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गुलज़ार भारतीय सिनेमा और साहित्य जगत की एक ऐसी शख्सियत हैं, जिन्हें शब्दों का जादूगर कहा जाए तो गलत नहीं होगा। वे एक प्रसिद्ध गीतकार, कवि, पटकथा लेखक और फिल्म निर्देशक हैं। गुलज़ार अपनी नज़्मों और गीतों में ‘अमूर्त’ बिम्बों के इस्तेमाल के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने चांद, धूप, कागज़ और रिश्तों को बेहद संवेदनशील और नए तरीके से पेश किया है। उनकी उर्दू, हिंदी और पंजाबी मिश्रित भाषा उनकी लेखनी को सबसे अलग बनाती है। उनकी शायरी भी लोगों को खूब पसंद आती है। ऐसे में यहां हम उनके कुछ मशहूर शेर लेकर आए हैं। यहां पढ़ें गुलजार की मशहूर शायरी।
1.आप के बा’द हर घड़ी हम ने
आप के साथ ही गुज़ारी है
2. आइना देख कर तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई
3. ज़िंदगी यूं हुई बसर तन्हा
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा
4. शाम से आंख में नमी सी है
आज फिर आप की कमी सी है
5. कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़
किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे
6. वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर
आदत इस की भी आदमी सी है
7. कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूं
उन से कितना कुछ कहने की कोशिश की
8. आदतन तुम ने कर दिए वादे
आदतन हम ने ए’तिबार किया
9. जिस की आंखों में कटी थीं सदियां
उस ने सदियों की जुदाई दी है
10. कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है
ज़िंदगी एक नज़्म लगती है
11. हम ने अक्सर तुम्हारी राहों में
रुक कर अपना ही इंतिज़ार किया



