भारत की बड़ी कंपनियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है, लेकिन सीनियर लीडरशिप यानी CEO और MD जैसे बड़े पदों पर महिलाओं की संख्या अभी भी काफी कम है. कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की ओर से लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, देश की टॉप 500 लिस्टेड कंपनियों में सिर्फ 9 महिलाएं CEO और 25 महिलाएं MD के पद पर हैं.

यह आंकड़ा कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में दिया. यह जानकारी MCA21 डेटाबेस में दर्ज उन 500 कंपनियों के आंकड़ों पर आधारित है, जिन्हें टर्नओवर के हिसाब से देश की सबसे बड़ी लिस्टेड कंपनियां माना गया है.
टॉप कंपनियों में 860 महिला डायरेक्टर
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश की टॉप 500 लिस्टेड कंपनियों के बोर्ड में कुल 860 महिलाएं डायरेक्टर या बोर्ड मेंबर के तौर पर शामिल हैं. इनमें 18 एडिशनल डायरेक्टर, 738 डायरेक्टर, 25 मैनेजिंग डायरेक्टर, 12 नॉमिनी डायरेक्टर और 67 होलटाइम डायरेक्टर शामिल हैं. हालांकि, CEO और CFO जैसे अहम पदों पर महिलाओं की संख्या और भी कम है. इन 500 कंपनियों में सिर्फ 9 महिला CEO और 22 महिला CFO हैं. इससे साफ है कि बोर्ड में महिलाओं की मौजूदगी होने के बावजूद कंपनी के सबसे बड़े फैसले लेने वाले पदों तक महिलाओं की पहुंच अभी सीमित है.
पूरे कॉरपोरेट सेक्टर में तस्वीर थोड़ी बेहतर
अगर देश की सभी एक्टिव कंपनियों को देखें तो महिलाओं की संख्या काफी ज्यादा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में करीब 39 लाख डायरेक्टर हैं. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इनमें लगभग 11.6 लाख महिलाएं हैं. भारत में इस समय करीब 21.4 लाख एक्टिव कंपनियां और 5.06 लाख एक्टिव लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप यानी LLP हैं. पिछले 10 साल में करीब 15.5 लाख कंपनियां रजिस्टर्ड हुई हैं. यानी पूरे कॉरपोरेट सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, लेकिन सबसे बड़ी कंपनियों के टॉप मैनेजमेंट में अभी भी उनकी संख्या कम है.
कई बड़ी कंपनियों में महिलाएं संभाल रहीं नेतृत्व
भारत में कुछ बड़ी कंपनियों की कमान महिलाएं संभाल रही हैं. इनमें एचडीएफसी लाइफ की विभा पदालकर, आदित्य बिड़ला कैपिटल की विशाखा मुल्ये और हिंदुस्तान यूनिलीवर की प्रिया नायर जैसे नाम शामिल हैं. इसके अलावा मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया की प्रवीणा राय, जो पहले एनपीसीआई की सीईओ रह चुकी हैं, कोलगेटपामोलिव इंडिया की प्रभा नरसिम्हन और गोडिजिट जनरल इंश्योरेंस की जसलीन कोहली भी प्रमुख महिला लीडर्स में शामिल हैं.
महिलाओं की तरक्की में रुकावटों का अलग से आकलन नहीं
सरकार ने यह भी बताया कि महिला डायरेक्टरों को सीनियर पदों तक पहुंचने में किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है, इसका कोई अलग से आकलन MCA ने नहीं किया है. सरकार के मुताबिक, मौजूदा कानून में कुछ कंपनियों के लिए कम से कम एक महिला डायरेक्टर रखना जरूरी है. फिलहाल सरकार ने महिलाओं की कॉरपोरेट लीडरशिप बढ़ाने के लिए कोई नया टारगेट, इंसेंटिव या नई नीति लाने पर विचार नहीं किया है.
नियम तोड़ने वाली कंपनियों पर जुर्माना
महिला डायरेक्टर नियुक्त करने के नियम का पालन नहीं करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई भी हुई है. वित्त वर्ष 202122 से 202526 के बीच रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज ने 50 मामलों में आदेश जारी किए. इन मामलों में कुल ₹71.01 लाख का जुर्माना लगाया गया. 202122 में ऐसे सिर्फ 2 मामले थे. 202223 में यह संख्या 10 और 202324 में बढ़कर 19 हो गई. इसके बाद 202425 में 11 और 202526 में 8 मामले सामने आए.