टूटी रस्सी और नाक से बहता खून… सुरेंद्र कोली ने खुद लगाई फांसी या किसी ने गला घोंटा?​

टूटी रस्सी और नाक से बहता खून… सुरेंद्र कोली ने खुद लगाई फांसी या किसी ने गला घोंटा?​

नोएडा के निठारी कांड वाले सुरेंद कोली की मौत को लेकर अभी कई सवाल अनसुलझे हैं. पुलिस के मुताबिक गले की रस्सी टूटी हुई थी. उसकी नाक से खून बह रहा था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मौत की वजह गला घोंटने के रूप में सामने आया है. ऐसे में एक बार फिर वही सवाल उठता है कि सुरेंद्र कोली ने सुसाइड की या किसी ने गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखने के बाद पुलिस ने इस सवाल का जवाब तो दिया है, लेकिन यह जवाब भी नए सवाल पैदा कर दे रहा है.

जेल से रिहाई के बाद सुरेंद्र कोली हरिद्वार के सप्तऋषि क्षेत्र में अपना नाम और पहचान बदलकर रह रहा था. 18 सितंबर को उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने शव कब्जे में लेकर जांच किया. इस दौरान ये तो जाहिर हो गया था कि उसकी मौत गला घोंटने की वजह से हुई है. लेकिन नाक से खून बहने के सवाल पर पुलिस उलझ गई थी. अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस ने सुरेंद्र कोली की मौत के पीछे की वजह बताई है.

अब क्यों है कंफ्यूजन?

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक गले में रस्सी कसने की वजह से सुरेंद्र कोली का दम घुट गया और इसी वजह से उसकी मौत हो गई. दम घुटने की वजह से ही उसके शरीर में खून का प्रेशर बना और नाक के जरिए खून बाहर आ गया था. इसी के साथ पुलिस का कहना है कि पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो सुरेंद्र कोली का शव जमीन पर पड़ा था और रस्सी टूटी हुई थी. पुलिस के इसी बयान की वजह से कई नए सवाल खड़े हो गए हैं.

पुलिस ने जताई आशंका

इस मामले में पुलिस ने आशंका जताई है कि सुरेंद्र ने फांसी लगाई होगी, इससे उसका दम घुट गया होगा, लेकिन जिस रस्सी से उसने फांसी लगाई, वह उसका वजन झेल नहीं पायी और वह जमीन पर गिर गया होगा. हालांकि कई लोग यह भी दावा कर रहे हैं कि सुरेंद्र कोली ने फांसी नहीं लगाई, बल्कि किसी ने उसे फांसी पर लटका दिया था. हालांकि पुलिस इस तर्क पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया देने से बच रही है.

सादाराम के नाम से छिपा था सुरेंद्र

पुलिस के मुताबिक जेल से रिहाई के बाद कुछ महीने पहले ही सुरेंद्र कोली यहां हरिद्वार में आकर रहने लगा था. यहां उसने अपना नाम और पहचान भी छिपाकर रखा. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। आसपास के लोग उसे सादाराम के नाम से जानते थे. मूल रूप से अल्मोड़ा में मंगरुखाल गांव के रहने वाले सुरेंद्र कोली के दो और भाई हैं. इनमें से एक तो गांव में ही टीचर है, जबकि दूसरा दिल्ली में कोई प्राइवेट नौकरी करता है.

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