Quick Samachar: मंगलवार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा को Google LLC और दूसरी संस्थाओं के खिलाफ केस करने की इजाजत दे दी है। यह केस उनके पर्सनैलिटी राइट्, कॉपीराइट के उल्लंघन और AIजनरेटेड डीपफेक वीडियो व अन्य छेड़छाड़ किए गए डिजिटल कंटेंट के जरिए उनकी गुडविल को नुकसान पहुंचाने के मामले में है।

चूंकि कई आरोपी प्लेटफॉर्म मुंबई के बाहर स्थित हैं और कथित ऑनलाइन गतिविधियां मुंबई के अंदर और बाहर दोनों जगह हुईं, इसलिए उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में अपना केस दायर करने की अनुमति मांगी। ऐसे में अब प्रीति बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाली लेटेस्ट सेलिब्रिटी बन गई हैं, जो पर्सनैलिटी राइट्स से जुड़ी राहत चाहती हैं।

पिछले दो सालों में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कार्तिक आर्यन, शत्रुघ्न सिन्हा, शिल्पा शेट्टी, अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी जैसे एक्टर्स के साथसाथ दिवंगत दिग्गज सिंगर आशा भोसले और सिंगर अरिजीत सिंह को भी राहत दी।

16 जून को प्रीति जिंटा की तरफ से वकील रोहन कदम ने जस्टिस अभय आहूजा की सिंगलजज बेंच के सामने दलील दी कि मेटा प्लेटफॉर्म्स और दूसरी वेबसाइट्स समेत प्रतिवादियों ने डीपफेक वीडियो, मीम्स, बदली हुई तस्वीरें, AIजनरेटेड चैटबॉट पर्सोना और दूसरे डिजिटल कंटेंट बनाए, अपलोड किए और फैलाए। उन्होंने इन्हें अलगअलग प्लेटफॉर्म पर आम जनता के लिए उपलब्ध कराया, जिससे उनके अधिकारों का उल्लंघन हुआ।

जस्टिस अभय आहूजा ने लेटर्स पेटेंट के क्लॉज XII के तहत अभिनेत्री की लीव पिटीशन मंजूर कर ली। यह एक प्रोसीजरल जरूरत है जब केस का कुछ हिस्सा कोर्ट के इलाके के अधिकार क्षेत्र से बाहर हो। इस ऑर्डर से प्रीति को बॉम्बे हाईकोर्ट के ओरिजिनल साइड पर गूगल LLC और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और वेबसाइट समेत कई दूसरी एंटिटी के खिलाफ एक बड़ा सिविल केस करने का हक मिल गया है।

प्रीति ने आरोप लगाया है कि डिफेंडेंट, जिसमें मेटा प्लेटफॉर्म और कई वेबसाइट शामिल हैं। उन्होंने उनके पर्सोना का इस्तेमाल करके AI से बने डीपफेक वीडियो, मीम, मैनिपुलेटेड इमेज, चैटबॉट पर्सोना और दूसरा डिजिटल कंटेंट बनाया, अपलोड किया और फैलाया। उनका कहना है कि ये काम उनके पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन, कॉपीराइट का उल्लंघन, बहुत ज़्यादा गुडविल और रेप्युटेशन का नुकसान और कॉपीराइट एक्ट, 1957 के सेक्शन 62 के तहत उनके नैतिक अधिकारों का उल्लंघन है।