बरेली में दिखा स्पाइन सर्जरी का भविष्य! इलाज की दो नई तकनीकें लॉन्च, वायरलेस 4के सर्जिकल कैमरे से बढ़ीं उम्मीदें

बरेली में दिखा स्पाइन सर्जरी का भविष्य! इलाज की दो नई तकनीकें लॉन्च, वायरलेस 4के सर्जिकल कैमरे से बढ़ीं उम्मीदें
बरेली के स्वर्ण फार्म्स में आयोजित गाला डिनर के दौरान स्पाइन सर्जरी की नई तकनीक को लांच करते आरएमसीएच के वरिष्ठ स्पाइन सर्जन डॉ. वरुण अग्रवाल और अमेरिका के प्रसिद्ध स्पाइन सर्जन डॉ. हमीद अब्बासी आदि।

बरेली में दिखा स्पाइन सर्जरी का भविष्य! इलाज की दो नई तकनीकें लॉन्च, वायरलेस 4के सर्जिकल कैमरे से बढ़ीं उम्मीदें

 

अमृत विचार, बरेली। मेडिकल टेक्नोलॉजी की दुनिया में बड़े बदलाव अक्सर विदेशों से सामने आते हैं, लेकिन इस बार बरेली चर्चा में है। रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में आयोजित एडवांस्ड स्पाइन सर्जरी कोर्स के दौरान रीढ़ की हड्डी की सर्जरी से जुड़ी दो नई तकनीकों का अनावरण किया गया। इनमें से एक तकनीक को भारतीय बाजार में अपनी तरह के पहले वायरलेस 4के एंडोस्कोपिक सर्जिकल कैमरों में से एक माना जा रहा है।

आरएमसीएच में आयोजित एडवांस्ड स्पाइन सर्जरी कोर्स के पहले दिन स्वर्ण फार्म्स में हुए गाला डिनर में इन दोनों नई तकनीकों को विशेषज्ञों के सामने पेश किया गया। कार्यक्रम में मौजूद डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने इन नवाचारों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
इस अवसर पर बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. केशव अग्रवाल और वाइस चांसलर डॉ. लता अग्रवाल मौजूद रहीं। कार्यक्रम में 300 से अधिक डॉक्टर, इंटर्न, डेलिगेट, फैकल्टी सदस्य और पोस्ट ग्रेजुएट छात्र शामिल हुए।

बरेली के डॉ. वरुण और अमेरिका के डॉ. हमीद कर रहे कोर्स का संचालन

इस एडवांस्ड कोर्स का संचालन आरएमसीएच के वरिष्ठ स्पाइन सर्जन डॉ. वरुण अग्रवाल और अमेरिका के प्रसिद्ध स्पाइन सर्जन डॉ. हमीद अब्बासी कर रहे हैं। इस कोर्स का उद्देश्य देशविदेश के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर स्पाइन सर्जरी की आधुनिक तकनीकों और इलाज की नई विधियों को आगे बढ़ाना है।

जोश और उत्साह के माहौल में एडवांस्ड स्पाइन सर्जरी कोर्स के दौरान नई तकनीकों के अनावरण के साक्षी बने डॉक्टर और विशेषज्ञ।

 

सैक्रानोवा: एसआई जॉइंट फ्यूजन के लिए नया सिस्टम

कार्यक्रम में सबसे पहले सैक्रानोवा का अनावरण किया गया। यह सैक्रोइलिएक जॉइंट फ्यूजन के लिए तैयार किया गया इम्प्लांट और विशेष सर्जिकल उपकरणों का एक पूरा सिस्टम है। सैक्रानोवा सिस्टम को अमेरिका के सहयोग से विकसित किया गया है। इसके मूल आविष्कारक अमेरिका के प्रसिद्ध स्पाइन सर्जन डॉ. हमीद अब्बासी हैं। भारतीय टीम और मेडिकल डिवाइस निर्माता मेडार्ट के सहयोग से इस तकनीक को विकसित कर वास्तविक रूप दिया गया है। इसमें नया इम्प्लांट डिजाइनऔर फिक्सेशन मैकेनिज्म शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य सैक्रोइलिएक जॉइंट से जुड़ी समस्याओं के इलाज को और बेहतर बनाना है। इस परियोजना में डॉ. वरुण अग्रवाल, डॉ. हमीद अब्बासी, डॉ. अंकित मदारिया और मेडार्ट के दिलीप सुतारिया ने मिलकर काम किया।

 

भारत में अपने प्रोजेक्ट्स को आकार लेते देख गर्व हो रहा

कार्यक्रम में डॉ. हमीद अब्बासी ने भारतीय टीम और निर्माण सहयोगी मेडार्ट की सराहना की। उन्होंने कहा कि कई वर्षों की मेहनत, समर्पण और प्रतिबद्धता के बाद यह नवाचार संभव हो सका है। उन्होंने विशेष रूप से मेडार्ट के दिलीप सुतारिया और डॉ. अंकित मदारिया को बधाई दी। डॉ. अब्बासी ने कहा कि उन्हें यह देखकर गर्व हो रहा है कि उनके कुछ प्रोजेक्ट अब भारत में वास्तविक रूप ले रहे हैं।

डॉ. वरुण अग्रवाल ने विकसित किया वायरलेस एंडोस्कोपिक कैमरा

कार्यक्रम में शाम का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण अनावरण मिव्यू का रहा। यह मिवेसिव का वायरलेस एंडोस्कोपिक कैमरा है, जिसे डॉ. वरुण अग्रवाल ने विकसित किया है। इसे भारतीय बाजार में पेश किए गए अपनी तरह के पहले वायरलेस 4के एंडोस्कोपिक सर्जिकल कैमरों में से एक माना जा रहा है। मिव्यू में 4के एचडी पिक्चर क्वालिटी, लगातार चार घंटे तक चलने वाली बैटरी और पूरी तरह वायरलेस तकनीक उपलब्ध है। इससे ऑपरेशन थिएटर में सर्जनों को बिना तारों की परेशानी के काम करने की अधिक स्वतंत्रता मिलती है और तस्वीर की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करना पड़ता। मिव्यू में मल्टीपल स्क्रीन स्ट्रीमिंग की सुविधा भी है। यह वजन में हल्का है और इसमें इनबिल्ट इंटेलिजेंस तकनीक भी मौजूद है।

दस साल की मेहनत का नतीजा

आरएमसीएच के वरिष्ठ स्पाइन सर्जन डॉ. वरुण अग्रवाल ने कहा कि पिछले करीब एक दशक से उनका प्रयास तकनीकी नवाचार के जरिए मरीजों और डॉक्टरों के अनुभव को बेहतर बनाने का रहा है। उन्होंने बताया कि मिव्यू उनका एकमात्र प्रोडक्ट नहीं है। उनके कई अन्य मेडिकल डिवाइस भी विकास के अलगअलग चरणों में हैं और कई नए उत्पादों के पेटेंट अभी लंबित हैं। गाला डिनर में मौजूद डॉक्टरों, विशेषज्ञों और प्रतिभागियों ने दोनों नई तकनीकों का जोरदार स्वागत किया। इन तकनीकों को मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि स्पाइन सर्जरी के क्षेत्र में भारत में तैयार हो रहे मेडिकल डिवाइस इनोवेशन को बढ़ावा मिल रहा है। यदि ये तकनीकें बड़े स्तर पर सफल होती हैं तो बरेली में शुरू हुई यह पहल सिर्फ दो नए उत्पादों के लॉन्च तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भारत को स्पाइन सर्जरी की आधुनिक तकनीकों और मेडिकल डिवाइस निर्माण के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में मदद कर सकती है।

इलाज के लिए दूर जाने की मजबूरी कम होगी

बरेली में स्पाइन सर्जरी की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख कम करना पड़ेगा। रीढ़ से जुड़ी गंभीर बीमारियों में विशेषज्ञ डॉक्टर और बेहतर तकनीक नजदीक उपलब्ध होने से मरीजों को समय पर इलाज मिलने की संभावना बढ़ेगी। इससे इलाज में होने वाली देरी कम हो सकती है। दूसरे शहरों में इलाज कराने के दौरान सफर, रहने और बारबार अस्पताल आनेजाने में होने वाले अतिरिक्त खर्च से मरीजों और उनके परिवारों को राहत मिल सकती है।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *