असम में रेड, केरल में ऑरेंज, कैसे तय होते हैं बारिश के रंगों वाले अलर्ट, क्या है मतलब?

असम में रेड, केरल में ऑरेंज, कैसे तय होते हैं बारिश के रंगों वाले अलर्ट, क्या है मतलब?

देश के कई हिस्से बारिश और बाढ़ से हालबेहाल हैं. मौसम विभाग लगातार अपडेट जारी कर रहा है. असम और मेघालय में बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। केरल में ऑरेंज अलर्ट का अपडेट है. वहीं, दिल्ली के लिए मौसम विभाग ने यलो अलर्ट जारी किया है. अब सवाल है कि ये अलर्ट किस आधार पर जारी किए जाते हैं, कैसे होता है इसका कैल्कुलेशन और इसका मतलब क्या है.

असम में रेड, केरल में ऑरेंज, कैसे तय होते हैं बारिश के रंगों वाले अलर्ट, क्या है मतलब?

भारतीय मौसम विभाग मौसम की गंभीरता बताने के लिए चार रंगों के अलर्ट जारी करता है. इससे पता चलता है कि इंसान को कितना अलर्ट होने की जरूरत है. अलर्ट को बताने में हरा , पीला , नारंगी और लाल रंग का इस्तेमाल किया जाता है. इसका मकसद सरकारी और आपदा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियों को सतर्क करना होता है ताकि वे समय रहते अपनी तैयारी कर लें. इसके साथ ही आम लोग भी तैयार रह सकें.

रेड, ऑरेंज, यलो और ग्रीन अलर्ट का मतलब समझें

  • ग्रीन अलर्ट: इस अलर्ट का मतलब है कि कोई परेशानी की बात नहीं है. मौसम सामान्य है और किसी भी एजेंसी को अलर्ट पर रहने की ज़रूरत नहीं. आमतौर पर इसका अलर्ट न के बराबर ही जारी किया जाता है.

    गुरुवार तक मुंबई और कोंकण में मूसलाधार बारिश की संभावना

  • यलो अलर्ट: इसकी चेतवानी तब जारी होती है जब 24 घंटे में 64.5 से 115.5 मिमी तक भारी बारिश होने की आशंका हो. यह एक तरह का वॉच अलर्ट है यानी अभी खतरा नहीं, लेकिन स्थिति बिगड़ सकती है, इसलिए अपडेट पर नजर रखें.
  • ऑरेंज अलर्ट: यह यलो अलर्ट के मुकाबले गंभीर स्थिति है. यह तब जारी होता है जब एक दिन में 115.6 से 204.4 मिमी बारिश होती है. इसका अलर्ट जारी होने पर सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है और प्रशासन को तैयार रहने के लिए कहा जाता है.

    गुजरात के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात हैं.

  • रेड अलर्ट: यह अलर्ट की सबसे गंभीर श्रेणी है. यह तब जारी होता है जब 24 घंटे की अवधि में 204.5 मिमी से अधिक बारिश होने की आशंका होती है. इस अलर्ट का मतलब है तुरंत एक्शन लेना ज़रूरी है, चाहे वह लोगों की निकासी हो या NDRF की तैनाती करना हो.

कैसे होता है बारिश का कैल्कुलेशन?

सिर्फ बारिश के आंकड़े ही तय नहीं करते कि अलर्ट किस रंग का होगा. इसमें कई फैक्टर मिलकर काम करते हैं.

  1. रडार और मॉडल डेटा: IMD के मौसम केंद्र पिछले कुछ घंटों की बारिश का रडार डेटा और अगले 2472 घंटों के लिए ग्लोबल और रीजनल फोरकास्ट मॉडल को मिलाकर यह कैल्कुलेशन किया जाता है कि कितनी बारिश हो सकती है.
  1. लोकेशन का फैक्टर: पहाड़ी और नदी बेसिन वाले राज्यों में भूस्खलन और फ्लैश फ्लड का खतरा ज़्यादा होता है. इसीलिए असममेघालय जैसे इलाकों में ब्रह्मपुत्र बेसिन के ओवरफ्लो होने के जोखिम को देखते हुए, कई बार सामान्य बारिश पर भी मैदानी इलाकों की तुलना में ज्यादा गंभीर अलर्ट जारी होता है.
  1. अलगअलग समय के अलर्ट: अलर्ट अलगअलग समयसीमा के लिए जारी होते हैं. जैसे अगले 24 घंटे, 48 घंटे या 72 घंटे. शॉर्टटर्म पूर्वानुमान ज्यादा सटीक होता है, इसलिए इसमें बदलाव की गुंजाइश कम होती है.
  1. पिछले बारिश के आंकड़ों के आधार पर: कई बार लगातार कुछ दिनों की बारिश के आंकड़े जोड़कर भी अलर्ट अपडेट किया जाता है, खासकर जब मिट्टी पहले से ही पानी सोख चुकी हो और बाढ़ का खतरा बढ़ गया हो.

असम बाढ़. फोटो: PTI

असममेघालय रेड बनाम केरल ऑरेंज, फर्क क्यों?

मौजूदा स्थिति में असममेघालय के लिए रेड अलर्ट जारी होने का मतलब है कि वहां 204.5 मिमी या उससे अधिक बारिश की आशंका है, साथ ही भूस्खलन और बाढ़ जैसी स्थितियों का जोखिम भी शामिल है. वहीं केरल में ऑरेंज अलर्ट यह दिखाता है कि बारिश गंभीर तो है, लेकिन 115204 मिमी की रेंज में है. सतर्क रहने की जरूरत है, पर एक्सट्रीम इमरजेंसी लेवल अभी नहीं.

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कितनी सावधानी बरतें?

  • यलो अलर्ट में मौसम अपडेट पर नजर रखें और यात्रा की प्लानिंग सोचसमझकर करें.
  • रेंज अलर्ट में गैरजरूरी यात्रा टालें और ऐसे निचले इलाकों से दूर रहें जहां पानी भरने का खतरा ज्यादा हो.
  • रेड अलर्ट में प्रशासन के निर्देशों का तुरंत पालन करें और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित जगह पर शिफ्ट हों.
  • IMD का यह कलरकोड सिस्टम सिर्फ आम जनता के लिए नहीं, बल्कि NDRF, राज्य आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन के लिए भी एक स्टैंडर्ड “एक्शन ट्रिगर” का काम करता है, ताकि हर एजेंसी बिना देरी किए अपनी भूमिका निभा सके.

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