‘आसिफ ने मेरी गर्दन पर चाकू रखा और…’, कालकाजी गैंगरेप पीड़िता ने सुनाई आपबीती, बताई दरिंदों की हर एक करतूत​

‘आसिफ ने मेरी गर्दन पर चाकू रखा और…’, कालकाजी गैंगरेप पीड़िता ने सुनाई आपबीती, बताई दरिंदों की हर एक करतूत​

Delhi Crime News: राजधानी दिल्ली के चर्चित कालकाजी गैंगरेप में अब पीड़िता ने आपबीती सुनाई है, जो वाकई रोंगटे खड़े कर देने वाली है. पीड़िता के अनुसार, वो अपने जन्मदिन पर कालकाजी मंदिर में पूजा करने आई थी. शाम करीब 5:45 बजे कालकाजी मंदिर पहुंचने के बाद करीब 7 बजे वह अपने दोस्त समीर के साथ बाहर निकली. इसके बाद वे कालकाजी मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर7 के पास स्थित पार्क में जाकर एक बेंच पर बैठ गए. बेंच पर बैठते ही 30 से 35 साल की उम्र के तीन युवक वहां पहुंचे. उन्होंने पीड़िता के दोस्त को थप्पड़ मारा और खुद को पुलिसकर्मी बताते हुए मोबाइल फोन छीन लिए.

पीड़िता के मुताबिक, आरोपियों में से एक ने दूसरे को ‘आसिफ’ कहकर पुकारा, जिसने काले रंग की पिस्तौल निकाली. इसके बाद अन्य दो आरोपियों ‘हेमू’ और ‘दीपु’ ने चाकू निकाल लिए और पीड़िता को झाड़ियों व सुनसान लाल रंग की बेंच की तरफ ले गए. तीनों आरोपियों ने एकएक कर युवती की गर्दन पर चाकू रखकर उसके साथ जबरदस्ती की.

लड़की बोली मेरा जन्मदिन था. मैं कालकाजी मंदिर में पूजा करने जाना चाहती थी, इसलिए मैंने अपने दोस्त से मुझे वहां ले चलने के लिए कहा. मेरी मां खाना बनाने का काम करती हैं और वो अपने काम पर गई थीं. इसलिए मैंने अपनी बड़ी बहन को बताया कि मैं अपने दोस्त के साथ मंदिर जा रही हूं. मैं शाम करीब 5 बजे घर से ऑटो लेकर निकली. करीब 5:45 बजे हम कालकाजी मंदिर पहुंच गए. शाम करीब 7 बजे तक हम मंदिर में रहे। इसके बाद मंदिर से बाहर आ गए. कालकाजी मेट्रो स्टेशन के बाहर से हमने चिप्स और पानी की बोतल खरीदी. इसके बाद हम गेट नंबर7 से पार्क के अंदर चले गए.

‘मेरे दोस्त को थप्पड़ मारा, बोले हम पुलिस वाले हैं’

आगे बताया मैं इस्कॉन मंदिर में भी पूजा करना चाहती थी. मैंने अपने दोस्त से कहा कि पहले कुछ देर पार्क में बैठकर चिप्स खा लेते हैं, उसके बाद मंदिर चलेंगे. जैसे ही हम पार्क में जाकर एक बेंच पर बैठे और चिप्स का पैकेट खोला, तभी करीब 30 से 35 साल की उम्र के तीन लड़के वहां आए. उन्होंने मेरे दोस्त को पकड़ लिया और उसे थप्पड़ मारा. जब हमने उनसे पूछा कि वे कौन हैं, तो उन्होंने खुद को पुलिसकर्मी बताया और पूछा कि हम यहां क्यों आए हैं. उन्होंने कहा कि यहां आना मना है. इसके बाद एक लड़का मेरे दोस्त समीर को दूसरी तरफ ले गया. उन्होंने हमारे मोबाइल फोन भी ले लिए.

इसके बाद दो लड़कों ने झाड़ियों की तरफ इशारा करके मुझे वहां चलने के लिए कहा. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। मैं डर गई और मैंने उनसे कहा कि जो भी पूछना है, यहीं पूछिए और मेरी मां से बात कर लीजिए. तभी एक लड़के ने कहा, ‘आसिफ भाई, गन निकाल.’ जिस लड़के को आसिफ कहकर बुलाया गया, उसने बैंगनी रंग की शर्ट पहन रखी थी और वो तीनों में सबसे ज्यादा मजबूत शरीर वाला था. आसिफ ने काले रंग की बंदूक निकाली और कुछ देर बाद उसे वापस अपनी जेब में रख लिया.

‘मुझे लाल रंग की बेंच पर लेटा दिया फिर…’

इसके बाद दोनों लड़कों ने चाकू निकाल लिए और मुझे एक सुनसान और अंधेरी जगह पर ले गए. आसिफ ने मुझे लाल रंग की बेंच पर लेटा दिया. इसके बाद उसने दूसरे लड़के से कहा, ‘हेमू, इधर नजर रखना, कोई इस तरफ न आए.’ आसिफ ने मेरी गर्दन पर चाकू रखकर मेरे साथ जबरदस्ती की. मुझे बहुत दर्द हो रहा था और मैं रो रही थी. इसके बाद आसिफ ने हेमू से कहा, ‘हेमू, तुम आओ, मैं दीपु के पास जा रहा हूं.’ इसके बाद हेमू मुझे पास की दूसरी बेंच पर ले गया. उसने भी मेरी गर्दन पर चाकू रखा और मेरे साथ जबरदस्ती की.

पुलिस ने किया तीनों आरोपियों को गिरफ्तार

इसके बाद तीसरा लड़का, जिसे दोनों दीपु नाम से बुला रहे थे, वहां आया. उसने भी मेरी गर्दन पर चाकू रखा और मेरे साथ जबरदस्ती की. फिर उन लोगों ने मुझे जल्दी से कपड़े पहनने के लिए कहा. उसने मुझे अपनी टीशर्ट और जींस दी. मैंने कपड़े पहने. उसके बाद वे समीर को भी वापस लेकर आए.

उन्होंने हमें हमारे मोबाइल फोन वापस कर दिए और धमकी दी कि जल्दी यहां से चले जाओ, वरना वे हमें मार देंगे. उन्होंने यह भी कहा कि इस बारे में किसी को कुछ मत बताना. इसके बाद वे हमें पार्क से बाहर ले गए. मैंने समीर को अपने साथ हुई पूरी घटना के बारे में बताया. समीर ने पीसीआर को फोन किया. कुछ देर बाद पुलिस हमारे पास पहुंची. पुलिस ने मुठभेड़ के बाद मुख्य आरोपी आसिफ सहित उसके दो अन्य साथियों हेमंत और उसके भाई मुकेश को गिरफ्तार कर लिया है.

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