भारतश्रीलंका टैक्स ट्रीटी में बड़ा बदलाव, जानिए कंपनियों और निवेशकों पर क्या होगा असर?

भारतश्रीलंका टैक्स ट्रीटी में बड़ा बदलाव, जानिए कंपनियों और निवेशकों पर क्या होगा असर?

भारत सरकार ने टैक्स चोरी और गलत तरीके से टैक्स छूट का फायदा उठाने पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. केंद्र सरकार ने भारत और श्रीलंका के बीच हुए डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट में बदलाव किया है. इस बदलाव के तहत अब ऐसा नया नियम लागू किया गया है, जिससे केवल टैक्स बचाने के उद्देश्य से किए गए लेनदेन या कारोबारी ढांचे को टैक्स समझौते का लाभ नहीं मिलेगा.

भारतश्रीलंका टैक्स ट्रीटी में बड़ा बदलाव, जानिए कंपनियों और निवेशकों पर क्या होगा असर?

वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को इस संशोधन की आधिकारिक अधिसूचना जारी की. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। दोनों देशों की कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद यह संशोधन 19 जून 2026 से लागू हो चुका है. हालांकि, भारत में इसका असर वित्त वर्ष 202728 से मिलने वाली आय पर दिखाई देगा.

सरकार ने जोड़ा ये नियम

इस बदलाव में प्रिंसिपल पर्पस टेस्ट नाम का नया नियम जोड़ा गया है. आसान भाषा में समझें तो अगर टैक्स अधिकारियों को यह लगता है कि किसी कंपनी या व्यक्ति ने किसी लेनदेन या व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य सिर्फ टैक्स में छूट हासिल करना था, तो उसे भारतश्रीलंका टैक्स संधि के तहत मिलने वाले लाभ से वंचित किया जा सकता है.

उदाहरण से समझें तो अगर कोई कंपनी सिर्फ कम टैक्स देने के लिए श्रीलंका में कागजी कंपनी बनाकर निवेश करती है और उसका वहां कोई वास्तविक कारोबार नहीं है, तो जांच के बाद उसे टैक्स छूट का फायदा नहीं मिलेगा. यानी अब केवल कागजों पर बनाई गई कंपनियों के जरिए टैक्स बचाने की कोशिश करना आसान नहीं होगा.

इन कंपनियों को चिंता नहीं

सरकार ने यह भी साफ किया है कि जिन कंपनियों और निवेशकों का कारोबार पूरी तरह वास्तविक और नियमों के अनुरूप है, उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है. अगर किसी लेनदेन का मकसद वास्तविक व्यापार, निवेश या आर्थिक गतिविधि है और वह टैक्स समझौते की भावना के अनुरूप है, तो उन्हें पहले की तरह टैक्स संधि का लाभ मिलता रहेगा.

नहीं लगाया कोई नया टैक्स

ध्यान देने वाली बात यह है कि इस संशोधन के तहत कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है और न ही मौजूदा टैक्स दरों में कोई बदलाव किया गया है. केवल यह सुनिश्चित किया गया है कि टैक्स समझौते का गलत इस्तेमाल न हो और टैक्स बचाने के लिए बनाए गए कृत्रिम ढांचों पर रोक लगाई जा सके.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे उन प्रयासों का हिस्सा है, जिनका उद्देश्य टैक्स चोरी, मुनाफे को दूसरे देशों में स्थानांतरित करने और टैक्स बेस को कम करने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाना है. इससे टैक्स व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी और दोनों देशों के बीच निवेश का माहौल भी ज्यादा भरोसेमंद होगा.

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