आर्मी हेलीकॉप्टर से दिल्ली लाई गई किडनी, दूसरा डुअल ट्रांसप्लांट हुआ सफल

आर्मी हेलीकॉप्टर से दिल्ली लाई गई किडनी, दूसरा डुअल ट्रांसप्लांट हुआ सफल

एम्स के सर्जरी डिपार्टमेंट ने नेफ्रोलॉजी, एनेस्थीसिया, ट्रांसप्लांट इम्यूनोलॉजी विभागों और अंग प्रत्यारोपण बैंकिंग संगठन ORBO के सहयोग से 28 जुलाई 2026 को एक मार्जिनल डोनर से दूसरा डुअल किडनी ट्रांसप्लांट सही तरीके से पूरा हुआ. किडनी डोनेट करने वाली महिला की उम्र 70 साल है और वह चंडीगढ़ की रहने वाली थीं. महिला की किडनी को कमांड अस्पताल, चंडी मंदिर से एम्स दिल्ली लाया गया.

ज्यादा उम्र और मार्जिनल डोनर की सिचुएशन को देखते हुए एक बेहतर प्लान के तहत दोनों किडनी एक ही प्राप्तकर्ता में ट्रांसप्लांट की गईं. चौंका देने वाली बात है कि दोनों किडनी को हेलीकॉप्टर की मदद से दिल्ली लाया गया.

करीब 12 घंटे के कोल्ड इस्कीमिया समय के बावजूद ट्रांस्प्लांट दोनों किडनी ने सर्जरी के तुरंत बाद काम करना शुरू कर दिया. ये मेडिकल की लाइन में एक बेहतरीन मिसाल साबित हो सकता है.

डुअल किनडी ट्रांसप्लांट प्रोसेस

दरअसल, जिस महिला को किडनी लगाई गई उसकी उम्र 56 वर्षीय साल थी. डुअल किडनी ट्रांसप्लांट प्रक्रिया के तहत दोनों किडनी को प्राप्तकर्ता के दाहिने हिस्से में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया. मरीज की रिकवरी बिना किसी समस्या के हुई और सामान्य किडनी कार्य के साथ 10 दिन बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई. यह अंग प्रत्यार्पण आर्मी रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल, नई दिल्ली की मदद और एम्स के निदेशक प्रो. निखिल टंडन की देखरेख में संभव हो पाया.

पूरी प्रक्रिया के दौरान अंग प्राप्ति, परिवहन और प्रत्यारोपण के सुचारू समन्वय में ORBO, AIIMS नई दिल्ली के ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर श्री बलराम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसमें शल्य चिकित्सा टीम को लीड प्रो. असुरि कृष्णा, डॉ. सुशांत, डॉ. आदित्य बक्शी, डॉ. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। बृजेश कुमार सिंह, डॉ. मोहित संगाडे ने किया. एनेस्थीसिया टीम में विभागाध्यक्ष प्रो. विमी रेवाड़ी के नेतृत्व में डॉ. हेना शामिल थे. इसके अलावा नेफ्रोलॉजी टीम भी शामिल रही उसका हिस्सा प्रो. भौमिक, प्रो. महाजन, डॉ. सचिन थे.

क्या है इसका महत्व

चयनित मार्जिनल डोनर से डुअल किडनी ट्रांसप्लांट मृत दाता अंगों के उपयोग को बढ़ाने की एक महत्वपूर्ण रणनीति है. ऐसे मामलों में दोनों किडनी को एक ही प्राप्तकर्ता में लगाने से पर्याप्त गुर्दे का कार्य मिल सकता है और साथ ही ऐसे अंगों का उपयोग संभव हो पाता है जिन्हें डोनर की उम्र या अन्य कारणों से अस्वीकार किया जा सकता था.

एम्स दिल्ली की यह उपलब्धि अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में उन्नति, मार्जिनल डोनर अंगों के अधिकतम उपयोग और एंडस्टेज किडनी रोग से पीड़ित रोगियों के लिए जीवन रक्षक किडनी प्रत्यारोपण तक पहुंच बढ़ाने की संस्था की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है.

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