दुनिया पर मंडराया $6.5 ट्रिलियन का महासंकट! चीन ने चली ‘रेयर अर्थ’ चाल, टेक और ऑटो सेक्टर में मचेगा हाहाकार

दुनिया पर मंडराया .5 ट्रिलियन का महासंकट! चीन ने चली ‘रेयर अर्थ’ चाल, टेक और ऑटो सेक्टर में मचेगा हाहाकार

वैश्विक टेक, ऑटोमोबाइल और डिफेंस सेक्टर पर एक बहुत बड़ा संकट मंडरा रहा है. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की ‘ग्लोबल क्रिटिकल मिनरल्स आउटलुक 2026’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यदि चीन दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर लगाई गई पाबंदियों को पूरी तरह लागू करता है, तो चीन से बाहर पूरी दुनिया में हर साल $6.5 ट्रिलियन का औद्योगिक उत्पादन ठप या प्रभावित हो सकता है.यह पाबंदी वैश्विक सप्लाई चेन में चीन के एकाधिकार और अमेरिका के साथ जारी भूराजनीतिक तनाव का नतीजा है. आइए इसे विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं…

दुनिया पर मंडराया .5 ट्रिलियन का महासंकट! चीन ने चली ‘रेयर अर्थ’ चाल, टेक और ऑटो सेक्टर में मचेगा हाहाकार

क्या हैं ‘रेयर अर्थ’ मिनरल्स और क्यों मची है हलचल?

रेयर अर्थ्स कुल 17 ऐसे खनिजों का समूह है, जिनकी जरूरत आधुनिक तकनीक में बहुत कम मात्रा में होती है, लेकिन इनके बिना हाईटेक उत्पाद बनाना असंभव है. स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक गाड़ियां , विंड टरबाइन, लड़ाकू विमान और सैटेलाइट्स जैसी संवेदनशील चीजें पूरी तरह इन्हीं पर निर्भर हैं. वैश्विक उद्योगों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि भले ही ये खनिज किसी उत्पाद की कुल लागत का बहुत छोटा हिस्सा होते हैं, लेकिन इनकी सप्लाई रुकने से अरबोंखरबों का पूरा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट बंद हो सकता है.

सप्लाई चेन का अत्यधिक केंद्रीकरण

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, IEA के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने चेतावनी देते हुए कहा है कि दुनिया की एक बहुत बड़ी आर्थिक वैल्यू कुछ चुनिंदा और बहुत कम मात्रा में मिलने वाले क्रिटिकल मिनरल्स पर निर्भर है. समस्या यह है कि इनकी सप्लाई चेन बहुत अधिक केंद्रित है, जिसकी वजह से ये बेहद संवेदनशील और कमजोर हो जाती है. चीन ने पिछले साल अक्टूबर में निर्यात प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाते हुए लाइसेंस नियमों को सख्त कर दिया था. हालांकि, इन कड़े नियमों के पूर्ण कार्यान्वयन को नवंबर 2026 तक के लिए टाल दिया गया है, लेकिन वैश्विक बाजार के सिर पर यह तलवार लगातार लटक रही है.

संकट से निपटने के लिए IEA का ‘इमरजेंसी प्लान’

इस वैश्विक कमजोरी को दूर करने के लिए, आईईए ने दुनिया के देशों को मिलकर एक मल्टीलेटरल स्टॉकपाइलिंग बनाने की सलाह दी है.

11 हाईरिस्क मिनरल्स: आईईए ने 11 सबसे जोखिम भरे खनिजों की पहचान की है जिनका इमरजेंसी बैकअप तैयार करना जरूरी है.
कितनी आएगी लागत: इस स्टॉकपाइल को बनाने के लिए शुरुआत में लगभग 9.2 बिलियन डॉलर की खरीद करनी होगी, और इसका सालाना मेंटेनेंस खर्च करीब 900 मिलियन डॉलर आएगा.

आर्थिक बीमा की तरह: रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि यह खर्च बड़ा लग सकता है, लेकिन 6.5 ट्रिलियन डॉलर के संभावित नुकसान के सामने यह एक बेहद मामूली ‘मिनरल सिक्योरिटी प्रीमियम’ या आर्थिक बीमा की तरह है.

क्या कम हो रहा है चीन का दबदबा?

दुनिया के देश अब चीन पर अपनी निर्भरता घटाने के लिए सक्रिय कदम उठा रहे हैं. 2023 से 2025 के बीच क्रिटिकल मिनरल्स प्रोजेक्ट्स के लिए सरकारी वित्तीय निवेश चार गुना बढ़कर 65 बिलियन डॉनर तक पहुंच गया है.

क्षेत्र/देश

2023 में हिस्सेदारी

2025 में हिस्सेदारी

2035 का अनुमान

चीन

90% से अधिक

85%

70% तक गिर सकती है

अमेरिका और मलेशिया

कम

बढ़ता हुआ निवेश

रेयर अर्थ रिफाइनिंग में बड़ी हिस्सेदारी

रेयर अर्थ के मामले में तो थोड़ी विविधता आ रही है, लेकिन अन्य ऊर्जा खनिजों जैसे निकल और बाकी मेटल्स के रिफाइनिंग के मामले में वैश्विक एकाधिकार और ज्यादा गहरा गया है. अमेरिका और यूरोपीय देशों पर इस पाबंदी का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी देश भले ही आत्मनिर्भर बनने का दावा कर रहे हों, लेकिन चीन के इस ‘गला घोंटू’ नियंत्रण से पूरी तरह बाहर निकलने में दुनिया को अभी कई साल लग सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *