ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में काम करने वाले इटैलियन शेफ डेविड टैम्बुरेला को कथित तौर पर ग्राहकों के लिए पिज्जा पर अनानास डालने से बारबार इनकार करने के बाद नौकरी से निकाल दिया गया. उन्होंने बर्खास्तगी को अनुचित बताते हुए अफसरों से शिकायत की. रेस्तरां का कहना था कि कार्रवाई के पीछे टॉपिंग के अलावा व्यवहार संबंधी शिकायतें भी थीं. वाकया मई 2026 का है और इन दिनों सुर्खियों में आया है, क्योंकि कानूनी लड़ाई अब अंतिम मुकाम पर पहुंची है. आइए, इसी बहाने पिज्जा का इतिहास जानते हैं. आखिर कहां से आया पिज्जा, कैसे पहुंचा पूरी दुनिया में, इस पर कितने एक्सपेरिमेंट हुए?

पिज्जा आज दुनिया के सबसे लोकप्रिय व्यंजनों में से एक है, लेकिन यह हमेशा से ऐसा नहीं था. इसकी शुरुआत एक साधारण रोटी जैसे भोजन से हुई. समय के साथ इसमें कई बदलाव हुए. अलगअलग देशों ने इसे अपने स्वाद के अनुसार अपनाया. इस तरह पिज्जा ने दुनिया भर में अपनी जगह बनाई.
कैसे हुई पिज्जा की शुरुआत?
रोटी पर तेल, जड़ीबूटियां या दूसरे पदार्थ रखकर खाने का तरीका बहुत पुराना है. प्राचीन भूमध्यसागरीय समाजों में भी लोग तरहतरह की चपटी रोटियां खाते थे. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। हालांकि, इन पुराने भोजनों को आज के पिज्जा के समान कहना ठीक नहीं होगा. वे पिज्जा की दूर की शुरुआती कड़ियां हो सकती हैं, लेकिन आधुनिक पिज्जा का जन्म इटली के नेपल्स शहर से जुड़ा है. पिज्जा शब्द का उल्लेख मध्यकालीन दस्तावेजों में मिलता है. एक दस्तावेज में 997 ईस्वी में इस शब्द का इस्तेमाल हुआ था. उस समय यह शब्द आज जैसी चीज़ के लिए नहीं था. इसका अर्थ साधारण रोटी या आटे से बने भोजन से जुड़ा था. नेपल्स और आसपास के इलाकों में पिज्जा शब्द से जुड़े उल्लेख मध्यकाल में भी मिलते हैं.
इटैलियन शेफ डेविड टैम्बुरेला.
नौकरी जाने की वजह बने हवाइयन पिज्जा की कहानी
अब उस पिज्जा का सच भी जानते हैं जिसकी वजह से इटली के शेफ ने अपनी नौकरी गंवाई. असल में पिज्जा का जन्म इटली में जरूर हुआ लेकिन अनानास वाले पिज्जा की जड़ें कनाडा में मिलती हैं. इसे हवाइयन पिज्जा कहा जाता है. साल 1962 में ग्रीस में जन्मे कनाडाई रेस्टोरेंट संचालक सैम पैनोपोलोस ने ओंटारियो में पिज्जा पर अनानास, हैम और बेकन डालकर नया प्रयोग किया था. ऐसे में इटली के मूल निवासी शेफ डेविडे टैम्बुरेला ने जिस बात को अपनी संस्कृति से जोड़ा, असल में उससे उनका रिश्ता है ही नहीं. इस तरह कहा जा सकता है कि उन्होंने जानकारी के अभाव में इसे अपनी संस्कृति से जोड़ा और नौकरी चली गयी.
हवाइयन पिज्जा. फोटो: Pexels
नेपल्स में बना आधुनिक पिज्जा
आधुनिक पिज्जा की पहचान 17वीं और 18वीं सदी के नेपल्स में बनने लगी. शहर में कई कामगार और गरीब परिवार रहते थे. उन्हें ऐसा भोजन चाहिए था जो सस्ता हो, जल्दी तैयार हो और पेट भर सके. चपटी रोटी पर तेल, लहसुन, नमक और स्थानीय सामग्री लगाकर इसे पकाया जाता था. इसे सड़क पर चलतेफिरते खाना आसान था. शुरुआती पिज्जा में आज की तरह बहुत सारी टॉपिंग नहीं होती थीं. आटा, थोड़ा तेल और उपलब्ध सामग्री ही काफी थी. धीरेधीरे नेपल्स में पिज्जा बनाने और बेचने की दुकानें खुलीं. पिज्जा आम लोगों का भोजन था. इसे लंबे समय तक अमीर वर्ग का खास व्यंजन नहीं माना गया.
टमाटर ने कैसे बदला पिज्जा का स्वाद?
पिज्जा की कहानी में टमाटर का बड़ा स्थान है. टमाटर अमेरिका से यूरोप पहुंचा. शुरुआत में कई यूरोपीय लोग इसे खाने से हिचकते थे. बाद में नेपल्स के लोगों ने इसे भोजन में इस्तेमाल करना शुरू किया. टमाटर से पिज्जा का स्वाद और रंग दोनों बदल गए. तेल, आटे और टमाटर का मेल धीरेधीरे लोकप्रिय हुआ. इसके बाद चीज़, जड़ीबूटियां और दूसरी सामग्री भी पिज्जा में जुड़ती गईं. यही वह दौर था जब पिज्जा अपनी पहचान वाले रूप के करीब पहुंचा. हर बदलाव एक बड़े आविष्कार की तरह नहीं था. कई बार रसोइयों ने बस उपलब्ध सामग्री को आटे पर रखकर नए स्वाद आजमाए.
आधुनिक पिज्जा की पहचान 17वीं और 18वीं सदी के नेपल्स में बनने लगी थी. फोटो: Pexels
मार्गरीटा पिज्जा की क्या है कहानी?
मार्गरीटा पिज्जा का नाम इटली की रानी मार्गरीटा से जुड़ा है. कहानी के अनुसार, 1889 में नेपल्स आए शाही परिवार के लिए पिज्जा बनाया गया. टमाटर, मोज़रेला चीज़ और तुलसी से बना पिज्जा रानी को पसंद आया. इन तीन रंगों को इटली के झंडे के रंगों से जोड़ा गया. बाद में इस पिज्जा को रानी के नाम से पुकारा जाने लगा. इस कहानी के कुछ हिस्सों पर इतिहासकारों में चर्चा होती रही है. इसलिए इसे पिज्जा की लोकप्रिय परंपरा के रूप में समझना बेहतर है. इससे इतना जरूर पता चलता है कि पिज्जा ने आम लोगों के भोजन से आगे बढ़कर खास पहचान पाई.
पिज्जा इटली से बाहर कैसे पहुंचा?
19वीं सदी के आखिरी वर्षों में बड़ी संख्या में इतालवी लोग दूसरे देशों में बसने गए. वे अपने साथ भाषा, रीतिरिवाज और भोजन भी लेकर गए. अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों में इतालवी समुदायों ने पिज्जा बनाना और बेचना शुरू किया. अमेरिका में न्यूयॉर्क पिज्जा संस्कृति का एक प्रमुख केंद्र बना. 1905 में न्यूयॉर्क में एक शुरुआती पिज्जेरिया खुला, जिसे अमेरिका के पहले पिज्जेरिया में गिना जाता है. इस तरह माना जाता है कि इतालवी प्रवासियों के जरिए पिज्जा विदेशों में फैला.
दूसरे विश्वयुद्ध ने दिया और विस्तार
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पिज्जा की पहचान और तेजी से फैली. इटली में रहे सैनिकों ने वहां के भोजन का स्वाद चखा. घर लौटने पर कुछ लोगों ने पिज्जा की मांग की. इसके बाद रेस्तरां और बड़े खाद्य व्यवसायों ने इसे ज्यादा लोगों तक पहुंचाया. पिज्जा जल्दी बनने वाला, बांटकर खाने योग्य और कई तरह से बदला जा सकने वाला भोजन था. इन बातों ने इसकी लोकप्रियता बढ़ाई. 1960 के दशक से पिज्जा का वैश्विक प्रसार और तेज हुआ. अलगअलग देशों में इसे स्थानीय स्वाद के अनुसार बनाया गया. असल में पिज्जा का फैलाव केवल उसकी बिक्री की कहानी नहीं है. यह प्रवास और सांस्कृतिक मेलजोल की कहानी भी है.
पिज्जा पर कितने प्रयोग हुए?
पिज्जा पर हुए प्रयोगों की कोई एक तय संख्या नहीं है. दुनिया भर के रसोइए, रेस्तरां और घरों में लोग लगातार नई किस्में बनाते रहे हैं. इसलिए यह कहना मुश्किल है कि कुल कितने प्रयोग हुए. पिज्जा का इतिहास अपने आप में लगातार किए गए छोटेबड़े प्रयोगों का इतिहास है. सबसे पहले आटे के प्रकार और उसे पकाने के तरीके में बदलाव हुए. किसी ने पतला बेस बनाया, तो किसी ने मोटा. कहीं पिज्जा लकड़ी के चूल्हे में पकाया गया, तो कहीं आम ओवन में. बाद में अलगअलग चीज़, सब्जियां, मांस, सॉस और मसाले जोड़कर कई नए स्वाद बनाए गए.
अमेरिका में शिकागो का मोटा पिज्जा और न्यूयॉर्क का पतला स्लाइस मशहूर हुए. दूसरे देशों में स्थानीय सब्जियों, मसालों और चीज़ों का इस्तेमाल होने लगा. अब अलग अनाज के आटे, शाकाहारी चीज़ और बिना ग्लूटेन वाले बेस से भी पिज्जा बनाया जाता है. भारत में पनीर, तंदूरी मसाले और भारतीय सब्जियों वाली टॉपिंग इसके उदाहरण हैं.
भारत में भी पिज्जा पर हुए प्रयोग
भारत में पिज्जा की लोकप्रियता बड़े शहरों में तेजी से बढ़ी. अंतरराष्ट्रीय रेस्तरां श्रृंखलाओं के आने के बाद यह आम लोगों तक अधिक पहुंचा. फिर भारतीय स्वाद के अनुरूप कई किस्में तैयार हुईं. पनीर टिक्का, तंदूरी सब्जी, मकई और मसालेदार सॉस वाली टॉपिंग लोकप्रिय हुईं. कई लोग घर पर भी रोटी या ब्रेड पर अपनी पसंद की सामग्री रखकर पिज्जा जैसा भोजन बनाते हैं. यह बदलाव दिखाता है कि पिज्जा किसी एक तय नुस्खे तक सीमित नहीं रहा. अलगअलग जगहों के लोग इसे अपनी पसंद से बदलते हैं. फिर भी गोल या चपटा आटा, उसके ऊपर सामग्री और उसे पकाने का तरीका इसकी पहचान बनाए रखते हैं.
नेपल्स का पिज्जा यूनेस्को की सूची में भी शामिल
नेपल्स की पिज्जा बनाने की परंपरा को भी अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली. यूनेस्को ने 2017 में नेपल्स के पिज्जा बनाने वालों की कला को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया. इसका महत्व केवल भोजन तक सीमित नहीं है. इसमें आटा तैयार करने, उसे हाथ से फैलाने और पकाने की कला भी शामिल है. पिज्जा की सफलता का राज शायद यही है कि यह सरल भी है और बदलने के लिए खुला भी. यह सड़क का भोजन हो सकता है, पारिवारिक भोजन भी और रेस्तरां की खास डिश भी. नेपल्स में शुरू हुई यह कहानी आज कई देशों की रसोई में अलगअलग रूपों में जारी है. पिज्जा पर प्रयोग खत्म नहीं हुए हैं. हर नई जगह और हर नई पसंद इसे एक नया स्वाद देती है.