तुर्की में कहां चलता था महिलाओं का ‘राज’? DNA जांच ने 9000 साल पुरानी कहानी बता दी

तुर्की में कहां चलता था महिलाओं का ‘राज’? DNA जांच ने 9000 साल पुरानी कहानी बता दी

अमेरिका समेत दुनिया के 32 देशों के प्रमुख दो दिन तक चलने वाले नाटो शिखर सम्मेलन के लिए तुर्की के प्रमुख शहर अंकारा में जुटे हैं. सम्मेलन 78 जुलाई को आयोजित है. इस खास इवेंट की वजह से तुर्की दुनिया में सुर्खियों में बना हुआ है. अब जब तुर्की की चर्चा हो रही है तो यहां साल 2023 में कई हजार साल पुरानी बस्ती पर हुआ बहुचर्चित डीएनए टेस्ट फिर से सुर्खियों में है. नाटो शिखर सम्मेलन के बहाने समझते हैं कि आखिर वैज्ञानिकों को डीएनए टेस्ट की जरूरत क्यों महसूस हुई? क्या नतीजा निकला? आज उस साइट पर क्या है? क्या वाकई नौ हजार साल पहले मर्दों की नहीं, महिलाओं की चलती थी? आइए, विस्तार से समझते हैं.

तुर्की में कहां चलता था महिलाओं का ‘राज’? DNA जांच ने 9000 साल पुरानी कहानी बता दी

इतिहास की किताबों में अक्सर यह माना जाता रहा है कि प्राचीन समाजों में पुरुषों की भूमिका सबसे अधिक होती थी. लेकिन विज्ञान की नई खोजें कई पुराने विचारों को चुनौती दे रही हैं. तुर्की की लगभग नौ हजार साल पुरानी एक प्रसिद्ध बस्ती चातालहोयुक पर हुए DNA अध्ययन ने ऐसे ही कई नए सवाल खड़े किए हैं. इस शोध से संकेत मिले हैं कि इस समाज में महिलाओं का स्थान बहुत मजबूत था. कई मामलों में परिवार और समाज का केंद्र महिलाएं थीं. हालांकि इसका यह अर्थ नहीं है कि वहां केवल महिलाओं का ही शासन था. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह समाज महिलाओं को विशेष महत्व देता था और परिवार की पहचान भी कई बार महिलाओं से जुड़ी दिखाई देती है.

क्या है चातालहोयुक?

चातालहोयुक दुनिया की सबसे पुरानी और बड़ी नव पाषाण कालीन बस्तियों में गिनी जाती है. यह वर्तमान तुर्की के मध्य भाग में स्थित है. यह बस्ती लगभग 7100 ईसा पूर्व से 5950 ईसा पूर्व के बीच आबाद थी यानी आज से करीब नौ हजार साल पहले यहां हजारों लोग रहते थे. यह स्थान इसलिए भी खास है क्योंकि यहां के घर एकदूसरे से जुड़े हुए थे. लोग दरवाजे की जगह छत से घर में प्रवेश करते थे. खेती, पशुपालन और सामुदायिक जीवन यहां की प्रमुख विशेषताएं थीं.

तुर्की के मध्य भाग में स्थित चातालहोयुक सभ्यता को लेकर कई रिसर्च हुई हैं. फोटो: unesco

DNA टेस्ट से कैसे हुई नई खोज?

वैज्ञानिकों ने चातालहोयुक में मिले सैकड़ों मानव कंकालों का डीएनए विश्लेषण किया. इसके साथ ही यह भी देखा गया कि किस व्यक्ति को किस घर के नीचे दफनाया गया था. शोध का उद्देश्य यह समझना था कि एक ही घर में दफन लोग आपस में रिश्तेदार थे या नहीं. डीएनए जांच से पता चला कि कई घरों में दफन महिलाओं के बीच जैविक संबंध अधिक मजबूत थे. वहीं कई पुरुष ऐसे मिले जिनका उस परिवार से सीधा आनुवंशिक संबंध नहीं था. यहीं से वैज्ञानिकों को यह संकेत मिला कि विवाह के बाद पुरुष संभवतः महिलाओं के परिवार के साथ रहने आते थे.

महिलाओं से जुड़ा था परिवार?

इस अध्ययन ने एक महत्वपूर्ण संभावना सामने रखी. कई परिवारों में बेटियों और महिलाओं का संबंध पीढ़ियों तक एक ही घर से जुड़ा रहा. दूसरी ओर पुरुषों के डीएनए में अधिक विविधता दिखाई दी. इसका अर्थ यह हो सकता है कि पुरुष अलगअलग स्थानों से विवाह करके आते थे, जबकि महिलाएं अपने मूल परिवार के साथ ही रहती थीं. इसे सामाजिक विज्ञान की भाषा में मैट्रिलोकल व्यवस्था कहा जाता है यानी विवाह के बाद पति पत्नी के परिवार के पास रहने आता है. यूपीबिहार जैसे राज्यों में इसे घर जमाई कहा जाता है.

एक शिशु को एक वयस्क महिला के साथ दफनाया गया था. फोटो: Scott D. Haddow

क्या यह मातृसत्तात्मक समाज था?

शोधकर्ताओं ने यह दावा नहीं किया कि वहां महिलाओं का पूर्ण शासन था. उन्होंने केवल इतना कहा कि महिलाओं की सामाजिक भूमिका बहुत मजबूत थी. परिवार, संपत्ति या सामाजिक पहचान में महिलाओं का महत्व अधिक हो सकता है. यानी यह समाज पूरी तरह मातृसत्तात्मक था, ऐसा कहना अभी वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा.

कब्रों से भी मिले कई तरह के संकेत

चातालहोयुक में लोग अपने घरों के फर्श के नीचे ही मृतकों को दफनाते थे. वैज्ञानिकों ने देखा कि कई बार छोटी लड़कियों और महिलाओं को विशेष वस्तुओं के साथ दफनाया गया था. कुछ कब्रों में आभूषण, सुंदर सामान और अन्य मूल्यवान वस्तुएं भी मिलीं. इससे यह संकेत मिलता है कि समाज में महिलाओं को सम्मानजनक स्थान प्राप्त था.

डीएनए टेस्ट ने कई राज खोले. फोटो: Pexels

कला में भी दिखा महिलाओं का महत्व

इस बस्ती से मिली कई मूर्तियों में महिलाओं को प्रमुख रूप से दर्शाया गया है. कुछ मूर्तियों में महिलाओं को शक्ति, समृद्धि और जीवन का प्रतीक माना गया है. हालांकि, सभी विशेषज्ञ इस बात पर एकमत नहीं हैं कि ये मूर्तियां देवी की हैं या सामान्य महिलाओं की. फिर भी यह साफ है कि महिलाओं की छवि इस समाज की संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा थी.

वैज्ञानिकों ने क्या कहा?

शोध में शामिल वैज्ञानिकों का कहना है कि डीएनए तकनीक ने प्राचीन समाजों को समझने का नया रास्ता खोल दिया है. पहले पुरातत्वविद केवल घरों, औजारों और कब्रों के आधार पर अनुमान लगाते थे. अब डीएनए विश्लेषण से यह पता लगाया जा सकता है कि लोग आपस में किस तरह जुड़े थे और परिवार कैसे बनते थे? इससे इतिहास की कई पुरानी धारणाओं की दोबारा जांच संभव हो रही है.

यह खोज क्यों है खास?

इस अध्ययन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सामाजिक व्यवस्था को वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर समझने की कोशिश करता है. पहले माना जाता था कि लगभग सभी प्राचीन समाज पुरुष प्रधान थे लेकिन अब अलगअलग क्षेत्रों में हुए शोध बताते हैं कि हर समाज की अपनी अलग व्यवस्था थी. कुछ समाजों में पुरुष प्रमुख थे तो कुछ में महिलाओं की भूमिका अधिक प्रभावशाली थी. इसलिए पूरे इतिहास को एक ही नजरिए से नहीं देखा जा सकता.

पुरातत्वविद यह जानना चाहते थे कि चातालहोयुक के लोग अपने परिवार कैसे बनाते थे. फोटो: Pexels

आधुनिक समाज के लिए क्या संदेश?

यह खोज बताती है कि मानव समाज हमेशा एक जैसा नहीं रहा. समय, स्थान और संस्कृति के अनुसार परिवार और समाज की संरचना बदलती रही है. महिलाओं की भूमिका केवल घर तक सीमित थी, यह धारणा हर प्राचीन समाज पर लागू नहीं होती. इतिहास में ऐसे कई उदाहरण मिल रहे हैं जहां महिलाओं ने सामाजिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान बनाया.

शोध की सीमाएं भी समझना जरूरी

वैज्ञानिक स्वयं मानते हैं कि केवल एक बस्ती के आधार पर पूरे प्राचीन तुर्की या पूरी दुनिया के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. यह अध्ययन चातालहोयुक की सामाजिक संरचना को समझने में मदद करता है. भविष्य में अन्य प्राचीन स्थलों पर होने वाले डीएनए अध्ययन इस विषय को और स्पष्ट करेंगे. इसलिए यह कहना अधिक उचित होगा कि यह शोध नए संकेत देता है, न कि अंतिम सत्य.

यह शोध कब हुआ?

चातालहोयुक पर डीएनए आधारित यह महत्वपूर्ण शोध वर्ष 2023 में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका नेचर कम्युनिकेशन्स में प्रकाशित हुआ था. यह अब तक इस बस्ती पर किए गए सबसे व्यापक आनुवंशिक अध्ययनों में से एक माना जाता है. शोध का नेतृत्व तुर्की और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के वैज्ञानिकों की टीम ने किया. अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ताओं में मध्य पूर्व तकनीकी विश्वविद्यालय, तुर्की की प्रोफेसर आयशेर्गुल किलिंच और उनके सहयोगी शामिल थे. इस परियोजना में यूरोप और तुर्की के कई पुरातत्वविदों, आनुवंशिकी विशेषज्ञों और मानव विज्ञानियों ने भी भाग लिया.

इस शोध की जरूरत क्यों महसूस हुई?

कई दशकों से पुरातत्वविद यह जानना चाहते थे कि चातालहोयुक के लोग अपने परिवार कैसे बनाते थे, विवाह के बाद पति या पत्नी किसके घर रहते थे और समाज की संरचना कैसी थी? केवल मकानों, कब्रों और औजारों के आधार पर इन सवालों के स्पष्ट उत्तर नहीं मिल पा रहे थे. इसलिए वैज्ञानिकों ने प्राचीन डीएनए का अध्ययन किया, ताकि लोगों के आपसी रिश्तों और परिवारों की वास्तविक संरचना को वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर समझा जा सके.

आज उस स्थान पर क्या है?

आज चातालहोयुक तुर्की के कोन्या प्रांत में स्थित एक संरक्षित पुरातात्विक स्थल है. यहां कोई आधुनिक शहर नहीं बसा है. खुदाई वाले क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए विशेष संरचनाएं बनाई गई हैं, ताकि प्राचीन अवशेष मौसम से सुरक्षित रहें. यह स्थल साल 2012 से यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है. यहां दुनिया भर से शोधकर्ता, इतिहासकार और पर्यटक प्राचीन मानव सभ्यता को देखने और समझने के लिए आते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *