शोषण के आरोप ने छीन ली जवानी, 20 साल बाद हुआ बरी… केस में ऐसा क्या सामने आया कि पलट गया फैसला?​​​

शोषण के आरोप ने छीन ली जवानी, 20 साल बाद हुआ बरी… केस में ऐसा क्या सामने आया कि पलट गया फैसला?​​​
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Vishnu Tiwari Jail Story: साल 2000 में एक गिरफ्तारी ने उत्तर प्रदेश के ललितपुर में विष्णु तिवारी की जिंदगी की दिशा बदल दी. उन पर बलात्कार और SC/ST एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ. इसके बाद जो हुआ, उसमें उनकी जवानी जेल की सलाखों के पीछे गुजर गई. करीब दो दशक बाद जब हाई कोर्ट ने उन्हें बरी किया, तब उनके हाथ में आजादी का कागज तो था, लेकिन जिंदगी का वह हिस्सा वापस नहीं था, जो जेल में बीत चुका था. यह घटना 2021 में सामने आई थी, लेकिन 2026 में भी उनकी कहानी न्याय व्यवस्था में देरी और गलत सजा के असर को समझने वाली एक अहम मिसाल के तौर पर याद की जाती है.

16 सितंबर 2000 को गिरफ्तार हुए थे विष्णु तिवारी

विष्णु तिवारी को आज से 26 साल पहले यानी 16 सितंबर 2000 को गिरफ्तार किया गया था. उनके गांव की एक महिला ने आरोप लगाया था कि खेतों की ओर जाते समय उन्होंने उसके साथ बलात्कार किया. मामले में SC/ST एक्ट के तहत भी कार्रवाई हुई. करीब तीन साल बाद ललितपुर की अदालत ने उन्हें बलात्कार के मामले में दोषी ठहराते हुए 10 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई. इसके अलावा SC/ST एक्ट उन्हें उम्रकैद की सजा मिली. दोनों सजाएं साथ चलनी थीं. उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा कि यह मामला उनकी जिंदगी के अगले 20 साल अपने साथ ले जाएगा.

फिर आया वो मोड़, जिसने पूरे मामले को पलट दिया

विष्णु तिवारी ने अपनी सजा के खिलाफ अपील की. मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा और जनवरी 2021 में अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों की दोबारा समीक्षा की. हाई कोर्ट ने मेडिकल सबूतों को भी महत्वपूर्ण माना.

अदालत के मुताबिक, मेडिकल जांच में जबरन संबंध बनाए जाने के संकेत नहीं मिले थे. डॉक्टर को स्पर्म नहीं मिला था और महिला के शरीर में अंदरूनी चोटें भी नहीं पाई गई थीं. कोर्ट ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास थे. इन परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि विष्णु तिवारी को गलत तरीके से दोषी ठहराया गया था. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। कोर्ट ने निचली अदालत का फैसला पलटते हुए उन्हें बरी कर दिया.

20 साल बाद कैसी हो गई थी विष्णु तिवारी की हालत?

3 मार्च 2021 को विष्णु तिवारी आगरा सेंट्रल जेल से बाहर निकले. हाथ में रिहाई का आदेश था, लेकिन स्वागत करने के लिए बाहर परिवार का कोई सदस्य नहीं था. वह 43 साल के हो चुके थे. उनकी शादी नहीं हुई थी और उनके मुताबिक, मैं 20 साल से जेल में हूं… मुझे आगे क्या देखना चाहिए? मेरा शरीर टूट गया है और मेरा परिवार भी. मेरा सिर्फ़ एक छोटा भाई है. मेरी शादी नहीं हुई है. मेरे हाथ देखो… जेल के किचन में काम करने से छाले पड़ गए हैं.

जेल से बाहर निकतले समय उन्हें प्रशासन की ओर से 600 रुपये मिले थे और उन्होंने बताया था कि इन्हीं पैसों के साथ वह रात की बस से अपने गांव जाने वाले थे. 20 साल पहले गिरफ्तार हुआ एक आदमी जब जेल में गया था, तब उसकी जिंदगी आगे बढ़ने वाली थी. बाहर आया तो दो दशक बीच चुके थे.

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