दुबई में पार्क बना ऑफिस…पेड़ों की छांव में लैपटॉप, ‘वर्क फ्रॉम पार्क’ में कौनकौन सी सुविधाएं?​

दुबई में पार्क बना ऑफिस…पेड़ों की छांव में लैपटॉप, ‘वर्क फ्रॉम पार्क’ में कौनकौन सी सुविधाएं?​

कभी सोचा है कि ऑफिस की चारदीवारी से निकलकर हरी घास और पेड़ों के बीच बैठकर काम करने का मौका मिले? दुबई ने इस कल्पना को हकीकत बना दिया है. दुनिया को नईनई चीज़ें देने वाले दुबई ने अब पब्लिक पार्कों को वर्कस्पेस में बदलने की मुहिम शुरू की है. नाम है ‘वर्क फ्रॉम पार्क’. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इसे अल बरशा पॉन्ड पार्क में बनाया गया है.

दुबई म्युनिसिपैलिटी ने यह पहल इसलिए शुरू की है कि सार्वजनिक पार्कों में काम, आराम और प्रकृति तीनों का मेल हो सके. इसमें पार्कों के भीतर ऐसे कामकाजी माहौल तैयार किए जा रहे हैं जिनमें दफ्तर जैसी सुविधाएं खुले वातावरण में मिलती हैं. यानी यहां बैठने के लिए बस एक बेंच नहीं, बल्कि काम करने लायक पूरा इंतजाम रहता है.

यह योजना अप्रैल 2026 में घोषित हुई थी. पहली फ्लैगशिप साइट अल बरशा पॉन्ड पार्क में बनाई गई है, आगे चलकर सालभर में अमीरात के दूसरे इलाकों में भी ऐसी और जगहें तैयार करने की योजना है.

यहां क्याक्या खास?

पहली साइट में मॉड्यूलर वर्कस्पेस हैं, जो उच्च सस्टेनेबिलिटी मानकों पर बने हैं और पार्क के प्राकृतिक माहौल में घुलमिल जाते हैं. इन्हें पार्क में ही बनाने के बजाय बाहर तैयार करके लाकर लगाया गया है. इसके लिए ग्रुप अमाना की कंपनी डुबॉक्स ने ऑफसाइट मॉड्यूलर निर्माण तकनीक का इस्तेमाल किया, ताकि पर्यावरण पर असर कम से कम पड़े.

यहां कई सुविधाएं हैं.

सुविधाओं की बात करें तो यहां रोजमर्रा के काम के लिए डेस्क, मीटअप और सेशन के लिए इवेंट स्पेस, पॉडकास्ट स्टूडियो और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए क्रिएटिव प्रोडक्शन एरिया की योजना है. मतलब सिर्फ फ्रीलांसर ही नहीं, यूट्यूबर्स, पॉडकास्टर्स और स्टार्टअप टीमें भी इसका फायदा उठा सकती हैं.

बुकिंग कैसे होगी?

इन वर्कस्पेस की बुकिंग ‘लेट्सवर्क’ प्लेटफॉर्म के जरिए होगी, जो पहले से शहर की कई वर्कफ्रेंडली जगहों को लिस्ट करता है. इस प्रोजेक्ट में दुबई म्युनिसिपैलिटी के साथ ग्रुप अमाना और लेट्सवर्क साझेदार हैं. लेट्सवर्क के सहसंस्थापक उमर अल मेहरी ने इसे यूएई में फ्लेक्सिबल वर्क का भविष्य बदलने की दिशा में अहम कदम बताया है.

वर्क फ्रॉम पार्क.

पार्क भी वही, मजा भी वही

अच्छी बात यह है कि इन पार्कों की पहचान नहीं बदली जा रही. ये पार्क खेल के मैदान, स्पोर्ट्स सुविधाएं, रनिंग और साइक्लिंग ट्रैक, खानेपीने के जोन और परिवारों के लिए खुली जगहों से पहले ही लैस हैं. यानी एक तरफ आप लैपटॉप पर रिपोर्ट बना रहे हों और दूसरी तरफ बच्चे झूले पर खेल रहे हों. लंच ब्रेक में टहलना या शाम को ट्रैक पर दौड़ लगाना भी आसान.

किसे होगा सबसे ज़्यादा फायदा?

यह पहल उद्यमियों, फ्रीलांसरों और कारोबारों के लिए लचीले और टिकाऊ वर्कस्पेस देने के मकसद से शुरू हुई है, ताकि दुबई की क्रिएटिव इकॉनमी को सहारा मिले. आज के दौर में रिमोट वर्क और फ्रीलांसिंग तेजी से बढ़ी है. कई लोग घर में अकेलापन और कैफे में शोरशराबे से परेशान रहते हैं. पार्क में खुली हवा, हरियाली और शांति दिमाग को तरोताजा रखती है. यही इस आइडिया की सबसे बड़ी ताकत है.

बड़े विजन का हिस्सा

यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक नया ट्रेंड नहीं है. यह दुबई 2040 अर्बन मास्टर प्लान और दुबई इकोनॉमिक एजेंडा D33 जैसी लंबी योजनाओं से जुड़ा है. इसका मकसद फ्लेक्सिबल वर्क और अर्थव्यवस्था के विविधीकरण को बढ़ावा देना है. हाल के ‘वर्क फ्रॉम होटल’ ट्रेंड के बाद यह दुबई का अगला कदम माना जा रहा है.

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