अमरोहा केस में बड़ा ट्विस्ट: तीनों बहनों ने खुद चुना दूल्हा, फिर भी क्यों नहीं मिलेगा पत्नी का दर्जा? जानें क्या कहता है कानून

अमरोहा केस में बड़ा ट्विस्ट: तीनों बहनों ने खुद चुना दूल्हा, फिर भी क्यों नहीं मिलेगा पत्नी का दर्जा? जानें क्या कहता है कानून

Amroha News: अमरोहा जिले के हसनपुर क्षेत्र में तीन सगी बहनों और एक ही युवक की शादी का मामला लगातार नए मोड़ ले रहा है. जहां एक तरफ बाल कल्याण समिति नाबालिग होने की आशंका को लेकर जांच करा रही है, वहीं दूसरी तरफ इस शादी की वैधानिक स्थिति को लेकर भी बड़े कानूनी सवाल खड़े हो गए हैं. दिल्ली हाईकोर्ट के वकील इशु जैन के मुताबिक, भारतीय कानून में इस तरह के विवाह के लिए कोई जगह नहीं है और यह पूरी तरह अवैध है.

अमरोहा केस में बड़ा ट्विस्ट: तीनों बहनों ने खुद चुना दूल्हा, फिर भी क्यों नहीं मिलेगा पत्नी का दर्जा? जानें क्या कहता है कानून

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, हिंदू पर्सनल लॉ में एक समय में एक ही जीवित जीवनसाथी रखने का प्रावधान है. दिल्ली हाईकोर्ट के वकील इशु जैन ने बताया हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के अनुसार, पहली पत्नी के जीवित रहते हुए और बिना कानूनी तलाक के दूसरी या तीसरी शादी करना पूरी तरह अवैध है. यदि तीनों बहनें अपनी इच्छा से साथ रहना चाहती हैं और किसी को कोई शिकायत नहीं है, तब भी कानून की नजर में दूसरी और तीसरी शादी की कोई कानूनी मान्यता नहीं होगी. दूसरी और तीसरी महिला को कभी भी वैध पत्नी का अधिकार या दर्जा नहीं मिल सकता.

BNS की धारा 82: 7 से 10 साल तक की जेल

भारतीय न्याय संहिता की धारा 82 में द्विविवाह को लेकर सख्त दंड का प्रावधान किया गया है. पहले पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरी बार विवाह करने पर विवाह अमान्य हो जाता है. इस अपराध के लिए दोषी को 7 साल तक की कैद और जुर्माने की सजा हो सकती है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। यदि नया विवाह पहले विवाह के तथ्य को छिपाकर किया जाता है, तो सजा की अवधि 10 साल तक की कैद और जुर्माना हो सकती है. कानून में केवल दो ही अपवाद हैं, या तो पहला विवाह अदालत द्वारा शून्य घोषित कर दिया गया हो, या पहला जीवनसाथी लगातार 7 वर्षों से लापता हो.

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: ‘इंद्रा शर्मा बनाम वी.के.वी. शर्मा’

सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों से भी इस मामले की स्थिति स्पष्ट होती है: Indra Sarma vs V.K.V. Sarma केस में उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि यदि पुरुष पहले से कानूनी रूप से विवाहित है, तो किसी अन्य महिला के साथ उसका संबंध “Relationship in the nature of marriage” नहीं माना जाएगा.

Domestic Violence Act, 2005 की धारा 2 के तहत लिवइन रिलेशनशिप को कुछ सीमा तक सुरक्षा मिलती है, लेकिन शादीशुदा पुरुष के साथ रहने वाली दूसरी या तीसरी महिला को यह राहत स्वत नहीं मिलती; इसके लिए अदालत मामले के तथ्यों पर विचार करती है.

शिकायत न हो तो क्या पुलिस कार्रवाई कर सकती है?

अक्सर यह माना जाता है कि बिना शिकायत के पुलिस कार्रवाई नहीं करती, लेकिन कानूनी सच्चाई कुछ और है. हालांकि व्यवहार में द्विविवाह के मामलों में पहली पत्नी या प्रभावित परिजनों की शिकायत पर ही मामला दर्ज होता है. यदि यह मामला पुलिस या अदालत के संज्ञान में आता है और इसमें कोई गैरकानूनी या आपराधिक तथ्य पाए जाते हैं, तो राज्य प्रशासन अपनी ओर से भी न्यायसंगत कानूनी प्रक्रिया शुरू कर सकता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *