Jaunpur News: उत्तर प्रदेश के जौनपुर में खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर युवकों को कथित तौर पर अवैध हिरासत में लेने, थाने में टॉर्चर करने और उनके खातों से लाखों रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कराने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है. जौनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कुंवर अनुपम सिंह ने फरार सुरेरी थाने के पूर्व थानाध्यक्ष दिव्य प्रकाश सिंह और राजनारायण गिरी पर 2525 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है. पुलिस ने दोनों की सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखने की बात कही है.

मामला सामने आने के बाद पुलिस विभाग में भी हड़कंप मच गया. आरोप है कि कुछ पुलिसकर्मी सिविल ड्रेस में खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर लोगों को उठाते थे और सुरेरी थाने ले जाते थे. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें थाने के किचन रूम में बंद कर मारपीट की गई और मोबाइल फोन लेकर ऑनलाइन खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई. जौनपुर निवासी विजय राजभर और वाराणसी निवासी सुशील पांडेय ने अधिकारियों से शिकायत कर आरोप लगाया कि उनके साथ इसी तरह की कार्रवाई की गई. विजय के मुताबिक, उससे करीब 2.15 लाख रुपये और सुशील से करीब 1.65 लाख रुपये अलगअलग खातों में ट्रांसफर कराए गए.
DIG से शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
पीड़ितों ने मामले की शिकायत वाराणसी रेंज के डीआईजी वैभव कृष्ण से की थी. इसके बाद उच्च अधिकारियों के निर्देश पर जांच कराई गई. जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद जलालपुर और सुरेरी थाने में नामजद समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ अलगअलग एफआईआर दर्ज की गई. पूरे मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय एसआईटी गठित की गई. टीम ने थाने और घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल, बैंक ट्रांजैक्शन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच शुरू की.
5 आरोपी जेल भेजे जा चुके
पुलिस के मुताबिक, मामले में संलिप्तता सामने आने के बाद सुरेरी थाने के आरक्षी सत्येंद्र कुमार गौड़ और विष्णु सिंह को निलंबित कर जेल भेजा गया. जिस ग्राहक सेवा केंद्र के खाते में कथित तौर पर रकम ट्रांसफर कराई गई थी, उसके संचालक मनीष को भी गिरफ्तार किया गया. इसके अलावा आरोपी बताए गए दो सगे भाइयों संकित सिंह और विकास सिंह ने जौनपुर कोर्ट में सरेंडर किया. इस तरह अब तक पांच आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है.
पीड़ितों ने सुनाई थाने में प्रताड़ना की कहानी
विजय राजभर का आरोप है कि 15 सितंबर की दोपहर कुछ लोग उसकी दुकान पर पहुंचे और खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया. इसके बाद उसे जबरन सुरेरी थाने ले जाया गया और किचन में बंद कर दिया गया. आरोप है कि उसे छोड़ने के बदले तीन लाख रुपये मांगे गए और रकम नहीं देने पर झूठे मुकदमे तथा एनकाउंटर की धमकी दी गई.
विजय के मुताबिक, उसका फोन लेकर फोनपे का पासवर्ड पूछा गया और कई खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई. उसका यह भी आरोप है कि घर से एटीएम कार्ड मंगवाकर नकदी निकाली गई. इसी तरह सुशील पांडेय ने आरोप लगाया कि उन्हें भी हिरासत में लेकर अलगअलग खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई. उनके हाथ में तमंचा देकर वीडियो बनाने और सादे कागज पर हस्ताक्षर कराने का भी आरोप लगाया गया.
फरार आरोपियों की तलाश जारी
पुलिस के अनुसार पूर्व थानाध्यक्ष दिव्य प्रकाश सिंह समेत दो आरोपी अभी फरार हैं. दोनों पर 2525 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है. पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है. मामले की जांच जारी है और पुलिस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ पीड़ितों के बयानों का भी मिलान कर रही है. जांच पूरी होने के बाद ही पूरे वसूली कांड में किसकी क्या भूमिका थी, यह स्पष्ट हो सकेगा.