तीन डाक्टर्स को मिलेगी सजा, हाई कोर्ट इस दिन सुनाएगा फैसला, अवैध गर्भपात और बोतलों में मिले थे 16 से 32 सप्ताह के भ्रूण!

तीन डाक्टर्स को मिलेगी सजा, हाई कोर्ट इस दिन सुनाएगा फैसला, अवैध गर्भपात और बोतलों में मिले थे 16 से 32 सप्ताह के भ्रूण!

बिलासपुर। 26 सितंबर 2026| छत्तीसगढ़ कोरबा जिले के दीपका स्थित लाइफ केयर हॉस्पिटल में अवैध गर्भपात और भ्रूण मिलने के 15 साल पुराने मामले में छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस एनके व्यास के सिंगल बेंच ने निचली अदालत के फैसले को आंशिक रूप से पलट दिया है।

कोर्ट ने तीन डॉक्टरों को मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी MTP एक्ट और आईपीसी की धारा 315 के तहत दोषी ठहराया है। कोर्ट ने कहा है, आरोपी यह साबित नहीं कर सके, अस्पताल में मिले 16 से 32 सप्ताह के भ्रूण किसी वैध चिकित्सीय जरूरत के तहत सद्भावपूर्वक रखे गए थे। कोर्ट ने सजा तय करने के लिए 12 अक्टूबर की तिथि तय कर दी है।

जानिए क्या है मामला?

कोरबा के सीएमएचओ और कटघोरा के एसडीएम ने 7 अगस्त 2011 को पाली रोड, दीपका स्थित लाइफ केयर हॉस्पिटल में छापाकार कार्रवाई की थी। निरीक्षण के दौरान ऑपरेशन थिएटर और अलग-अलग बोतलों में 16 से 32 सप्ताह के भ्रूण मिले थे। इसके अलावा एक्सपायरी दवाएं और गर्भपात में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी बरामद किए गए थे।

निचली अदालत ने चिकित्सकों काे कर दिया था बरी

मामले की सुनवाई के बाद कटघोरा के अपर सत्र न्यायाधीश ने 31 अगस्त 2016 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद रविदास, डॉ. मिथलेश प्रसाद और रेणू श्रीवास्तव को बरी कर दिया था। निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए राज्य शासन ने हाई कोर्ट में अपील दायरकी थी।

12 अक्टूबर को होगी सजा पर सुनवाई, इस दिन रहना होगा उपस्थित

याचिका की सुनवाई जस्टिस एनके व्यास के सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 111 के तहत अस्पताल में भ्रूण रखने की परिस्थितियों को स्पष्ट करने का दायित्व आरोपियों पर था। वे यह साबित नहीं कर सके कि भ्रूण किसी वैध चिकित्सीय आवश्यकता के कारण और सद्भावपूर्वक रखे गए थे। कोर्ट ने एमटीपी एक्ट, 1971 की धारा 5 (धारा 3 के उल्लंघन से संबंधित) और आईपीसी की धारा 315 के तहत उनकी दोषमुक्ति रद्द कर दी। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। हाई कोर्ट ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 235 (2) के तहत सजा पर सुनवाई के लिए 12 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की है। तीनों आरोपियों और उनके वकीलों को उस दिन कोर्ट में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।

पीसी-पीएनडीटी एक्ट में दोषमुक्ति बरकरार

हाई कोर्ट ने पीसी-पीएनडीटी एक्ट की धारा 22(3) के मामले में निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि इस कानून के तहत पुलिस सीधे एफआईआर दर्ज कर चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकती। इसके लिए सक्षम प्राधिकारी की शिकायत जरूरी है। इसी तकनीकी आधार पर इस एक्ट के तहत तीनों की दोषमुक्ति बरकरार रही।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *