देश में E20 को लेकर सोशल मीडिया पर बहस चल रही है. लोग कह रहे हैं इससे गाड़ियों को नुकसान हो रहा है, वहीं सरकार और वाहन कंपनियां कर रही हैं इससे सिर्फ माइलेज पर फर्फ पड़ता है बाकी सब ठीक है. कंपनियों का कहना है कि E20 से माइलेज थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन यह भी चलाने के तरीके और परिस्थितियों पर निर्भर करता है. इस सबसे अलग आज जानते हैं कि कोई कार सबसे ज्यादा माइलेज कब देती है?

माइलेज कम होने की सबसे बड़ी वजहें
तेज रफ्तार में गाड़ी चलाना
अगर आप कार को लगातार 100 किमी/घंटा या उससे ज्यादा की रफ्तार पर चलाते हैं, तो इंजन को ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है. इसके अलावा तेज स्पीड पर हवा का दबाव भी बढ़ जाता है. इन दोनों वजहों से ईंधन की खपत बढ़ती है और माइलेज कम हो जाता है.
गलत गियर में ड्राइविंग
कम स्पीड पर ऊंचे गियर या ज्यादा स्पीड पर निचले गियर में गाड़ी चलाने से इंजन पर ज्यादा दबाव पड़ता है. इसका सीधा असर माइलेज पर पड़ता है. इसलिए हमेशा स्पीड के हिसाब से सही गियर का इस्तेमाल करें.
बारबार ब्रेक और एक्सीलरेटर दबाना
अचानक तेज एक्सीलरेशन करना और फिर बारबार ब्रेक लगाना ईंधन की सबसे ज्यादा बर्बादी करता है. स्मूद और एक जैसी रफ्तार में गाड़ी चलाने से बेहतर माइलेज मिलता है.
कार चलाने की सही रफ्तार क्या है?
अगर आपका मकसद बेहतर माइलेज पाना है, तो 70 से 90 किमी/घंटा की स्पीड सबसे बेहतर मानी जाती है. हाईवे पर 7080 किमी/घंटा की रफ्तार में टॉप गियर में गाड़ी चलाने से इंजन पर कम दबाव पड़ता है और ईंधन की खपत भी कम होती है. वहीं शहर में ट्रैफिक की वजह से इतनी स्पीड संभव नहीं होती. ऐसे में 4050 किमी/घंटा की रफ्तार बनाए रखने, बारबार ब्रेक लगाने और अचानक एक्सीलरेटर दबाने से बचने पर माइलेज बेहतर मिलता है.