टोल देने होंगे, गाड़ियों की कीमत बढ़ेगी! इन 5 तरीकों का इस्तेमाल कर बिहारियों से जमकर वसूली करेगी सम्राट सरकार

टोल देने होंगे, गाड़ियों की कीमत बढ़ेगी! इन 5 तरीकों का इस्तेमाल कर बिहारियों से जमकर वसूली करेगी सम्राट सरकार

बीते एक महीने में बिहर में सरकार ने एकएक के बाद ऐसे कई फैसले लिए हैं, जिनका असर सीधे बिहार के लोगों पर पड़ेगा. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई में कैबिनेट ने हाल ही में पंचायत टैक्स और मोटर वाहन टैक्स को मंजूरी दे दी. इससे पहले भी सरकार ने सर्किल रेट से लेकर टोल टैक्स पर फैसले लिए हैं. ये ऐसे निर्णय हैं, जिनका असर समाज के किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं रहेगा. अगर आप जमीन खरीदने की योजना बना रहे हैं, नया घर बनवा रहे हैं, बाइक या ऑटो खरीदने वाले हैं, रोजाना सड़क पर सफर करते हैं या गांव में रहते हैं, तो इनमें से कोई न कोई फैसला सीधे आपको प्रभावित करेगा. सबसे बड़ा बदलाव जमीन की रजिस्ट्री से जुड़े सर्किल रेट में हुआ है, जहां कई इलाकों में न्यूनतम कीमतें दोगुनी तक कर दी गई हैं. इसके अलावा स्टांप ड्यूटी बढ़ाई गई है, पटना में होल्डिंग टैक्स में 30 साल बाद बड़ा संशोधन हुआ है. आइए डिटेल में इसके बारे में समझते हैं.

टोल देने होंगे, गाड़ियों की कीमत बढ़ेगी! इन 5 तरीकों का इस्तेमाल कर बिहारियों से जमकर वसूली करेगी सम्राट सरकार

1. जमीन खरीदना हुआ महंगा, कई जगह दोगुना हुआ सर्किल रेट

बिहार सरकार ने मिनिमम वैल्यू रजिस्टर यानी में बड़ा संशोधन लागू कर दिया है. नई व्यवस्था के तहत शहरी इलाकों में जमीन की न्यूनतम कीमतों में 100 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है, जबकि ग्रामीण और पेरिफेरल क्षेत्रों में सर्किल रेट को 1.6 गुना तक बढ़ाया गया है. इसका सीधा असर जमीन खरीदने वालों पर पड़ेगा क्योंकि रजिस्ट्री का शुल्क सर्किल रेट के आधार पर तय होता है. यानी अब जमीन खरीदने पर पहले की तुलना में अधिक स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क देना होगा. रक्सौल और पटना जैसे शहरों में कई स्थानों पर जमीन की सरकारी कीमतें दोगुनी हो गई हैं.

2. पटना में 30 साल बाद बढ़ा होल्डिंग टैक्स

सर्किल रेट के बाद सरकार ने होल्डिंग टैक्स में भी बढ़ोतरी कर दी. राजधानी पटना में रहने वाले मकान मालिकों पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है. नगर विकास एवं आवास विभाग ने होल्डिंग टैक्स की गणना के लिए वार्षिक किराया मूल्य में करीब 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दी है. यह संशोधन वर्ष 1995 के बाद पहली बार इतने बड़े स्तर पर किया गया है. नई व्यवस्था के तहत मुख्य सड़क, प्रधान मुख्य सड़क और अन्य सड़कों पर स्थित आवासीय, व्यावसायिक और अन्य श्रेणी की संपत्तियों पर टैक्स बढ़ेगा. पक्के, एस्बेस्टस और कच्चे मकान भी इसके दायरे में आएंगे. इसका मतलब है कि अब पटना के मकान मालिकों को पहले से ज्यादा होल्डिंग टैक्स देना होगा.

3. राज्य के हाईवे पर भी देना पड़ सकता है टोल

अब तक राज्य के अधिकांश लोगों को सिर्फ पर ही टोल देना पड़ता था, लेकिन जल्द ही बिहार के स्टेट हाईवे, बड़े पुलों और बायपास पर भी टोल देना पड़ सकता है. राज्य सरकार ने ‘पथ उपयोगकर्ता शुल्क नियमावली2026’ को मंजूरी दे दी है. प्रस्तावित दरों के अनुसार कार, जीप और हल्के वाहनों के लिए 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर टोल तय किया गया है. छोटे कमर्शियल वाहनों के लिए 2 रुपये प्रति किलोमीटर, दो एक्सल वाले ट्रक और बसों के लिए 4.25 रुपये प्रति किलोमीटर, भारी वाहनों के लिए 6.65 रुपये और सात एक्सल वाले वाहनों के लिए 8.10 रुपये प्रति किलोमीटर टोल प्रस्तावित है. हालांकि फिलहाल इन नियमों को केवल मंजूरी मिली है और इन्हें लागू किया जाना बाकी है. लागू होने के बाद रोजाना यात्रा करने वालों और माल ढुलाई की लागत पर इसका असर पड़ सकता है.

4. बाइक, स्कूटर और तिपहिया वाहन खरीदना भी हुआ महंगा

राज्य सरकार ने मोटर वाहन कर में भी बदलाव किया है. कैबिनेट के फैसले के अनुसार अब दोपहिया वाहन खरीदने पर 1 प्रतिशत अतिरिक्त मोटर वाहन टैक्स देना होगा. इसका मतलब है कि नई बाइक या स्कूटर खरीदने वाले लोगों को पहले की तुलना में अधिक रकम चुकानी पड़ेगी. वहीं तिपहिया वाहन खरीदने वालों पर भी अतिरिक्त बोझ डाला गया है. अब ऑटो रिक्शा और अन्य तीनपहिया वाहनों पर पहले से निर्धारित टैक्स के अलावा 1,000 रुपये अतिरिक्त टैक्स देना होगा. सरकार का कहना है कि इस अतिरिक्त राजस्व का उपयोग विकास कार्यों और सड़क ढांचे को बेहतर बनाने में किया जाएगा.

5. अब पंचायतें भी वसूलेंगी अलगअलग टैक्स और शुल्क

सरकार ने सर्किल रेट, होल्डिंग टैक्स और मोटर वाहन टैक्स तो बढ़ाया ही इसके साथ सबसे बड़ा फैसला पंचायत टैक्स के तौर पर लिया. गांवों में रहने वाले लोगों के लिए भी बड़ा बदलाव हुआ है. बिहार सरकार ने ग्राम पंचायत कर, दर और शुल्क नियमावली2026 को मंजूरी देकर पंचायतों को कई तरह के टैक्स और शुल्क वसूलने का अधिकार दे दिया है. नई व्यवस्था के तहत पंचायतें 50 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक विभिन्न प्रकार के कर और शुल्क लगा सकेंगी. पक्के मकान पर 100 रुपये, अर्धपक्के मकान पर 50 रुपये और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकानों पर 25 रुपये वार्षिक टैक्स लिया जाएगा. इसके अलावा सफाई शुल्क 30 रुपये और जलापूर्ति शुल्क भी 30 रुपये तय किया गया है. सिर्फ आम लोगों पर ही नहीं, बल्कि पेट्रोल पंप, रसोई गैस एजेंसी, ईंट भट्ठा और सिनेमा हॉल जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर भी 5,000 रुपये तक वार्षिक शुल्क लगाया जाएगा. पंचायतें होर्डिंग और अन्य विज्ञापन माध्यमों पर भी नियमों के तहत टैक्स वसूल सकेंगी.

क्या है सरकार का तर्क?

सरकार का कहना है कि इन फैसलों का उद्देश्य राज्य के राजस्व को बढ़ाना, स्थानीय निकायों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाना है. हालांकि आम लोगों के नजरिए से देखें तो पिछले एक महीने में लिए गए इन फैसलों का असर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और घरेलू बजट पर दिखाई देना तय है. चाहे घर खरीदना हो, जमीन की रजिस्ट्री करानी हो, नया वाहन लेना हो या भविष्य में राज्य की सड़कों पर सफर करना हो, कई जगह पहले से ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है. बिहार सरकार अपना बजट दुरुस्त करने के लिए ये ऐलान कर रही है मगर इनका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा.

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