इंडियन इकोनॉमी को खोखला कर रही ‘जंग’! देश को हर साल लग रहा ₹14 लाख करोड़ का चूना

इंडियन इकोनॉमी को खोखला कर रही ‘जंग’! देश को हर साल लग रहा ₹14 लाख करोड़ का चूना

देश के इंफ्रा पर लगने वाली जंग यानी रस्ट देश की इकोनॉमी को खोखला कर रही है. रिपोर्ट के अनुसार इस जंग की वजह से देश की इकोनॉमी को हर साल कई लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है. नोमुरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत को हर साल जंग से होने वाले नुकसान के कारण अनुमानित 14 लाख करोड़ रुपए यानी GDP का 4.3 फीसदी नुकसान होता है. पुल, हाईवे, रेलवे, पोर्ट, बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर, इमारतें और औद्योगिक संपत्तियां समय से पहले खराब हो जाती हैं. ईटी की रिपोर्ट के अनुसार नाूमुरा की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि इसका सबसे बड़ा असर बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन सेक्टर पर पड़ता है, इसके बाद टेलीकॉम, ऑटोमोटिव, इंफ्रास्ट्रक्चर और रेलवे का नंबर आता है.

इंडियन इकोनॉमी को खोखला कर रही ‘जंग’! देश को हर साल लग रहा ₹14 लाख करोड़ का चूना

बचाव बढ़ा सकते हैं 1.5 फीसदी तक जीडीपी

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में जंग से होने वाला औसत से अधिक खर्च और जंग लगने का अधिक खतरा एक बढ़ते मैक्रोइकोनॉमिक जोखिम को उजागर करता है, जिसका भविष्य में GDP पर काफी नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है. इसमें यह भी कहा गया है कि जंग से बचाव के प्रभावी उपाय GDP को 1.5 फीसदी तक बढ़ा सकते हैं. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जंग लगने से इंफ्रास्ट्रक्चर के रखरखाव और उसे बदलने पर सरकारी खर्च बढ़ता है, नेशनल असेट्स की उत्पादकता कम होती है, सरकारी खजाने पर बोझ पड़ता है और सार्वजनिक सुरक्षा, स्थिरता और संसाधनों की दक्षता प्रभावित होती है. रिपोर्ट में सालाना नुकसान को GDP का 4.3% बताया गया है और कहा गया है कि ग्लोबल स्टैंडर्ड के अनुरूप चलना बहुत ज़रूरी है.

क्या कहते हैं आंकड़े

सेक्टर सेक्टोरल जंग की कॉस्ट सेक्टर के GDP पर असर
इंफ्रास्ट्रक्चर 1,41,657 2.9
रेलवे 23,788 2.8
टेलीकॉम 38,320 3.8
पावर 53,860 10.1
ऑटोमोटिव 87,098 3
अन्य 10,70,118 4.7
कुल 14,14,840 4.3

अमेरिका और जापान से तुलना

अमेरिका और जापान का उदाहरण देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि कई विकसित देश पर्यावरण के संपर्क के आधार पर इंफ्रास्ट्रक्चर को कैटेगराइज करते हैं और जंग से बचाव के उपाय बताते हैं. इसके विपरीत, भारत अलगअलग जलवायु परिस्थितियों में भी काफी हद तक एक जैसे ही नियम अपनाता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह मॉनसून के दौरान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जब नमी और खारेपन वाली स्थितियां इंफ्रास्ट्रक्चर के खराब होने के प्रोसेस को तेज कर देती हैं. इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती और सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए जंग से बचाव के अनिवार्य उपाय, नियमों को सख्ती से लागू करने और पालन सुनिश्चित करने, तथा अधिक जागरूकता की सिफारिश की गई है. इसमें कहा गया है कि भारत में लंबे समय तक चलने वाली संपत्तियों की मजबूती के लिए सर्वोत्तम तरीकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए भारतीय स्टैंडर्ड को ग्लोबल स्टैडर्ड के अनुरूप बनाना बहुत जरूरी है.

BIS के नियम

हालांकि ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स के नियम जंग से बचाव को अनिवार्य बनाते हैं और इनहिबिटर व कोटिंग जैसे तरीकों का उल्लेख करते हैं, लेकिन वे यह नहीं बताते कि स्पेसिफिक परिस्थितियों में किन तकनीकों जैसे जिंक कोटिंग, एपॉक्सी कोटिंग, हॉटडिप गैल्वनाइजेशन या वेदरिंग स्टील का उपयोग किया जाना चाहिए. इससे ठेकेदारों को केवल न्यूनतम आवश्यकताओं को अपनाने की छूट मिल जाती है. खासकर जंग लगने की आशंका वाले और अधिक ट्रैफिक वाले इलाकों में सड़कें और पुल पानी, प्रदूषण और भारी भार के संपर्क में आते हैं, जिससे उनके खराब होने की गति तेज हो जाती है.

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