अपना घर बनाने का सपना हर किसी का होता है, खासकर छोटे शहरों या ग्रामीण इलाकों में रहने वाले आम लोगों का. अब इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया बड़ी मदद करने जा रहा है. केंद्रीय बैंक ने ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए कर्ज बांटने और जोखिम प्रबंधन के नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है. इस नए ड्राफ्ट के लागू होने के बाद, ग्रामीण बैंकों के ग्राहक पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा रकम का हाउसिंग लोन ले सकेंगे.

5 अगस्त को अपनी नीतिगत घोषणाओं के बाद, RBI ने 6 अगस्त को जनता की राय जानने के लिए दो नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं. इस कदम का सीधा असर उन लाखों ग्राहकों पर पड़ेगा जो अपने इलाके के कोऑपरेटिव बैंक से जुड़कर घर बनाने की तैयारी कर रहे हैं.
होम लोन की लिमिट में शानदार इजाफा
अगर आप किसी ग्रामीण सहकारी बैंक के ग्राहक हैं, तो आपके लिए सबसे अहम बदलाव होम लोन की रकम से जुड़ा है. नए प्रस्ताव के मुताबिक, बैंकों की हैसियत यानी उनके पास मौजूद जमा रकम के आधार पर ग्राहकों को मिलने वाले लोन की सीमा तय कर दी गई है. ऐसे बड़े बैंक जिनके पास 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की जमा राशि है, वे अब एक ग्राहक को 3 करोड़ रुपये तक का होम लोन दे सकेंगे. वहीं, 1,000 करोड़ से 10,000 करोड़ रुपये की जमा राशि वाले बैंक 2 करोड़ रुपये तक का कर्ज बांट पाएंगे. अगर आपके इलाके के बैंक की जमा राशि 100 करोड़ से 1,000 करोड़ के बीच है, तो वहां से 1.4 करोड़ रुपये तक का लोन मिल सकेगा. सबसे छोटे बैंकों के लिए यह लिमिट 60 लाख रुपये रखी गई है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इससे आम आदमी को अपनी जरूरत के हिसाब से पर्याप्त फंड जुटाने में बड़ी आसानी होगी.
कर्ज चुकाने के लिए मिलेगी ज्यादा मोहलत
सिर्फ लोन की रकम ही नहीं, बल्कि उसे चुकाने की शर्तों में भी आम लोगों को राहत देने की तैयारी है. RBI ने बड़े ग्रामीण बैंकों को यह छूट दी है कि वे अपने बोर्ड से नीतियां पास कराकर लोन की अवधि खुद तय कर सकते हैं. वहीं, अन्य कोऑपरेटिव बैंकों के लिए होम लोन चुकाने की अधिकतम समयसीमा 20 साल तय की गई है. इसमें मोरेटोरियम पीरियड भी शामिल है. अगर आप कोई ऐसा घर खरीद रहे हैं जिसका निर्माण अभी चल रहा है , तो उसके लिए 24 महीने तक के मोरेटोरियम की सुविधा मिलेगी.
सोनेचांदी से लेकर पॉलिसी पर भी मिलेगा लोन
एक और बड़ा बदलाव ‘नॉमिनल मेंबर्स’ यानी नाममात्र के सदस्यों को लेकर किया गया है. नए नियमों के तहत अब इन सदस्यों को भी बैंक से कर्ज मिल सकेगा. हालांकि, इसके लिए बैंक के स्थानीय नियमों में प्रावधान होना जरूरी है. यह लोन बिना गारंटी के नहीं मिलेगा, बल्कि इसके एवज में ग्राहकों को अपनी बैंक एफडी, सोनेचांदी के जेवर, जीवन बीमा की पॉलिसी या सरकारी प्रतिभूतियां गिरवी रखनी होंगी. इससे इमरजेंसी के वक्त लोगों को अपने ही बैंक से आसानी से पैसा मिल सकेगा.
सुरक्षित बैंकिंग के लिए सख्त किए गए नियम
ग्राहकों को सहूलियत देने के साथसाथ RBI ने बैंकों को किसी बड़े वित्तीय संकट से बचाने का भी पूरा इंतजाम किया है. बैंक अब किसी एक ग्राहक या संस्था को अपनी टियर1 कैपिटल का अधिकतम 20% ही लोन दे सकेंगे. इसके अलावा, बिना गारंटी वाले लोन को कुल बांटे गए कर्ज के 15% तक सीमित करने का प्रस्ताव है. रियल एस्टेट सेक्टर के लिए भी लिमिट तय की गई है, जहां बैंक कुल कर्ज का सिर्फ 15% ही निवेश कर पाएंगे, जिसमें से व्यक्तिगत होम लोन को छोड़कर बाकी रियल एस्टेट के लिए केवल 5% की सीमा होगी. रिजर्व बैंक ने इन नए नियमों पर 28 अगस्त, 2026 तक सभी संबंधित पक्षों से राय मांगी है. अगर इस ड्राफ्ट को बिना किसी अड़चन के अंतिम रूप दे दिया जाता है, तो ये सभी बदलाव 1 अप्रैल, 2027 से पूरी तरह से लागू हो जाएंगे.