‘कोई अगर दर्द में है, तो उसकी बात सुनना हमारी जिम्मेदारी’, मंगलसूत्र उतार गुहार लगाने वाली महिला पर CJI ने क्या कहा?

‘कोई अगर दर्द में है, तो उसकी बात सुनना हमारी जिम्मेदारी’, मंगलसूत्र उतार गुहार लगाने वाली महिला पर CJI ने क्या कहा?

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान सोमवार को कुछ ऐसा हुआ था, जिसने सभी को दंग कर दिया था. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुआई वाली पीठ के सामने एक महिला ने अपना मंगलसूत्र निकाल दिया था और अपने मामले की पहले सुनवाई के लिए गुहार लगाने. इस घटना ने वहां पर मौजूद लोगों को दंग कर दिया. अब इस पूरे मामले पर सीजेआई की प्रतिक्रिया सामने आई है.

‘कोई अगर दर्द में है, तो उसकी बात सुनना हमारी जिम्मेदारी’, मंगलसूत्र उतार गुहार लगाने वाली महिला पर CJI ने क्या कहा?

दरअसल, सोमवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ के सामने एत महिला ने अपना मंगलसूत्र निकालते हुए दावा किया कि वह हैदराबाद से आई है और उसके केस को सुना जाना चाहिए. इसपर सीजेआई की ओर से कहा गया था कि अगले सोमवार को आपका मामला सुना जाएगा. यह मामला एक स्पेशल बेंच को सुनना है. आप ऐसा कीजिए मत आइएगा.

सीजेआई ने दी ये प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर मंगलवार को सीजेआई सूर्यकांत की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने कहा कि अगर कोई महिला अपना दर्द और तकलीफ बताती है, तो उसकी बात सुनना हमारी जिम्मेदारी है. अगर कोई अपनी शिकायतें लेकर कोर्ट आता है, तो निश्चित रूप से उनकी बात सुनी जानी चाहिए.

उन्होंने कहा कि कोर्ट तो कोर्ट है, ऐसे में हम हर व्यक्ति का सम्मान करते हैं, मैंने कल भी यही बात कही थी: हमारे सभी संवैधानिक संस्थानों का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है. किसी को भी अपने आचरण से मिले मौक़े का गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

अब जानिए क्या था पूरा मामला
सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ सोमवार को किसी मामले की सुनवाई कर रही थी. इसी दौरान एक महिला कोर्टरूम में खड़ी हो गई और उसने सीजेआई के सामने गुहार लगानी शुरू कर दी. महिला ने कहा कि वह हैदराबाद से आई है और उसका केस सुना जाना चाहिए, इस पर सीजेआई ने कहा कि उसके मामले की सुनवाई स्पेशल बेंच करेगी, जिसके लिए अगले सोमवार की तारीख निर्धारित है.

सीजेआई ने की ऑनलाइन जुड़ने की अपील
इतना ही नहीं सीजेआई की ओर से कहा गया कि सुनवाई में शामिल होने के लिए महिला को दिल्ली आने की जरूरत नहीं है. महिला ऑनलाइन माध्यम से सुनवाई में जुड़ सकती है, लेकिन महिला ने कहा कि वह ऑनलाइन नहीं जुड़ेगी वह खुद अपना पक्ष कोर्ट में रखेगी.

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