50 पार महिलाओं में बढ़ सकती कमजोरी और दिमागी तनाव, न्यूट्रिशनिस्ट से जानिए 5 जरूरी सप्लीमेंट्स जो कर सकते हैं आपकी मदद

50 पार महिलाओं में बढ़ सकती कमजोरी और दिमागी तनाव, न्यूट्रिशनिस्ट से जानिए 5 जरूरी सप्लीमेंट्स जो कर सकते हैं आपकी मदद
50 पार महिलाओं में बढ़ सकती कमजोरी और दिमागी तनाव, न्यूट्रिशनिस्ट से जानिए 5 जरूरी सप्लीमेंट्स जो कर सकते हैं आपकी मदद

50 की उम्र पार करते ही महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में गिरावट आने लगती है, जिसके चलते लगातार कमजोरी, जोड़ों में दर्द, चिड़चिड़ापन और मानसिक थकान (Brain Fog) जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं। कई बार संतुलित आहार के बावजूद शरीर में कुछ आवश्यक पोषक तत्वों की कमी बनी रहती है। न्यूट्रिशनिस्ट्स के अनुसार, सही मार्गदर्शन में लिए गए सप्लीमेंट्स इन कमियों को पूरा कर सेहत में सुधार ला सकते हैं।

पब्लिक हेल्थ न्यूट्रिशन एक्सपर्ट जैस्मिन जैफ़राली महिलाओं के लिए कुछ जरूरी सप्लीमेंट लेने की सिफारिश करती हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक खास सप्लीमेंट में  मैग्नीशियम एक ऐसा सप्लीमेंट है जो शरीर में 300 से अधिक रासायनिक प्रक्रियाओं में शामिल है। ये ब्लड शुगर कंट्रोल करने से लेकर तनाव कम करने तक में अहम भूमिका निभाता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि 50 के पार महिलाओं के लिए कौन-कौन से सप्लीमेंट का सेवन असरदार साबित होता है। Also Readक्या केला खाने से होती है कब्ज की समस्या या मिलता है छुटकारा? जानिए डायटीशियन की राय

मैग्नीशियम सप्लीमेंट है महिलाओं के लिए बेस्ट

एक्सपर्ट जैस्मिन जैफ़राली के अनुसार 50 की उम्र के बाद महिलाओं के लिए मैग्नीशियम एक महत्वपूर्ण मिनरल हो सकता है। यह शरीर में 300 से अधिक एंजाइमेटिक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है और मांसपेशियों, तंत्रिका तंत्र, ऊर्जा उत्पादन तथा ब्लड शुगर रेगुलेशन जैसे कई जरूरी कामों में शामिल रहता है। इस उम्र में तनाव, बेचैनी, नींद की कमी और मानसिक थकान जैसी समस्याएं परेशान कर सकती हैं ऐसे में मैग्नीशियम का सेवन असरदार साबित होता है। बॉडी में मैग्नीशियम की जरूरत पूरी करने के लिए आप डाइट में नट्स, सीड्स, साबुत अनाज, फलियां और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें। अगर बॉडी को पर्याप्त मैग्नीशियम नहीं मिल रहा या बॉडी में मैग्नीशियम की कमी है, तो सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लें। Also Readबार-बार पेशाब आना केवल UTI नहीं, हो सकते हैं ब्लैडर में सूजन के संकेत; यूकोलॉजिस्ट से जानिए क्या है Cystitis? कारण, लक्षण और बचाव

विटामिन डी करता है महिलाओं की मदद

विटामिन डी का सेवन हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत करने में असरदार साबित होता है। 50 की उम्र के बाद महिलाओं को हड्डियों की सेहत पर विशेष ध्यान देना चाहिए है। मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन का स्तर कम होने से बोन डेंसिटी घटने और हड्डियों के कमजोर होने का जोखिम बढ़ सकता है। विटामिन D शरीर में कैल्शियम के अवशोषण और हड्डियों की हेल्थ में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी होने पर मांसपेशियों में कमजोरी हो सकती है। विटामिन D कुछ खाद्य पदार्थों से मिलता है, लेकिन कई लोगों के लिए केवल डाइट से पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी हासिल करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में जरूरत के अनुसार डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लिया जा सकता है। पर्याप्त विटामिन D मांसपेशियों और इम्यून सिस्टम के सामान्य कामकाज के लिए भी जरूरी है।

दिमागी सेहत के लिए B-कॉम्प्लेक्स है जरूरी

रजिस्टर्ड डायटीशियन न्यूट्रिशनिस्ट (RDN) और सर्टिफाइड LEAP थेरेपिस्ट बेस बर्गर के अनुसार, 50 की उम्र के बाद महिलाओं के लिए B-कॉम्प्लेक्स विटामिन बहुत जरूरी हो सकता हैं। ये ऊर्जा उत्पादन, मेटाबॉलिज्म और ब्रेन फंक्शन में अहम भूमिका निभाता हैं। उम्र बढ़ने के साथ खासकर विटामिन B12 और फोलेट के अवशोषण में कमी आ सकती है, जिससे थकान, कमजोरी, मूड में बदलाव और ब्रेन फॉग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, सप्लीमेंट की जरूरत हर महिला में अलग होती है, इसलिए इन्हें डॉक्टर या डायटीशियन की सलाह से ही लेना बेहतर है।

निकोटिनामाइड राइबोसाइड भी है जरूरी

एमएस, आरडीएन, एलडीएन, सीएलईसी, सीपीटी लॉरेन मनाकर के अनुसार निकोटिनामाइड राइबोसाइड विटामिन B3 का एक रूप है, जो शरीर में NAD+ के स्तर को बढ़ाने में मदद कर सकता है। NAD+ कोशिकाओं में ऊर्जा उत्पादन और कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के लिए जरूरी होता है और इसकी मात्रा उम्र के साथ कम हो सकती है। निकोटिनामाइड राइबोसाइड सप्लीमेंट से NAD+ स्तर बढ़ाने पर सेलुलर एनर्जी और हेल्दी एजिंग को सपोर्ट मिलती है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर में NAD+ का स्तर कम हो सकता है, इसलिए NR को NAD+ बढ़ाने वाले सप्लीमेंट के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, इसे एंटी-एजिंग या उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने वाला साबित करने के लिए अभी पर्याप्त रिसर्च मौजूद नहीं है।

क्रिएटिन,मांसपेशियों और ब्रेन हेल्थ को करता है सपोर्ट

क्रिएटिन को अक्सर एथलीट्स और जिम जाने वालों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन 50 की उम्र के बाद महिलाओं में भी यह मांसपेशियों की ताकत और शारीरिक क्षमता को सपोर्ट कर सकता है। उम्र बढ़ने के साथ मसल मास और ताकत में धीरे-धीरे कमी आ सकती है। एक्सरसाइज के साथ क्रिएटिन लेने से मांसपेशियों की ताकत, प्रदर्शन और रिकवरी में मदद मिल सकती है। कुछ रिसर्च में इसके कॉग्निटिव फंक्शन और मूड पर होने वाले फायदे भी सामने आए हैं। सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर या डायटीशियन की सलाह लेना बेहतर है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। सप्लीमेंट हर व्यक्ति के लिए जरूरी या उपयुक्त नहीं होता। इसकी मात्रा और सेवन की अवधि व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और शारीरिक गतिविधि के अनुसार अलग हो सकती है। किसी भी सप्लीमेंट को शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य डायटीशियन की सलाह लें।

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