अमेरिका ने लगातार 8वीं रात ईरान पर बरसाये बम लाइफलाइन काटी, 6 तरफ से घेरा

अमेरिका ने लगातार 8वीं रात ईरान पर बरसाये बम लाइफलाइन काटी, 6 तरफ से घेरा

अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिका ने लगातार आठवीं रात भी ईरान पर हवाई हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने खुद इन हमलों को मंजूरी दी थी और यह कार्रवाई जॉर्डन में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के जवाब में की गई है।

अमेरिका ने लगातार 8वीं रात ईरान पर बरसाये बम लाइफलाइन काटी, 6 तरफ से घेरा

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि इस बार हमलों का मुख्य निशाना ईरान के सैन्य ठिकाने, हथियारों के भंडार और लॉजिस्टिक्स सेंटर रहे। अमेरिकी सेना के मुताबिक, इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना है।

हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में पुलों और डिसैलिनेशन प्लांट पर भी हमले की बात कही गई है, लेकिन CENTCOM ने इसकी पुष्टि नहीं की है। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। जंग में में दो और सैनिकों की मौत जान गंवाने वाले अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है।

ईरान के होर्मोजगान प्रांत में बने सैन्य ठिकानों पर अमेरिका ने जो ताबड़तोड़ मिसाइलें बरसाई हैं, वो कोई मामूली हमला नहीं हैं. ये राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वो खतरनाक और शातिर ‘मास्टरप्लान’ है, जिसके जरिए होर्मुज स्ट्रेट में एक बहुत बड़े ग्राउंड ऑपरेशन की जमीन तैयार की जा रही है. अमेरिका इन हवाई हमलों से ईरान के पूरे डिफेंस सिस्टम को चुनचुनकर नेस्तनाबूत कर रहा है, ताकि जब अमेरिकी सेना जमीन पर कदम रखे तो उसे रोकने वाला कोई न बचे. सैन्य इतिहास में ये एक क्लासिक रणनीति रही है, जहां किसी भी बड़े जमीनी धावे से पहले दुश्मन की रीढ़ की हड्डी को पूरी तरह तोड़कर उसे अपाहिज बना दिया जाता है.
‘लॉजिस्टिकल आइसोलेशन’: ईरान की जीवन रेखा काटने की खतरनाक चाल
इस जंग में अमेरिका की सबसे घातक रणनीति है ‘लॉजिस्टिकल आइसोलेशन’, यानी ईरान का राशन, गोलाबारूद और हथियारों की सप्लाई लाइन को पूरी तरह से काट देना. अमेरिकी फाइटर जेट्स और मिसाइलें जानबूझकर ईरान के पुलों, सड़कों और रेलवे नेटवर्क्स को मटियामेट कर रही हैं. अमेरिका का सबसे बड़ा टारगेट ईरान का ‘बंदर अब्बास’ बंदरगाह है, जो अकेले पूरे ईरान के 85 परसेंट व्यापार को संभालता है.
बंदर अब्बास सिर्फ एक बंदरगाह नहीं, बल्कि ईरान की असली लाइफलाइन है. देश के कोनेकोने में मौजूद ईरानी सेना को हथियार, मिसाइलें, ईंधन और खानेपीने का सामान इसी रास्ते से पहुंचता है. अमेरिका का प्लान है कि बंदर अब्बास को बाकी के ईरान से पूरी तरह से अलगथलग कर दिया जाए. अगर ये बंदरगाह देश से कट गया तो ईरानी सेना के पास न तो गोलियां बचेंगी और न ही राशन, जिससे उनकी युद्ध लड़ने की क्षमता पूरी तरह दम तोड़ देगी.

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