार संबंधी या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा कोई कारण है और उस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो सर्जरी के बाद समस्या दोबारा हो सकती है।
इसलिए ऐसे मरीजों को जरूरत के अनुसार मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता भी दी जानी चाहिए। परिवार की भूमिका भी इसमें बेहद महत्वपूर्ण होती है। बच्चे या युवा को डांटने या शर्मिंदा करने के बजाय उसकी समस्या को समझना और विशेषज्ञ की मदद लेना ज्यादा प्रभावी तरीका हो सकता है।
‘सवा हाथ के बाल’ वाली कहावत से कहीं आगे की हकीकत
पेट में बालों का विशाल गुच्छा मिलने की यह घटना सुनने में भले ही किसी मुहावरे जैसी लगे, लेकिन इसके पीछे एक गंभीर मेडिकल समस्या छिपी थी। 20 साल की एक छात्रा के पेट से 1.2 किलोग्राम बालों का गुच्छा निकलना इस बात का उदाहरण है कि वर्षों तक नजरअंदाज की गई एक आदत शरीर के भीतर कितना बड़ा रूप ले सकती है।
इस मामले की सबसे बड़ी सीख यही है कि बाल खाना या निगलना सामान्य आदत नहीं है। अगर किसी बच्चे या युवा में ऐसी आदत लगातार दिखाई दे रही है तो समय रहते विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
दिल्ली के इस मामले में समय पर जांच और सर्जरी से छात्रा को राहत मिली और वह अपनी पढ़ाई पर वापस लौट सकी। लेकिन हर मामले में स्थिति इतनी आसानी से संभल जाए, यह जरूरी नहीं। इसलिए असामान्य आदतों को छिपाने या नजरअंदाज करने के बजाय शुरुआती स्तर पर ही मदद लेना बेहतर है।
एक छोटी-सी आदत जब सालों तक जारी रहती है, तो वह शरीर के अंदर ऐसी गांठ बना सकती है जिसका वजन एक किलो से भी ज्यादा हो सकता है—दिल्ली की इस घटना ने इसी खतरे को बेहद चौंकाने वाले तरीके से सामने ला दिया है।