इंग्लिश नहीं आती, हिंदी में रटते थे स्क्रिप्ट… लखनऊ के 7वीं फेल ठगों ने अमेरिकियों से की अरबों की ठगी, हुए अरेस्ट

इंग्लिश नहीं आती, हिंदी में रटते थे स्क्रिप्ट… लखनऊ के 7वीं फेल ठगों ने अमेरिकियों से की अरबों की ठगी, हुए अरेस्ट

Lucknow News: उत्तर प्रदेश पुलिस की क्राइम ब्रांच और साइबर सेल ने राजधानी लखनऊ में एक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी रैकेट का भंडाफोड़ किया है. गोमतीनगर विस्तार में शहीद पथ के पास स्थित ‘ओमेक्स आर2’ रेजिडेंशियल अपार्टमेंट के एक फ्लैट में यह फर्जी कॉल सेंटर बेहद शातिर तरीके से संचालित किया जा रहा था. यहां से अमेरिकी नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट और विभिन्न साइबर अपराधों का डर दिखाकर करोड़ोंअरबों रुपए की जबरन वसूली की जा रही थी. पुलिस ने मौके पर छापेमारी कर गिरोह के मास्टरमाइंड समेत सात शातिर जालसाजों को दबोच लिया है.

इंग्लिश नहीं आती, हिंदी में रटते थे स्क्रिप्ट… लखनऊ के 7वीं फेल ठगों ने अमेरिकियों से की अरबों की ठगी, हुए अरेस्ट

इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह के काम करने का तरीका और आरोपियों की शैक्षणिक योग्यता बेहद चौंकाने वाली है. पुलिस की गिरफ्त में आए इस गैंग के सदस्य महज सातवीं से दसवीं कक्षा तक पढ़ेलिखे हैं. अंग्रेजी न आने के बावजूद विदेशी नागरिकों को ठगने के लिए इन्होंने एक अनोखा रास्ता निकाला था. इन कम पढ़ेलिखे कर्मचारियों को बाकायदा अंग्रेजी संवाद हिंदी स्क्रिप्ट में लिखकर दिए जाते थे, जिसे वे दिनरात रटते थे ताकि अमेरिकी नागरिकों से बातचीत के दौरान वे पकड़े न जाएं. यह कॉल सेंटर पूरी तरह से अमेरिकी समयानुसार एक्टिव होता था.

अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी के अधिकारी बनकर करते थे ‘डिजिटल अरेस्ट’

डीसीपी अपराध अनिल कुमार यादव के मुताबिक, यह गिरोह अमेरिकी नागरिकों को जाल में फंसाने के लिए बेहद संगठित तरीका अपनाता था. गिरोह सबसे पहले अमेरिका में बैठे अपने इनपुट एजेंट्स की मदद से वहां के नागरिकों के मोबाइल नंबर और ईमेल जैसी गोपनीय जानकारियां हासिल करता था. इसके बाद पीड़ितों को कंप्यूटर सिस्टम में खतरनाक वायरस आने, सिस्टम हैक होने या फिर उनकी अमेरिकी नागरिकता रद्द करने से जुड़े फर्जी ईमेल और पॉपअप मैसेज भेजे जाते थे.

जब डरे हुए विदेशी नागरिक दिए गए नंबरों पर संपर्क करते थे, तो कॉल सेंटर के आरोपी खुद को अमेरिकी फेडरल या सुरक्षा एजेंसियों के बड़े अधिकारी बताकर डराते थे. मामले को रफादफा करने के नाम पर वे पीड़ितों से ऑनलाइन गिफ्ट कार्ड, क्रिप्टोकरेंसी और हवाला नेटवर्क के जरिए मोटी रकम ऐंठ लेते थे.

लैपटॉप खंगालने पर सामने आया 2 अरब से ज्यादा का आंकड़ा

तड़के हुई इस संयुक्त छापेमारी में पुलिस के हाथ कई अहम डिजिटल दस्तावेज लगे हैं. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। जांच में यह बात सामने आई है कि यह गिरोह रोजाना करीब 10 से 12 अमेरिकी नागरिकों को अपनी ठगी का शिकार बनाता था. पुलिस ने जब मौके से बरामद मुख्य लैपटॉप की फॉरेंसिक जांच की, तो पता चला कि हाल ही में इन्होंने एक अमेरिकी नागरिक से अकेले 70,000 डॉलर ऐंठे थे. शुरुआती इनपुट्स के अनुसार, पिछले छह महीनों में यह गिरोह दो अरब से अधिक रुपये की अवैध ट्रांजैक्शंस और ठगी को अंजाम दे चुका है.

मास्टरमाइंड का अमेरिका और गुजरात कनेक्शन, फर्जी पते पर लिया था फ्लैट

इस रैकेट के तार देश के अन्य राज्यों के साथसाथ सीधे अमेरिका से जुड़े हुए हैं. पुलिस गिरफ्त में आया मुख्य आरोपी पुनीत कुमार वर्मा गुजरात के अहमदाबाद का रहने वाला है. जांच में पता चला है कि उसका सगा बड़ा भाई यशचंद्र प्रकाश वर्मा अहमदाबाद में बैठकर इस पूरे नेटवर्क की कमान संभाल रहा था, जिसने अमेरिका में भी अपने कई सीक्रेट एजेंट तैयार कर रखे थे. पुनीत ने लखनऊ के पॉश ओमेक्स अपार्टमेंट में फ्लैट किराए पर लेने के लिए पूरी तरह से फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था. रेंट एग्रीमेंट और पुलिस वेरिफिकेशन फॉर्म में दर्ज किए गए पते पूरी तरह से जाली पाए गए हैं, जिसकी पुलिस अलग से जांच कर रही है.

गुजरात और पश्चिम बंगाल के आरोपी गिरफ्तार

कॉल सेंटर से गिरफ्तार किए गए सातों आरोपी पेशेवर रूप से अलगअलग राज्यों से ताल्लुक रखते हैं. इनमें गुजरात के अहमदाबाद निवासी पुनीत कुमार वर्मा और दीपेन चंद्रकांत पटेल के साथसाथ पश्चिम बंगाल के कोलकाता और 24 परगना के रहने वाले मोहम्मद सोहेल, मोहम्मद शाहनवाज आलम, मोहम्मद इमरान, मोहम्मद रियाज और सज्जाद हुसैन उर्फ सरफराज शामिल हैं. अपार्टमेंट के भीतर चल रहे इस अवैध सेटअप से पुलिस ने भारी मात्रा में हाईटेक उपकरण जब्त किए हैं: पुलिस टीम ने मौके से 8 आधुनिक लैपटॉप, 9 स्मार्टफोन, 4 हाईस्पीड वाईफाई/इंटरनेट राउटर, 9 हेडफोन, 5 लैपटॉप चार्जर, 2 कंप्यूटर माउस और अन्य डेटा केबल्स बरामद किए हैं.

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