Darbhanga News: बिहार के दरभंगा जिले का एक गांव इन दिनों खौफ के साए में जी रहा है. महिलाएं और लड़कियां रात होते ही सहम जा रही हैं. वजह है एक ऐसा रहस्यमयी अपराध, जिसने पूरे गांव को दहला दिया है. बहादुरपुर थाना क्षेत्र के डरहार गांव में महज आठ दिनों के भीतर दो डकैतियों के दौरान महिलाओं और एक नाबालिग बच्ची के बाल काटे जाने की घटनाओं ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर यह कोई साधारण लुटेरा गिरोह है या फिर किसी विकृत मानसिकता वाले ‘साइको अपराधियों’ का गैंग?

गांव की महिलाएं अब अकेले घर में रहने से डर रही हैं. बच्चियों को लेकर परिवारों की चिंता बढ़ गई है. लोगों के बीच चर्चा है कि आखिर लूटपाट के बाद महिलाओं और बच्चियों के बाल काटने की क्या जरूरत थी? क्या यह सिर्फ दहशत फैलाने का तरीका है या इसके पीछे कोई और खौफनाक मंशा छिपी है?
पहली वारदात बहू को बेहोश किया, बाल काटे और लूट लिए लाखों के जेवर
यह सिलसिला करीब आठ दिन पहले शुरू हुआ था. डरहार गांव स्थित होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. पवन मिश्रा के घर में गुरुवार शाम पांच बदमाश छत के रास्ते घुस आए. उस समय घर में उनकी छोटी बहू करिश्मा देवी और डेढ़ साल की मासूम बच्ची मौजूद थी.
अपराधियों ने करिश्मा देवी के साथ मारपीट की, उसके हाथपैर बांध दिए और फिर उसके बाल काट दिए. परिजनों का आरोप है कि बदमाशों ने महिला की पीठ में नशीला इंजेक्शन लगाया, जिससे वह बेहोश हो गई. इसके बाद घर में टीवी की आवाज तेज कर दी गई, ताकि किसी को चीखपुकार सुनाई न दे.
करीब 20 मिनट तक बदमाश घर में उत्पात मचाते रहे और दो अलमारियों से करीब पांच लाख रुपए के जेवरात व 35 हजार रुपए नकद लूटकर फरार हो गए. जब परिजन घर पहुंचे तो महिला बेहोश पड़ी मिली. उसे इलाज के लिए डीएमसीएच में भर्ती कराया गया.
दूसरी वारदात नाबालिग बच्ची के बाल काटकर भागे बदमाश
पहली घटना का खुलासा भी नहीं हुआ था कि उसी गांव में दूसरी वारदात हो गई. इस बार निशाने पर शिक्षक दंपति सुमन कुमार चौधरी का घर था. बदमाशों ने घर में घुसकर लूटपाट की और जातेजाते घर में सो रही एक नाबालिग बच्ची के चाकू से बाल काट दिए. इस घटना के बाद पूरे गांव में दहशत फैल गई. लोगों को सबसे ज्यादा डर इस बात का सता रहा है कि आखिर अपराधी महिलाओं और बच्चियों के बाल ही क्यों काट रहे हैं?
साधारण डकैत या ‘साइको गैंग’?
पुलिस ने अभी तक किसी भी एंगल की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन लगातार दो घटनाओं में एक जैसा पैटर्न सामने आने से कई सवाल खड़े हो गए हैं. आमतौर पर डकैतों का मकसद पैसा, जेवर या कीमती सामान लूटना होता है, लेकिन यहां अपराधियों ने लूटपाट के साथ महिलाओं और बच्चियों के बाल काटे. अपराध विज्ञान के जानकारों के अनुसार, ऐसी हरकत कई बार पीड़ितों के मन में गहरा मानसिक डर बैठाने, आतंक फैलाने या विकृत मानसिकता का संकेत हो सकती है. हालांकि जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी.
महिलाओं में बढ़ा डर, गांव में रात का सन्नाटा
दोनों घटनाओं के बाद डरहार गांव की महिलाएं और लड़कियां बेहद डरी हुई हैं. कई परिवारों ने रात में पहरा देना शुरू कर दिया है. गांव में अजीब सा सन्नाटा पसरा हुआ है. लोग देर रात घरों से निकलने से बच रहे हैं. वही ग्रामीणों का कहना है कि जिले में पहले कभी ऐसी घटना नहीं हुई, जहां डकैती के दौरान महिलाओं के बाल काटे गए हों. यही वजह है कि लोग इस गिरोह को लेकर तरहतरह की आशंकाएं जता रहे हैं.
जांच में जुटी पुलिस, अब भी रहस्य बरकरार
घटना की सूचना मिलने के बाद बहादुरपुर थाना पुलिस, एफएसएल और टेक्निकल सेल की टीम मौके पर पहुंची. घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए हैं. दोनों मामलों के बीच संबंधों की जांच की जा रही है. पुलिस को शक है कि दोनों वारदातों के पीछे एक ही गिरोह हो सकता है.
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि लाखों की लूट करने वाले अपराधियों को महिलाओं और बच्चियों के बाल काटने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या यह दहशत फैलाने की साजिश है, किसी अंधविश्वास से जुड़ा मामला है या फिर किसी विकृत मानसिकता वाले अपराधी का खेल? जब तक पुलिस इस रहस्य से पर्दा नहीं उठाती, तब तक डरहार गांव में खौफ का साया बना रहेगा और महिलाओं के मन में यह डर भी कि कहीं अगला निशाना उनका घर तो नहीं.