बच्चे रोते रहे, मां सहेली के साथ चलती बनी… कानपुर की महिला ने पति और 3 मासूमों को ठुकराया​​​

बच्चे रोते रहे, मां सहेली के साथ चलती बनी… कानपुर की महिला ने पति और 3 मासूमों को ठुकराया​​​
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Kanpur News: कानपुर के महाराजपुर थाना क्षेत्र से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है. यहां तीन बच्चों की मां अपने पति और बच्चों को छोड़कर सहेली के साथ रहने के लिए चली गई. पुलिस और परिजनों के काफी समझाने के बाद भी महिला अपनी जिद पर अड़ी रही. आखिरकार, महिला के अधिकारों और सुप्रीम कोर्ट के कानूनी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए पुलिस को उसे उसकी मर्जी से सहेली के साथ जाने देना पड़ा.

6 सितंबर से लापता थी महिला, सर्विलांस से मिली लोकेशन

प्राप्त जानकारी के अनुसार, महाराजपुर क्षेत्र की रहने वाली इस महिला की करीब 1 साल पहले इंस्टाग्राम के जरिए दिल्ली में प्राइवेट जॉब करने वाली 25 वर्षीय युवती से दोस्ती हुई थी. बीते 6 सितंबर को महिला अचानक घर से बिना बताए कहीं चली गई. परिजनों द्वारा काफी खोजबीन के बाद जब उसका कोई सुराग नहीं मिला, तो पति ने महाराजपुर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई.

मामले की जांच में जुटी पुलिस ने जब मोबाइल सर्विलांस और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) खंगाले, तो पता चला कि महिला की दिल्ली की एक युवती से लगातार बात होती थी. लोकेशन ट्रैक करते हुए पुलिस ने महिला और उसकी सहेली दोनों को बरामद किया और थाने लेकर आई.

थाने में एसीपी आशुतोष सिंह ने महिला से पूछताछ की और उसे परिजनों के साथ जाने की सलाह दी. इसके बाद महिला के पति, बच्चों और उसके ससुराल पक्ष के लोगों को भी मौके पर बुलाया गया. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। परिजनों और बच्चों ने महिला से घर लौटने की अपील की, लेकिन महिला ने साफ शब्दों में कह दिया कि वह अपनी मर्जी से अपनी सहेली के साथ रहना चाहती है और उसे अपने बच्चों के साथ नहीं रहना है.

एसीपी आशुतोष सिंह के मुताबिक, पुलिस ने महिला को समझाने का पूरा प्रयास किया, लेकिन महिला अपने कानूनी अधिकारों का हवाला देते हुए अपनी सहेली के साथ जाने की बात पर अड़ी रही. चूंकि महिला बालिग है और कानून किसी भी वयस्क नागरिक को अपनी स्वेच्छा से रहने का अधिकार देता है, इसलिए पुलिस ने नियमानुसार उसे उसकी मर्जी से जाने की अनुमति दे दी.

कानूनी पहलू: भरण-पोषण के लिए अदालत जा सकते हैं बच्चे

इस कानूनी स्थिति पर कानपुर के वरिष्ठ वकील तत्वेश अग्रवाल का कहना है कि भारतीय संविधान और उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुसार, किसी भी वयस्क महिला को अपनी मर्जी से किसी के भी साथ रहने का पूर्ण अधिकार है और इस पर कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती.

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ‘हिंदू एडॉप्शन एंड मेंटेनेंस एक्ट’ की धारा 20 के तहत बच्चों को अपनी मां से परवरिश और भरण-पोषण (मासिक खर्च) पाने का पूरा कानूनी अधिकार है. अगर बच्चे या उनके अभिभावक अदालत का दरवाजा खटखटाते हैं, तो कानूनन महिला को अपने बच्चों के लालन-पालन का वित्तीय खर्च उठाना ही पड़ेगा.

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