क्या सगे और सौतेले दोनों बेटों से मां को मिल सकता है गुजारा भत्ता? कोर्ट ने सुनाया ये फैसला

क्या सगे और सौतेले दोनों बेटों से मां को मिल सकता है गुजारा भत्ता? कोर्ट ने सुनाया ये फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर किसी मां को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत उसके सगे बेटे से भरणपोषण मिल रहा है तो वो बाद में अपने सौतेले बेटे से भी भरणपोषण की मांग नहीं कर सकती. इस टिप्पणी के साथ ही कोर्ट ने एक महिला द्वारा दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया. आइये जानते हैं क्या है पूरा मामला.

क्या सगे और सौतेले दोनों बेटों से मां को मिल सकता है गुजारा भत्ता? कोर्ट ने सुनाया ये फैसला

दरअसल यह मामला एक महिला की तरफ से दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका से जुड़ा था. फैमिली कोर्ट ने पिछले साल 15 मई 2025 को महिला के सगे बेटे को अपनी मां को हर महीने 8,000 रुपए भरणपोषण देने का आदेश दिया था. हालांकि महिला इस फैसले से संतुष्ट नहीं थी. इसके बाद महिला ने हाईकोर्ट का रुख किया. उसने तर्क दिया कि उसके सौतेले बेटे को भी भरणपोषण देने के लिए समान रूप से जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए,क्यों कि वो भी उसके दिवंगत पति का बेटा है.

कोर्ट ने क्या कहा

वहीं मंगलवार को पारित आदेश में जस्टिस लक्ष्मी कांत शुक्ला ने कहा कि सगे बेटे से गुजारा भत्ता मिलने के बाद मां को अपना भरणपोषण करने में अक्षम नहीं माना जा सकता, ऐसे में वो किसी अन्य व्यक्ति से गुजारा भत्ता पाने की पात्र नहीं रह जाती. हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी व्यक्ति के भरणपोषण का दायित्व दो या अधिक व्यक्तियों पर है और वो कोर्ट का दरवाजा खटखटाता है, तो यह कोर्ट का दायित्व होगा कि वो परिस्थितियों के मुताबिक तय करे कि किससे और कितनी राशि गुजारा भत्ते के रूप में दिलाई जाए.

आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज

इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने एक महिला की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी. महिला ने फैमिली कोर्ट के आदेश में संशोधन करने का अनुरोध करते हुए अपने सौतेले बेटे से भी गुजारा भत्ता दिलाने की प्रार्थना की थी. फैमिली कोर्ट ने महिला के सगे बेटे को प्रति माह 8,000 रुपए गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था.

महिला की दलील

महिला का कहना था कि फैमिली कोर्ट ने जल्दबाजी में गुजारा भत्ते की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ उसके सगे बेटे पर डाल दी और सौतेले बेटे को इस दायित्व से मुक्त कर दिया. कोर्ट में महिला के वकील ने दलील दी कि दोनों बेटों को गुजारा भत्ता देने के लिए उत्तरदायी ठहराया जाना चाहिए था.

सौतेले बेटे ने किया विरोध

याचिका का विरोध करते हुए राज्य सरकार और सौतेले बेटे की ओर से कहा गया कि जब महिला का सगा बेटा मौजूद है और उसे गुजारा भत्ता देने का आदेश पहले ही दिया जा चुका है, तब सौतेले बेटे को इस दायित्व के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता. सौतेले बेटे ने तर्क दिया कि जहां महिला का सगा बेटा जिसके पास पर्याप्त साधन हैं पहले से ही उनका भरणपोषण कर रहा है, ऐसे में सौतेले बेटे पर वही दायित्व थोपने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है.

महिला की याचिका में कोई कानूनी योग्यता न पाते हुए हाईकोर्ट ने माना कि पुनरीक्षण याचिका बिना किसी ठोस कानूनी आधार के दायर की गई थी और इसका उद्देश्य केवल सौतेले बेटे को परेशान करना था.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *