Digital Currency: फीस की टेंशन छोड़िए, आ रहा UPI का ‘बाप’, क्या है डिजिटल रुपया, कैसे होगा बिना बैंक-नेट के पैसों का लेन-देन?

Digital Currency: फीस की टेंशन छोड़िए, आ रहा UPI का ‘बाप’, क्या है डिजिटल रुपया, कैसे होगा बिना बैंक-नेट के पैसों का लेन-देन?
Digital Currency: फीस की टेंशन छोड़िए, आ रहा UPI का ‘बाप’, क्या है डिजिटल रुपया, कैसे होगा बिना बैंक-नेट के पैसों का लेन-देन?

सौ बात की एक बात ये कि UPI क्या चीज़ है…UPI का बाप आने वाला है. UPI के चार्ज की ख़बर के बीच लोग उस क्रांति को तो भूल ही गए हैं, जिसकी तैयारी कई साल से चल रही है देश में. जी, क्रांति ही होने वाली है. ऐसी क्रांति कि ये सब जो बवाल मचा हुआ है ये सारा ख़त्म हो सकता है. उस क्रांति का नाम है डिजिटल रुपया. UPI पेमेंट पर चार्ज लगाने को लेकर जो इतना बवाल मचा हुआ है, वो सारा बेमाने हो सकता है अगर डिजिटल रुपया चालू हो जाए. जी, डिडिटल रुपया. आपको अगर याद हो तो 2022 के बजट भाषण में वित्त मंत्री ने बताया था कि भारत डिजिटल रुपया बनाने जा रहा है. मतलब 4.5 साल तो हो चुके हैं, अगले बजट तक 5 साल हो जाएंगे. और इस पर काम चल रहा है. पायलट प्रॉजेकट तो चल रहा है, उम्मीद यही है कि जल्द ही पूरी तरह से चालू हो जाएगा. लेकिन ये डिजिटल रुपया आख़िर है क्या चीज़ जिसपर ये 4-5 साल से काम चल रहा है. इसका फ़ायदा क्या होगा? डिजिटल रुपया मतलब क्या? कि डिजिटल तरीक़े से पेमेंट कर सकेंगे? एक फ़ोन से दूसरे फ़ोन पर? तो वो तो अब भी हो रहा है ना UPI से? तो UPI ही तो हुआ ना? नहीं, डिजिटल रुपया और UPI में फ़र्क समझने की ज़रूरत है. तो क्या वैसे होगा जैसे इंटरनेट बैंकिंग?

क्या है डिजिटल रुपया का कॉन्सेप्ट
नहीं, डिजिटल रुपये की पेमेंट का मतलब इंटरनेट बैंकिंग नहीं है. क्योंकि डिजिटल रुपया देने के लिए ना तो इंटरनेट चाहिए होगा और ना ही बैंक. जी, यही समझने की ज़रूरत है. कि बैंक की भी ज़रूरत नहीं होगी. और इंटरनेट की भी ज़रूरत नहीं होगी. अब आप बोलोगे कि अगर किसी दुकानदार को समझो पैसे देने हैं तो अगर डिजिटल तरीक़े से देने हैं तो इंटरनेट क्यों नहीं चाहिए होगा? उसके अकाउंट में पैसे जाएंगे कैसे? तो वो इसलिए क्योंकि पैसे उसके अकाउंट में जाएंगे ही नहीं. तो फिर कहां जाएंगे? वो जाएंगे उसके फ़ोन में या यूं समझ लीजिए कि उसकी डिजिटल जेब में. पूरी दुनिया ही बदल जाएगी लेन-देन की. यू समझ लीजिए ये ऐसी क्रांति होने वाली है. तभी तो इतने साल से काम चल रहा है और पायलट प्रॉजेक्ट में टेस्टिंग चल रही है. तो इसको समझना ज़रूरी है.

UPI के बवाल की ख़बर तो आप जानते ही हैं. UPI पेमेंट पर जो चार्ज लगाने की बात है उसके पीछे का तर्क ये दिया जा रहा है कि जब आप UPI से पेमेंट करते हो तो हर पड़ाव पर ख़र्च आता है. क्योंकि UPI पेमेंट में कई कंप्यूटर एक दूसरे से बात करते हैं. आप अपने ऐप को संदेश भेजते हो कि पेमेंट करनी है, वहां से संदेश जाता है NPCI को, यानी पेमेंट कॉर्पोरेशन को, वहां से जाता है आपके बैंक को, बैंक आपका खाता चेक करता है, उससे पैसे निकालता है, और फिर संदेश जाता है NPCI को कि पैसे निकाल लिये हैं, फिर NPCI उसके बैंक को संदेश भेजता है जिसको आपने पैसा देना है, फिर वो बैंक उसका खाता ढूंढता है और उसके खाते में पैसे जोड़ देता है औऱ संदेश वापस भेजता है NPCI को, फिर आपको संदेश आता है कि पेमेंट हो गई और सामने वाले को भी संदेश जाता है कि पेमेंट हो गई.

कैसे यूपीआई का बाप है डिजिटल रुपया
ये दिन भर चलता रहता है और फिर सारे बैंकों का बही-खाता सेटल होता है कि किस बैंक को किस बैंक से कितना लेना है और किस बैंक को किसको कितना देना है. मतलब बहुत सारे संदेश एक कंप्यूटरों के बीच आते-जाते हैं तब जा कर पेमेंट होती है. लेकिन बिजली के तेज़ी से हो जाता है सेकेंडों में तो आपको लगता है कि यूं पैसे निकाले और यू चले गए सामने वाले के पास. लेकिन प्रकिया बहुत लंबी है. और इसमें पांच पार्टियां शामिल हैं. पैसे देने वाला, पैसे लेने वाला, पैसे देने वाले का बैंक, पैसे लेने वाले का बैंक, और पांचवा NPCI, पेमेंट्स कॉर्पोरेशन, जो सारे संदेश इधर से उधर और उधर से इधर करता रहता है. लेकिन सोचो अगर आपसे पैसे सीधा दुकानदार के पास चलसे जाएं, बीच में बैंक का चक्कर ही ना हो तो? तो आप कहोगे वो तो कैश में होता है. नोट आप अपनी जेब से निकालते हो, और दुकानदार अपने गल्ले में रख लेता है. जी, वही कैश अगर डिजिटल हो जाए तो?

कैश का नया अवतार यानी डिजिटल रुपया
मतलब आपके फ़ोन से निकले और उसके फ़ोन में चले जाए तो? जैसे डिजिटल जेब हो गई एक तरह से. बस काग़ज़ के नोट ना हों, डिजिटल नोट हों. चाहे फ़ोन पर हों या किसी कंप्यूटर पर हों. एक डिजिटल जेब हो जैसे फ़ोन में. उसमें नोट पड़ें हों. वो नोट होंगे डिजिटल नोट. काग़ज़ के नहीं होंगे. लेकिन होंगे बिलकुल काग़ज़ वाले नोट जैसे. हर नोट का अलग नंबर होगा जैसा काग़ज़ के नोट का होता है. वो बन रहा है. डिजिटल रुपया. मतलब बन चुका है, टेस्टिंग चल रही है पायलट प्रॉजेक्ट में. सीधा रिज़र्व बैंक का नोट होगा जैसा काग़ज़ का होता है. और आप अपने फ़ोन में डाल लोगे उसको. 500 के, 200 के, 100 के, 50 के, 20 के, 10 के, 2 के, 1 रुपये के. और वैसे तो रिज़र्व बैंक चाहे तो जितने के भी बना ले. पूरी सुरक्षा गैरंटी के साथ होंगे ये नोट और सबका अलग नंबर होगा. और वो सीधा आप अपने फ़ोन से दुकानदार के फ़ोन में डाल सकेंगे. जैसे कैश देते हैं. बैंक बीच में आएगा ही नहीं. इंटरनेट ना भी हो तब भी कोई बात नहीं. ब्लूटूथ से चला जाएगा एक फ़ोन से दूसरे फ़ोन में. या NFC से चला जाएगा.

न इंटरनेट चाहिए और न बैंक… सीधे डिजिटल जेब में जाएंगे
NFC मतलब ‘नीयर फ़ील्ड कम्युनिकेशन’, मतलब दोनों फ़ोन को एक दूसरे के पास ले आओ तो एक फ़ोन से दूसरे फ़ोन मे जा सकेगा पैसा जैसे ही आप बटन दबाओगे. जैसे आईफ़ोन में एयरड्रॉप होता है, या जैसे ब्लूटूथ से विडियो या फ़ोटो नहीं ट्रांस्फ़र करते आप? वैसे ही नोट ट्रांस्फ़र हो जाएंगे. किसी को 252 रुपये देने हैं तो दो 100 के, एक 50 का, और एक 2 रुपये का नोट आपके फ़ोन से निकल कर उसके फ़ोन में चला जाएगा. इंटरनेट भी नहीं चाहिए इसके लिए तो. उसके बैंक खाते में नहीं जाएगा. उसकी डिजिटल जेब में चला जाएगा. इसमें कोई चार्ज का चक्कर ही नहीं. क्योंकि इसमें तो बैंक का ख़र्चा ही नहीं हो रहा. कोई पेमेंट कॉर्पोरेशन ही नहीं आएगा बीच में. ये तो कैश है. जैसे काग़ज़ के नोट वैसे ये डिजिटल रुपया. मतलब ये समझ लो कि UPI ऐसे है जैसे चेक पेमेंट, और डिजिटल रुपया ऐसे होगा जैसे कैश पेमेंट. चेक पेमेंट में क्या होता है?

डिजिटल रुपए का लेन-देन कैसे होगा?
आप चेकबुक निकालते हो, चेक पर नाम लिखते हो, पैसे लिखते हो, साइन करते हो. वही तो है UPI, आप UPI आईडी लिखते हो या QR स्कैन करते हो, राशि लिखते हो और PIN डालते हो. यानी चेक साइन करने जैसा ही हुआ. फिर सामने वाला चेक लेकर अपने बैंक में डालता है, उसका बैंक चेक को आपके बैंक में भेजता है, आपका बैंक आपके साइन चेक करता है और देखता है कि आपके खाते में उतने पैसे हैं भी या नहीं. सेम चीज़ UPI में चेक होती है. तो जैसे चेक पेमेंट में आपके खाते से पैसा कट जाता है और सामने वाले के खाते में पैसा जुड़ जाता है, वैसे ही UPI में होता है. और अब ये कहा जा रहा है कि इस सब को करने में ख़र्चा आता है तो उसका चार्ज लगेगा ताकि ये सब सिस्टम सुचारू रूप से चलता रहे. लेकिन डिजिटल रुपया आ जाएगा तो इस पूरे चक्कर की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी. कैश में ही काम हो सकेगा. अब आप कहोगे लेकिन डिजिटल जेब में रुपये डालेंगे कैसे? तो वैसे ही डालेंगे जैसे कैश डालते हैं. उसके लिए आप बैंक जाते हो या ATM से निकालते हो, तो इसमें अपने बैंक खाते से निकालकर डाल लोगे वॉलेट में या डिजिटल जेब में. आपके वॉलेट में जब पैसा आ जाएगा तो फिर आप चाहे जहां ख़र्च करो. ख़त्म हो जाए तो चाहे किसी से ले लो जैसे नकद लेते हैं, या फिर बैंक से निकाल लो.

किन-किन देशों के पास डिजिटल नोट
बैंक से निकाल लो मतलब बैंक से डिजिटल ट्रांस्फ़र करवा लो. बैंक जा कर करवा लोगे तो वो भी कर सकते हो, नहीं तो इंटरनेट बैंकिग से डाल लो अपनी डिजिटल जेब में. इंटरनेट बैंकिंग से डालोगे तो उसके लिए तो इंटरनेट चाहिए होगा. लेकिन बाक़ी लेन-देने तो बिना इंटरनेट भी हो सकेगा जैसे कैश का होता है. और ये भी नहीं कि फ़ोन में पैसा पड़ा है तो फ़ोन चोरी हो गया तो पैसा भी गया. वो तो PIN वगैरह, फ़िंगर आईडी. फ़ेस आईडी वो सब तो होगा ही. बिना PIN के कोई आपका पैसा थोड़े ही ले जाएगा. हां लेकिन वो पैसा आपके बैंक अकाउंट में नहीं रखा होगा. वो तो कैश होगा जो डिजिटल तरीक़े से आपके पास पड़ा होगा. ये बहुत ही कमाल की क्रांति होने वाली है. सारी दुनिया इस तरह के डिजिटल नोट बनाने में लगी हुई है. अभी सिर्फ़ तीन देशों ने इसको स्टार्ट किया है. नाइजीरिया, बहामास और जमैका. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इन तीनों की अर्थव्यव्स्था में उतना लेन-देन नहीं होता जितना भारत जैसे देशों में होता है. लेकिन बाक़ी किसी बड़े देश ने इसको अभी शुरू नहीं किया है.

चीन और भारत में होड़
चीन भी बना रहा है, अभी पूरी तरह से नहीं बना पाया है. भारत ने डिजिटल रुपया बना लिया है, लेकिन अब भी टेस्टिंग चल रही है. क्योंकि भारत बहुत-सी चीज़ें ट्राय कर रहा है इससे हो जाएं. क्योंकि काग़ज़ वाले कैश में भी नोटों में नंबर होते हैं, लेकिन बैंक से आप निकाल लो उसके बाद कौन सा नोट किसको दिया, फिर उसने किसको दिया, फिर वहां से कहां गया ये सब तो पता नहीं चल पाता. लेकिन डिजिटल नोट का तो पता चल जाएगा. क्योंकि उस नंबर को नोट जिस-जिस फ़ोन से होता हुआ जाएगा वो सब रिकॉर्ड में आ सकता है. यानी पैसे के मूवमेंट की पूरी चेन पकड़ी जा सकती है. जो कैश में ब्लैक मनी वाला, काले धन वाला काम होता है वो तो इसमें हो ही नहीं सकेगा. लेकिन इसमें कितने की लिमिट लगानी होगी, ताकि पैसा सुरक्षित भी रहे और काम भी आसानी से हो सके. बहुत तरह के सवाल हैं जिनको अभी जांचा जा रहा है.

यूपीआई विवाद बहुत छोटी बात कैसे होगी
एक बहुत ही बड़ी चीज़ जो इससे की जा सकती है वो ये कि जो ये सरकार सीधा बैंक खाते में सब्सिडी देती है वो वाला काम डिजिटल रुपयों में किया जा सकता है. जैसे समझ लो खाद की सब्सिडी देनी है. समझ लो दो हज़ार रुपये देने हैं. आपने दो हज़ार रुपये किसान के बैंक खाते में डाल दिये कि उसकी खाद ले लेना. अब वो चाहे उस 2 हज़ार का कुछ भी करे, खाद ने या ना ले उसके खाते में तो पैसे चले गए. खाद की ही बात नहीं, कोई भी सब्सिडी मान लीजिये. लेकिन अगर बैंक खाते में ना डालकर, सीधा कैश दे दिया गया उसके फ़ोन पर, डिजिटल रुपया दे दिया गया, तो डिजिटल रुपये में तो ये भी सुविधा हो सकती है कि उसमें ऐसा कोड डाल सकती है सरकार कि वो वाला डिजिटल रुपया किसी और दुकान पर चलेगा ही नहीं. वो सिर्फ़ उसी दुकान पर चलेगा जिसकी सब्सिडी होगी. यानी जिस काम के लिए पैसा भेजोगे उसी काम में इस्तमाल हो सकता है. बहुत ही कमाल की संभावनाएं हैं डिजिटल रुपये में. ये जब आएगा तो पूरी दुनिया ही बदल जाएगी ये समझ लो. क्रांति हो जाएगी. और ये UPI के चार्ज का विवाद तो बहुत ही छोटी सी बात हो जाएगी. दुकानों पर लिखा रहता है ना आज नकद कल उधार. वो लिखने लगेंगे आज डिजिटल रुपया, क्योंकि आने वाले टाइममें हो सकता है कैश का मतलब ही डिजिटल रुपया हो जाएगा. सौ बात की एक बात.

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