कॉकपिट में कहां से आई कुल्हाड़ी, विमान में दो पायलट कैसे बिठाते हैं तालमेल? फ्लाईदुबई मामले में उठा सवाल​

कॉकपिट में कहां से आई कुल्हाड़ी, विमान में दो पायलट कैसे बिठाते हैं तालमेल? फ्लाईदुबई मामले में उठा सवाल​

दुबई से इजराइल के तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई फ्लाइट को हाईजैक करने की कोशिश हुई. कोपायलट ने साथी भारतीय पायलट कैप्टन स्मित पर हमला किया. इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक इंटरव्यू में दावा किया है कि भारतीय पायलट पर कोपायलट ने कुल्हाड़ी से हमला किया था.

हालांकि इस पूरे मामले में फ्लाईदुबई का कहना है कि घटना का कारण और पूरी परिस्थितियों की जांच की जा रही है, लेकिन इसको लेकर निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी. अब सवाल उठता है कि कॉकपिट में कुल्हाड़ी का क्या काम है, कॉकपिट में दो पायलट क्यों होते हैं, क्या करते हैं और कैसे तालमेल बिठाते हैं?

कॉकपिट में कुल्हाड़ी का क्या काम? पहले इसे समझें

कॉकपिट में रखी कुल्हाड़ी को क्रैश एक्स या फायर एक्स कहते हैं. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इसका इस्तेमाल किसी हमले के लिए नहीं, इमरजेंसी में बचाव के लिए होता है. यह कई तरह से काम में आती है.

  • जाम हुए रास्ते खोलने में: हादसे में विमान का ढांचा मुड़ जाए, दरवाजा या कोई पैनल अटक जाए, तो उसे काटकर या तोड़कर निकलने का रास्ता बनाया जा सकता है.
  • आग बुझाने में: पैनल या अंदर की दीवार के पीछे आग या धुआं हो तो कुल्हाड़ी से पैनल तोड़कर उस जगह तक पहुंचा जा सकता है.
  • क्रैश के बाद निकलने में: अगर कॉकपिट की खिड़की या दरवाजा जाम हो जाए, तो उसे तोड़कर बाहर निकलने में मदद मिलती है.

क्रैश एक्स.

कहां रखी होती है?

आम तौर पर यह कॉकपिट में पायलट की सीट के पास या पीछे किसी तय जगह पर रखी जाती है, ताकि हादसे के समय तुरंत हाथ आ सके. ज्यादातर बड़े यात्री विमानों में यह होती है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय और कई देशों के नियमों में इसे आपात उपकरण माना जाता है. किस विमान में कितनी और कहां होगी, यह मॉडल और एयरलाइन पर निर्भर करता है.

विमान के कॉकपिट में दो पायलट क्यों?

बड़े यात्री विमानों में एक कैप्टन और एक फर्स्ट ऑफिसर होता है. इसका मकसद है कि कोई एक गलती करे या बीमार पड़ जाए, तो दूसरा संभाल ले. हालांकि काम बंटा रहता है.

मेन कैप्टन यानी पायलट फ्लाइंग, विमान को उड़ाता है और दूसरा पायलट मॉनिटरिंग होता है जो रेडियो, चेकलिस्ट और इंस्ट्रूमेंट्स पर नजर रखता है और पायलट फ्लाइंग की निगरानी करता है.

कॉकपिट में दोनों पायलट का काम बंटा होता है. फोटो: Pexels

दोनों की भूमिकाएं उड़ान के दौरान आपस में बदली भी जाती हैं. उड़ान का हर अहम फैसला बोलकर बताया जाता है और दूसरा उसकी पुष्टि करता है, जिसे क्रॉसचेकिंग कहते हैं. एक पायलट अचानक काम करना बंद कर दे तो दूसरा विमान अपने हाथ में ले लेता है और जरूरत पड़ने पर इमरजेंसी लैंडिंग करता है. अंतिम अधिकार कैप्टन के पास रहता है. इसी को पायलट इन कमांड का अधिकार कहते हैं.

टूपर्सन रूल का मकसद यह है कि कोई एक व्यक्ति अकेले विमान को नुकसान न पहुंचा सके. फोटो: Pexels

टूपर्सन रूल क्या है?

नियम कहता है, कॉकपिट में हर समय कम से कम दो अधिकृत लोग मौजूद रहने चाहिए. अगर एक पायलट वॉशरूम या किसी और काम से बाहर जाता है, तो उसकी जगह कोई केबिन क्रू सदस्य कॉकपिट में आकर बैठता है या खड़ा रहता है. जब तक पायलट वापस नहीं आता, यह क्रू सदस्य अंदर ही रहता है.

टूपर्सन रूल का मकसद यह है कि कोई एक व्यक्ति अकेले विमान को नुकसान न पहुंचा सके, लेकिन यह हर खतरे को नहीं रोक सकता. अगर कॉकपिट में पहले से मौजूद दोनों पायलटों में से कोई एक दूसरे पर हमला करे, तो नियम अपने आप में कुछ नहीं कर पाता. उस स्थिति में बचाव दरवाजे के बाहर के क्रू और यात्रियों की मदद पर निर्भर करता है.

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