PM मोदी को खून से खत… 68,500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का अनोखा प्रदर्शन​

PM मोदी को खून से खत… 68,500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का अनोखा प्रदर्शन​

लखनऊ के ईको गार्डन में पिछले 17 दिनों से शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी धरने पर बैठे हैं. मामला है 68,500 शिक्षक भर्ती में आरक्षण से जुड़ा विवाद. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने रक्तदान किया और उसी खून से प्रधानमंत्री के नाम पत्र लिखा. इन पत्रों में प्रधानमंत्री से पूरे मामले में हस्तक्षेप करने और न्याय दिलाने की मांग की गई है. अभ्यर्थियों ने प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गृह मंत्री अमित शाह के नाम भी पत्र भेजे हैं.

दरअसल, इनकी मांग है कि 68,500 शिक्षक भर्ती में आरक्षण से जुड़े मामले का समाधान किया जाए. अभ्यर्थियों का दावा है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से जो आदेश दिया गया है, उसका अनुपालन कराया जाए. इसी मांग को लेकर पिछले 17 दिनों से धरना चल रहा है. बारिश हो… गर्मी हो… या फिर लंबा इंतजार… अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा.

प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर अनोखा प्रदर्शन

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है. अभ्यर्थियों ने इस दिन को अपने आंदोलन से जोड़ने का फैसला किया. पहले प्रधानमंत्री को जन्मदिन की बधाई दी… फिर चिकित्सकीय टीम की मौजूदगी में रक्तदान किया, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. इसी रक्त से प्रधानमंत्री के नाम पत्र लिखा गया. अभ्यर्थियों का कहना है कि यह किसी को डराने या दबाव बनाने का तरीका नहीं, बल्कि अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने का प्रतीक है.

खून से लिखे खत में क्या मांग?

खून से लिखे गए इन पत्रों के जरिए अभ्यर्थियों ने प्रधानमंत्री से पूरे मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है. इनका कहना है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेश का अनुपालन कराया जाए. साथ ही ओबीसी और दिव्यांग अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने की मांग भी की गई है. अभ्यर्थियों ने सिर्फ प्रधानमंत्री के नाम पत्र नहीं लिखा. खून से लिखे गए पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथसाथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गृह मंत्री को भी भेजे गए हैं.

आखिर मामला इतना लंबा क्यों खिंचा?

यहां समझना जरूरी है कि 68,500 शिक्षक भर्ती का मामला नया नहीं है. इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर पहले भी चयन, आरक्षण और अभ्यर्थियों के अधिकारों से जुड़े विवाद सामने आते रहे हैं. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। अब मौजूदा आंदोलन में अभ्यर्थी राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेश को आधार बनाकर सरकार से उसके अनुपालन की मांग कर रहे हैं. यानी अभ्यर्थियों का तर्क सीधा है कि जब आयोग का आदेश है तो उसका पालन कराया जाए.

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