टाटा ट्रस्ट्स से लेकर बॉम्बे हाउस तक, जानिए क्यों टाटा के हर बड़े फैसले के पीछे हैं नोएल टाटा

टाटा ट्रस्ट्स से लेकर बॉम्बे हाउस तक, जानिए क्यों टाटा के हर बड़े फैसले के पीछे हैं नोएल टाटा

सालों तक नोएल टाटा लाइमलाइट से दूर रहे, जबकि उनके सौतेले भाई रतन टाटा, टाटा ग्रुप का चेहरा बने रहे, लेकिन एन. चंद्रशेखरन के टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर दूसरा कार्यकाल न लेने के फैसले ने नोएल को ग्रुप की अगली लीडरशिप ट्रांजिशन के केंद्र में ला दिया है. सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने अब चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी को खोजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. नोएल की अध्यक्षता वाले टाटा ट्रस्ट्स का टाटा संस में लगभग 66 फीसदी हिस्सा है, जिससे इस प्रक्रिया में उनकी अहम भूमिका हो जाती है, भले ही अगला चेयरमैन टाटा संस के ‘आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन’ के तहत एक औपचारिक समिति द्वारा चुना जाएगा. इस घटनाक्रम ने टाटा ग्रुप में नोएल के सफर और उनके मैनेजमेंट स्टाइल पर भी फिर से ध्यान खींचा है, जिसकी वजह से वे ज्यादातर लाइमलाइट से दूर रहे हैं.

टाटा इंटरनेशनल से ट्रेंट तक

12 नवंबर 1956 को नवल और सिमोन टाटा के घर जन्मे नोएल ने ससेक्स यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स की पढ़ाई की और बाद में INSEAD से इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम पूरा किया. टाटा इंटरनेशनल से जुड़ने से पहले उन्होंने UK में नेस्ले के साथ अपना करियर शुरू किया था. बाद में उन्होंने ट्रेंट की कमान संभाली, जहां उन्होंने टाटा ग्रुप के सबसे बड़े कंज्यूमर बिजनेस में से एक को खड़ा किया.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ट्रेंट एक सिंगलस्टोर रिटेलर से बढ़कर 700 से ज़्यादा स्टोर वाला बिजनेस बन गया है, जिसमें वेस्टसाइड और जूडियो जैसे ब्रांड्स ने इसके विस्तार में अहम भूमिका निभाई है. जब नोएल चेयरमैन पद से हटने की तैयारी कर रहे थे, तब कंपनी का रेवेन्यू 20,000 करोड़ रुपए के पार पहुंच गया था.

जून में ट्रेंट की सालाना आम बैठक में नोएल ने शेयरहोल्डर्स से कहा कि जैसा कि आप जानते होंगे, चेयरमैन के तौर पर यह मेरी आखिरी सालाना आम बैठक होगी. टाटा इंटरनेशनल में भी उनके कार्यकाल के दौरान कंपनी का विस्तार हुआ. ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2010 से 2021 के बीच मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर नोएल के कार्यकाल में कंपनी का रेवेन्यू लगभग 500 मिलियन डॉलर से बढ़कर 3 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया.

रतन टाटा के उत्तराधिकारी से लेकर टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन तक

अक्टूबर 2024 में रतन टाटा के निधन के बाद ग्रुप में नोएल की भूमिका में बड़ा बदलाव आया. टाटा ट्रस्ट्स ने नोएल को अपना चेयरमैन नियुक्त किया, जिससे वे उन चैरिटेबल संस्थाओं के प्रमुख बन गए जो टाटा संस को कंट्रोल करती हैं. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इसके बाद वे टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए. नोएल लंबे समय से लाइमलाइट से दूर रहने वाले लीडर रहे हैं और उन्हें टाटा ग्रुप में चार दशकों से ज्यादा का अनुभव है. उन्होंने ग्रुप की कई कंपनियों में सीनियर पदों पर काम किया है, जिनमें ट्रेंट, टाटा इंटरनेशनल, वोल्टास और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन के चेयरमैन के साथसाथ टाटा स्टील और टाइटन के वाइसचेयरमैन के पद शामिल हैं. यह प्रभाव अब और साफतौर पर दिखाई दे रहा है क्योंकि टाटा संस में लीडरशिप में बदलाव की प्रक्रिया चल रही है.

नोएल और चंद्रशेखरन का मामला

चंद्रशेखरन के प्रस्तावित तीसरे कार्यकाल को लेकर महीनों से चल रही अनिश्चितता के बीच नोएल एक अहम व्यक्ति के तौर पर उभरे थे. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नोएल ने चंद्रशेखरन से टाटा संस के पांच साल के स्ट्रैटेजिक रोडमैप, टाटा संस के पब्लिक हुए बिना शापूरजी पलोनजी ग्रुप को एग्जिट ऑप्शन देने के तरीके और टाटा संस की लिस्टिंग पर चंद्रशेखरन के रुख के बारे में और स्पष्टता मांगी थी.

मई में हुई टाटा संस की बोर्ड मीटिंग में, नोएल द्वारा इलेक्ट्रॉनिक्स और एविएशन जैसे नए बिजनेस के परफॉर्मेंस, भविष्य की ग्रोथ और कैपिटल की ज़रूरतों पर चिंता जताने के बाद चंद्रशेखरन ने इन बिजनेस के लिए योजनाएं पेश कीं. नोएल की चिंताओं में एयर इंडिया और बिगबास्केट जैसे नए वेंचर में हो रहा नुकसान भी शामिल था. बाद की बोर्ड मीटिंग में, नोएल का फीडबैक इन्हीं दो बिजनेस पर केंद्रित रहा, जबकि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स एक उम्मीद की किरण के तौर पर उभरा.

नोएल की बदलती भूमिका

नोएल खुद भी टाटा की कई कंपनियों में एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं. नवंबर में 70 साल के होने पर, वे टाटा ग्रुप की छह कंपनियों के बोर्ड से रिटायर होने वाले हैं. ऐसा ग्रुप की नॉनएग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स के लिए बनी रिटायरमेंट पॉलिसी के तहत होगा. इन कंपनियों में ट्रेंट, टाटा स्टील, टाइटन, वोल्टास, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन और टाटा इंटरनेशनल शामिल हैं. हालांकि, वे टाटा संस के डायरेक्टर बने रहेंगे क्योंकि ट्रस्ट के नॉमिनी पर रिटायरमेंट की उम्र की सीमा लागू नहीं होती.

इससे टाटा संस और टाटा ट्रस्ट में उनकी भूमिका और भी अहम हो जाती है, क्योंकि ग्रुप अपने अगले चेयरमैन की तलाश कर रहा है. अगले चेयरमैन को ऐसा ग्रुप मिलेगा जो चंद्रशेखरन के नेतृत्व में एविएशन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और दूसरे नए बिजनेस में फैल चुका है. लेकिन बॉम्बे हाउस की कमान संभालने वाले अगले व्यक्ति को चुनने वाले नोएल टाटा होंगे—वही नोएल टाटा जो कभी शांत रहते थे, लेकिन धीरेधीरे पावर सेंटर के करीब आ गए हैं.

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