
बांग्लादेश के अपराध इतिहास का एक ऐसा खौफनाक और शातिर सीरियल किलर, जिसके नाम से कभी पूरे देश में दहशत फैल गई थी. रोसु खान (Rosu Khan) नाम के इस दरिंदे ने सोशल मीडिया या रोमांस का नहीं, बल्कि शादी का झूठा झांसा देकर देश भर की गरीब और जरूरतमंद महिला गारमेंट वर्करों को अपना निशाना बनाया. प्यार के जाल में फंसाकर वह मासूम लड़कियों को सुनसान इलाकों में ले जाता था, उनके साथ अमानवीय तरीके से दुष्कर्म करता था और फिर उनकी बेरहमी से हत्या कर देता था.
रोसु खान का यह खूनी खेल तब सामने आया जब साल 2009 में उसे एक मस्जिद से पंखा और लाउडस्पीकर चोरी करने के आरोप में पुलिस ने धर दबोचा. पूछताछ के दौरान उसने जो राज खोले, उसने पुलिस महकमे के भी होश उड़ा दिए. उसने कबूल किया कि उसने सिर्फ एक या दो नहीं, बल्कि कुल 11 महिलाओं को मौत के घाट उतारा था. उसका सपना कुल 101 महिलाओं की हत्या करने का था, जिसके बाद वह किसी सूफी मजार पर जाकर संन्यासी की तरह जीवन बिताना चाहता था. आखिरकार कानून के लंबे हाथों ने इस खूंखार कातिल को उसके अंजाम तक पहुंचा दिया.
कौन था सीरियल किलर रोसु खान?
रोसु खान मूल रूप से बांग्लादेश के चांदपुर जिले का रहने वाला था. शुरुआत में वह एक मामूली चोर था, जो छोटी-मोटी चोरियां करके अपना गुजारा करता था. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। लेकिन धीरे-धीरे वह एक कुख्यात और विकृत मानसिकता वाला क्रिमिनल बन गया. कोर्ट में सुनवाई के दौरान जज ने भी उसे एक ‘प्रोफेशनल सीरियल किलर’ करार दिया था. उसका मुख्य टारगेट सावर और टोंगी इलाकों की वो गरीब और मजबूर लड़कियां थीं जो गारमेंट फैक्टरियों में काम करती थीं. उसकी उम्र 16 से 35 साल के बीच की महिलाओं पर होती थी.
रोमांस और शादी का जाल, फिर रेप और मर्डर का खूनी खेल
रोसु खान का वारदातों को अंजाम देने का तरीका बेहद शातिर था. वह पीड़ित महिलाओं से प्यार का नाटक करता और उनसे शादी करने का झूठा वादा करता था. इन लुभावनी बातों में आकर भोली-भाली लड़कियां उसके झांसे में आ जाती थीं. वह उन्हें चांदपुर के सुनसान इलाकों, नदी के किनारों या खेतों में ले जाता था. वहां पहले उनके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाता और फिर पहचान छुपाने के लिए उनके हाथ-पैर बांधकर उन्हें नदी में डुबो देता था या बेरहमी से मार डालता था. कई मामलों में पीड़ितों के शरीर पर इंसानी दांतों के काटने के निशान और गंभीर चोटें पाई गईं.
कैसे पकड़ा गया यह खूंखार दरिंदा?
इस शातिर कातिल का अंत तब शुरू हुआ जब 7 अक्टूबर 2009 को पुलिस ने उसे एक मस्जिद से चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया. टोंगी पुलिस थाने में जब उससे कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने अनजाने में अपनी एक हत्या का जिक्र कर दिया. पुलिस ने जब उसका रिमांड लेकर गहराई से तफ्तीश की, तो उसने एक-एक करके 11 महिलाओं की हत्या करने की बात कबूल ली. उसने पुलिस को बताया कि उसकी पहली शिकार उसके अपने बहनोई की पत्नी थी, जिसे उसने 2007 में मारा था. इसके बाद उसने एक के बाद एक कई गारमेंट वर्करों को मौत के घाट उतार दिया.
अदालत का फैसला और फांसी की सजा
रोसु खान के खिलाफ कई अलग-अलग मामलों में मुकदमे चले. चांदपुर की जिला एवं सत्र न्यायालय ने तमाम गवाहों, सबूतों और उसके खुद के इकबालिया बयानों के आधार पर उसे और उसके दो साथियों को मौत की सजा सुनाई. साल 2015 में अदालत ने उसे एक गारमेंट वर्कर (शाहिदा) के दुष्कर्म और हत्या के मामले में फांसी पर लटकाने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया.