
रामनगर/बाराबंकी, अमृत विचार: खरीफ सीजन के बीच खाद संकट से जूझ रहे किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक ओर सरकारी समितियों पर खाद के लिए लंबी कतारें लग रही हैं, तो दूसरी ओर निजी उर्वरक विक्रेता किसानों से निर्धारित दरों से अधिक कीमत वसूलकर उनकी जेब पर खुला डाका डाल रहे हैं। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह के निर्देश पर एसडीएम आकांक्षा गुप्ता और नोडल अधिकारी एडीओ कृषि डॉ. दलबीर सिंह के नेतृत्व में निजी खाद दुकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। अभियान के दौरान कई दुकानों के लाइसेंस निरस्त किए गए हैं, गोदाम सील किए गए हैं और संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज कराए गए हैं।
हालांकि प्रशासन की इस कार्रवाई के बीच क्षेत्र में एक नई चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। स्थानीय स्तर पर यह बात आम है कि जैसे ही किसी निजी खाद विक्रेता पर कार्रवाई की नौबत आती है, कुछ प्रभावशाली राजनीतिक चेहरे उसकी पैरवी में सक्रिय हो जाते हैं। किसानों का आरोप है कि जिन लोगों पर कालाबाजारी के गंभीर आरोप हैं, उन्हें राजनीतिक संरक्षण देने की कोशिश की जा रही है, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई का असर कमजोर पड़ रहा है।
सूत्रों की मानें तो अधिकारियों पर कार्रवाई के दौरान सिफारिशों का दबाव भी बनाया जाता है। कुछ अधिकारी भी दबी जुबान में स्वीकार करते हैं कि प्रभावशाली लोगों की पैरवी के कारण कई बार दोषियों पर अपेक्षित कठोर कार्रवाई नहीं हो पाती। ऐसे में खाद की कालाबाजारी पर पूरी तरह अंकुश लगाने की प्रशासनिक कोशिशों को झटका लगता है।
किसानों का कहना है कि जब प्रशासन खुद कालाबाजारी के खिलाफ अभियान चला रहा है तो कार्रवाई के दौरान सिफारिशों का सिलसिला आखिर क्यों शुरू हो जाता है। उनका कहना है कि यदि दोषी दुकानदारों पर बिना किसी राजनीतिक या बाहरी दबाव के निष्पक्ष कार्रवाई की जाए, तो किसानों को महंगे दामों पर खाद खरीदने की मजबूरी से राहत मिल सकती है।
क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि यदि किसानों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया और खाद की कालाबाजारी करने वालों को राजनीतिक संरक्षण मिलता रहा, तो इसका असर आने वाले चुनावों में भी दिखाई दे सकता है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि खाद माफिया और उन्हें संरक्षण देने वालों के खिलाफ भी निष्पक्ष एवं कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि किसानों को समय पर उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध हो सके और कालाबाजारी पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।