उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों की घोषणा भले ही अभी तक नहीं हुई, लेकिन माहौल पूरा चुनावी है. अब राजधानी लखनऊ में एक अलग तरह का पोस्टरवार सामने आया है. इस पोस्टर में लिखा है कि लखनऊ में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं. इसी के साथ राजधानाी में साल 2017 से लेकर अब तक हुए महिला अपराधों का डेटा दिया गया है. यह डेटा NCRB से लिया गया है.

इसी पोस्टर में एक क्यूआर कोड भी दिया गया है. इस क्यूआर कोड को स्कैन करते ही लखनऊ, गोरखपुर समेत कई अन्य शहरों में महिला अपराध के आंकड़े सामने आ जा रहे हैं. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। राजधानी लखनऊ में ये पोस्टर हजरतगंज, ऐशबाग, लालबाग, हुसैनगंज, चौक, हुसैनाबाद समेत सौ से अधिक स्थानों पर लगाए गए हैं. बताया जा रहा है कि इसी तरह के पोस्टर अन्य शहरों में भी लगाए गए हैं.
किसने लगाया पोस्टर?
मंगलवार की सुबह शहर में जगह जगह दीवारों पर लगे इन पोस्टरों को देखकर हर कोई हैरान रह गया. इस पोस्टर में यह कहीं नहीं लिखा है कि ये पोस्टर किसने और कब लगाए, लेकिन पोस्टर को देखने के बाद साफ तौर पर जाहिर हो रहा है कि यह पोस्टर सरकार पर हमले के तहत लगाए गए हैं. दरअसल प्रदेश सरकार लगातार महिला अपराध कम होने का दावा कर रही है, ऐसे में यह पोस्टर सरकारी आंकड़ों के आधार पर ही सरकारी दावों की हवा निकाल दी है.
विरोध का अनूठा तरीका
सरकार के कानून व्यवस्था संबंधी दावों के विरोध का यह अनूठा तरीका बताया जा रहा है. जानकारों के मुताबिक विरोध करने वाले ने आंकड़ों के साथ लोगों को समझाने की कोशिश की है कि सरकारी दावों में कितनी हकीकत है और कितना फसाना. दरअसल पोस्टर में दिए इंटरैक्टिव QR कोड को स्कैन करते ही मोबाइल फोन पर सीधे लखनऊ और गोरखपुर में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की डेटा खुलकर सामने आ जा रहा है. यह डेटा वर्षवार है. इससे आज आसानी से जान सकेंगे कि महिला अपराध घट रहे या बढ़ रहे.