
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में गोशालाओं के वर्तमान आवंटियों के आवंटन निरस्तीकरण से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न उठा। न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि वे किस वैधानिक अधिकार के आधार पर आवंटन निरस्तीकरण को चुनौती दे रहे हैं, जबकि संबंधित शासनादेश में स्पष्ट प्रावधान है कि शिकायत प्राप्त होने पर सक्षम प्राधिकारी आवंटन निरस्त कर सकता है।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति आलोक माथुर एवं न्यायमूर्ति अमिताभ राय की खंडपीठ ने शोभा गुप्ता बनाम उत्तर प्रदेश राज्य वाद की सुनवाई के दौरान की। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं से उक्त प्रश्न का संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत करने को कहा तथा मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को निर्धारित की।
मामले में गोशालाओं के वर्तमान आवंटियों द्वारा अपने आवंटन के निरस्तीकरण को चुनौती दी गई है। न्यायालय की उक्त टिप्पणी के बाद अब अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होने की संभावना है कि याचिकाकर्ताओं को ऐसे निरस्तीकरण आदेश को चुनौती देने का वैधानिक अधिकार प्राप्त है या नहीं।